आप रहें जागरूक

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बड़े-बड़े नामी-गिरामी बिल्डर्स, प्रोजेक्ट के नाम पर अलॉटमेंट के समय बड़े प्यार से ग्राहकों से पैसा लेते हैं, लेकिन किसी कारणवश उसी ग्राहक को पैसा वापस लेना होता है, तो उन्हें लोहे के चने-चबाने पड़ते हैं। ज्यादातर मामलों में रिफंड का फंडा इतना जटिल हो जाता है कि ग्राहक खुद ठंडे पड़ जाते हैं।  कुछ जगह पर तो बिल्डर्स द्वारा स्कीम लॉन्च करने के बाद पैसों को लेकर चंपत हो जाने की बात भी सामने आई है। आखिर इसकी वजह क्या है। इस रिफंड के मामले को लेकर पूरे मामले की तह में जाकर इस विषय से जुड़े कई अनसुलझी बातों पर प्रकाश डाल रहे हैं

रियल एस्टेट की विभिन्न कंपनियां प्रॉपर्टी बाज़ार में तेज़ी लाने के लिए तमाम सस्ती हाउसिंग स्कीमें ला रही हैं। ऐसे में आम आदमी भी अपने आशियाने की चाहत को पूरा करने के लिए इन स्कीमों का फायदा उठाना चाह रहे हैं। कुछ ग्राहक ऐसे भी हैं जो भविष्य को ध्यान में रखकर रियल एस्टेट में पैसा इसलिए लगा रहे हैं  कि उन्हें भविष्य में उनके पैसे का अधिक से अधिक रिटर्न मिलेगा। ग्राहकों के इस मूड को देखते हुए कई ऐसे तमाम बिल्डर व कंपनियां सामने आयी हैं, जो सिर्फ लुभावने विज्ञापनों के जरिए निर्धारित समय पर बिल्डिंग और फ्लैट का कब्ज़ा देने की बात कर रही हैं। इसके अलावा कुछ कंपनियां प्रॉपर्टी नहीं मिलने पर तुरंत पैसा वापस करने की भी बात कर रही हैं। …लेकिन वास्तविकता यह हैं कि खरीददार यानि ग्राहक ऐसी लुभावनी स्कीमों में पैसा लगाकर फंसा हुआ महसूस कर रहा है। जिन्होंने पहले से प्रॉपर्टी में पैसा निवेश कर रखा है, वे रिटर्न को लेकर काफी चिंतित हैं। वहीं फाइनेंसर कंपनियां पैसा फंस जाने के कारण परेशान हैं। खास बात तो यह है कि बिल्डर और डेवलपर अपने प्रोजेक्ट में पैसे व खरीददार के अभाव में प्रॉपर्टी न बिकने को लेकर काफी दुखी हैं। जिन लोगों ने बैंकों से लोन लेकर प्रॉपर्टी में पैसा लगाया है, उन्हें ब्याज की चिंता सताये जा रही है। इसी कारण कुछ स्थानों पर बिल्डर्स  अपने पूर्व किए गए वादों से भी मुकर रहे हैं। ग्राहकों से वायदा करने वाले  कुछ  बिल्डर्स  उनके साथ धोखाधड़ी का खेल भी खेलने में लगे हैं। एक ओर जहां ग्राहक पूरी बिक्री राशि का भुगतान कर बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों के कजऱ् तले डूबे हुए हैं, वहीं बिल्डरों के वादे को पूरा न होते देख उनके घर की चाहत का सपना भी टूटता नज़र आ रहा है। वायदा करने वाले कई बिल्डर अपने ऑफिस बदलकर गायब हो चुके हैं या फिर वे फोन पर बात नहीं करना चाहते हैं। और कुछ बिल्डर अपने वादे पूरा करने के एवज में प्रॉपर्टी में बढ़ी कीमतों के चलते ज्यादा पैसे की मांग कर रहे हैं, जबकि इन सभी मामलों में कब्ज़े मिलने की संभावनायें दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रही है। ऐसे मामलों में खरीददार अपने आप को बेसहारा, प्रताडि़त एवं फंसा हुआ महसूस कर रहा है। अहम् सवाल यह है कि ग्राहकों को रियल एस्टेट की जालसाल कंपनियों एवं बिल्डरों के चंगुल से कैसे बचाया जाये?
परेशान ग्राहक कहां करें शिकायत
हमारे देश में प्रॉपर्टी में धोखाधड़ी के मामले को लेकर कुछ कानून बनाये गये हैं। ग्राहकों के साथ गड़बड़ी करने वाले बिल्डर्स पर लगाम लगाने के सुरक्षा अधिनियम, 1986 के तहत बिल्डर्स द्वारा ग्राहकों को मुआवजा दिलाने, बुक कराये गये फ्लैट देने के लिए बिल्डर्स को मज़बूर करने का प्रावधान दिया गया है। धोखाधड़ी का शिकार ग्राहक, बिल्डर द्वारा सेवा में दी गई कमी का उल्लेख करते हुए उपभोक्ता फोरम जैसे राज्य, जिला और  राष्ट्रीय आयोग में शिकायत कर सकता है। इनमें जिनकी प्रॉपर्टी की कीमत बीस लाख रुपये से कम है, उनकी शिकायत जिला फोरम में और बीस लाख से ज्यादा एक करोड़ से कम, उनकी शिकायत राज्य आयोग में दजऱ् करायी जा सकती है। …और जहां प्रॉपर्टी की कीमत एक करोड़ से ज्यादा होगी, उसकी शिकायत राष्टï्रीय आयोग में ही दर्ज  करायी जा सकती है। यह शिकायत  बिल्डर्स के खिलाफ व्यक्तिगत या फिर सामूहिक रूप से कर सकते हैं। बशर्ते शिकायतें एक ही बिल्डर के खिलाफ हों, इसके लिए बिल्डर ग्रुप एसोसिएशन या कंज्यूमर एसोसिएशन की मदद ली जा सकती है। इसके अलावा ग्राहक कोर्ट में भी मुकदमा दर्ज  कर सकता है। साइट का फोटो लेकर कोर्ट में दिखाया जा सकता है कि बिल्डर ने क्या वायदा किया था और वर्तमान में उसकी कार्य की स्थिति क्या है। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में अपनी शिकायत को मज़बूती प्रदान कर सकता है। उपरोक्त कानून के माध्यम से ग्राहक शिकायत दजऱ् कर अपने मामले का निपटारा करा सकता है।
खरीददार बने जागरुक 
शहर में अपना फ्लैट हो, यह भला कौन नहीं चाहता, लेकिन फ्लैट बुक करने से पहले कंपनी या संबन्धित बिल्डर्स के बारे में और लोकेशन के बारे में जितनी बेहतर जानकारी होगी, उतने ही बेहतर नतीज़े पर आप पहुंच सकेंगे। प्रॉपर्टी के विज्ञापनों में दिये गये टेलीफोन नंबर व वेबसाइट पर स्वयं सर्च करके और प्रॉपर्टी एजेंट्स एवं डीलर्स की सहायता से अ’छी तरह से जानकारी लेना न भूलें।  दूसरी बात यदि आप प्रॉपर्टी फाइनेंस करा रहे हैं तो फाइनेंस कंपनियों व बैंकों की स्कीमों के बारे में यानि लोन स्कीम में कुछ हिडन कॉस्ट भी हो, उसकी भी पूरी जानकारी लें। ऐसे में आप बिल्डर्स की धोखाधड़ी से बच सकते हैं।

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