बदल रहा है इंडिया !

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देश की आबादी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और अधिकांश आबादी शहरों की ओर पलायन हो रही है। एक्सपर्ट के अनुसार 2050 तक विश्व का शहरी जनसंख्या दोगुनी हो जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि इन जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक साल 7 नई दिल्ली जैसी सिटी बसानी होगी। शहरी इलाके की आबादी का देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान है। वर्तमान समय में देश में पूरी आबादी का करीब 31 प्रतिशत शहरों में रह रही है। ये आबादी देश की पूरी जीडीपी में 60 प्रतिशत का हिस्सेदारी रखते हैं। अनुमान है कि आने वाले 15 वर्षों में अर्बन इंडिया देश की जीडीपी में करीब 75 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

देश के विकास दर को रफ्तार देने में अर्बन सिटीज एक इंजन के रूप में है, जो हमारी दिशा और दशा दोनों को निर्धारित करती है। इस जनसंख्या को भविष्य में और भी बड़े स्तर पर कई स्मार्ट सिटीज की ज़रूरत होगी, जो बढ़ती आबादी को एक बेहतर सामंजस्य प्रदान करेगी। यहां पर स्मार्ट सिटीज का कॉन्सेप्ट ऐसा होगा, जो कई प्रकार की जटिलतारओं को खत्म करेगा। यह सिटीज जहां कार्य करने की क्षमता और दक्षता को बढ़ावा देगा, वहीं खर्च कम करने के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा। एक स्मार्ट सिटी में प्रतिस्पर्शा, पूंजी और स्थिरता जैसी प्रमुख प्रमुख विशेषताएं होंगी। आप स्मार्ट सिटीज के कॉन्सेप्ट को कुछ इस प्रकार से समझ सकते हैं कि एक साधारण मोबाइल फोन और स्मार्ट फोन के बीच क्या अंतर है। देखा जाय तो इन दोनों के बीच क्वालिटी और फीचर्स का अंतर है। यह क्वालिटी और फीचर्स स्मार्ट सिटीज के कॉन्सेप्ट को काफी हद तक परिभाषित कर सकती है। हाल में एक सम्मेलन में केंद्रीय शहरी मंत्री वैंकया नायडू ने स्मार्ट सिटीज के बारे में कहा कि स्मार्ट नेता और लोग ही स्मार्ट सिटी का निर्माण कर सकते हैं।   स्मार्ट सिटी के निर्माण के लिए स्मार्ट नेतृत्व और काबिल लोग पहली ज़रूरत हैं। देश में शहरी प्रशासन की स्थिति और शहरी जीवन को उच्चस्तरीय बनाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली शहरी प्रशासन के लिए ऐसे होनहार नेतृत्व की आवश्यकता होती है जो साहसी, पहल करने वाला, तत्पर और ज़रूरत पडऩे पर कड़े फैसले लेने वाला, प्रशासन में सुधार लाने वाला, अवैध निर्माण और अवैध कब्ज़ों को रोकने वाला और माफिया पर कार्रवाई करने वाला हो। होनहार लोगों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को सचेत, प्रश्न पूछने वाले, सेवाओं का दाम चुकाने वाले, साथी नागरिकों को नियमों का उल्लंघन करने से रोकने वाले और अपना हक मांगने वाला होना चाहिए। इन सभी बातों को ध्यान में रखने के बाद ही स्मार्ट सिटी बनाने का कार्य पूरा हो सकेगा।  वेंकैया नायडू ने स्मार्ट सिटी की व्याख्या करते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी ऐसी सिटी को कहा जा सकता है, जहां शहरी जीवन आरामदायक हो, अच्छे प्रशासन से जीवनस्तर बेहतर बन गया हो, कुशल चिकित्सा व शिक्षा सेवाएं हों, बिजली-पानी की आपूर्ति चौबीसों घंटे हो, यातायात के अच्छे साधन हों, उच्चस्तरीय सफाई व्यवस्था हो, जरूरतमंदों को रोजगार मिल सके, सुदृढ़ साइबर संपर्क-सुविधाएं हों, जिनका लाभ आय, उम्र या लिंगभेद के भेदभाव के बिना सभी को मिल सके। मुख्य लक्ष्य तो समृद्ध, स्वस्थ और खुशहाल शहरों का निर्माण करना है। मंत्री महोदय ने कहा कि प्रभावशाली शहरी प्रशासन को प्राकृतिक संसाधनों का मितव्ययता से इस्तेमाल करने, कम से कम कचरा पैदा करने, चीजों के दोबारा इस्तेमाल, जल संचयन और ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल का लक्ष्य रखना चाहिए।

शहरी हकीकत और स्मार्ट सिटीज की ज़रूरत
देश के शहरीकरण के बारे में कहा जा रहा है कि वर्तमान समय में 377 मिलियन लोग (31 प्रतिशत) देश के शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं। अगले 15 सालों में, इसमें 157 मिलियन की संख्या और जुड़ जाएगी। 2050 तक शहरों में रहने वालों की संख्या 500 मिलियन हो जाएगी। तब पहली बार, देश की आधी जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास कर रही होगी। शहरों में रहने वाले 70 प्रतिशत लोग जिनकी संख्या एक लाख से अधिक है, 468 शहरों/ कस्बों में रहते हैं।  शहरीकरण और आर्थिक विकास आपस में जुड़े हुए हैं इसलिए बढ़ते शहरीकरण में आर्थिक विकास का इंजन बनने की अपार संभावनाएं हैं। इस बात के समर्थन में श्री नायडू ने कहा कि हालांकि केवल 31 प्रतिशत जनता ही शहरों में निवास करती है पर वे देश के जीडीपी में 60 प्रतिशत का योगदान देते हैं। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री ने 100 स्मार्ट शहर बनाने और बाकी शहरों और कस्बों में सुविधाओं में सुधार करने का सुझाव दिया है।
स्मार्ट सिटी के पहल पर राज्यों के सुझाव 

स्मार्ट सिटी पहल का सर्वसम्मति से स्वागत करते हुए राज्यों ने दस व्यापक सुझाव रखे हैं। क्रियान्वयन में लचीला रुख अपनाने व क्षमता निर्माण, परियोजना की रिपोर्ट बनाने में तकनीकी सहायता और उच्च वित्तीय सहायता आदि इनमें शामिल हैं। अधिकारियों से राज्यों के सुझावों की विस्तार से जांच-पड़ताल करने और आगामी अंतर-मंत्रालय बैठक में विचार-विमर्श के लिए एक प्रस्ताव। वित्त और रक्षा, राजमार्ग और सड़क यातायात, रेलवे, बिजली, पर्यावरण और वन मंत्रियों से सहयोग। स्मार्ट सिटी परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर राज्यों से निम्न सुझाव प्राप्त हुए हैं।

1.क्रियान्वयन में लचीलापन
2. प्रदर्शन को प्रोत्साहन
3. तकनीकी अपनाने के लिए क्षमता निर्माण
4. स्थानीय शहरी निकायों में संसाधनों की कमी को देखते हुए अधिक केंद्रीय सहायता
5. भारत सरकार द्वारा मंजूरी प्रक्रिया में तेजी
6. ठोस कचरा प्रबंधन और जलापूर्ति परियोजनाओं में आ रही धन की कमी का अधिक से अधिक प्रबंध
7. पूंजीगत व्यय केंद्र सरकार वहन करें क्योंकि निजी कंपनियों को मिलने वाले शुल्क से वे केवल परिचालन व रखरखाव का काम ही करेंगी
8. परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विशेष उद्देश्य वाहन
9. संभाव्यता प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का खर्च केंद्र को देना होगा
10. नई तकनीक के बारे में केंद्र को मार्गदर्शन करना होगा, क्योंकि यह राज्यों/केंद्र सरकारों के दायरे में नहीं आता। कुछ राज्यों ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी व्यवस्था को अपनाने से जुड़ी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। यहां शहरी परियोजनाओं में उपयोगकर्ता शुल्क व अन्य जटिलताएं सामने आती हैं।

 फैक्ट शीट ऑफ स्मार्ट सिटी

-चीन में टिनजियांग नॉलेज सिटी समेत सुहो, गोंजो, सिहॉन स्मार्ट सिटी हैं।
-अहमदाबाद एयरपोर्ट से 18 किलोमीटर की दूरी पर द गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंशियल टेक (गिफ्ट) सिटी मोदी के प्रोजेक्ट की पहली सिटी हो सकती है
-रिपोर्ट के अनुसार, 70 हजार करोड़ का ये प्रोजेक्ट 886 एकड़ में फैला होगा। 2011 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में 10 साल लगेंगे।
– इन प्रोजेक्ट्स के जरिए 5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रुप से और 5 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिलने का वादा किया गया है।
-इन स्मार्ट सिटी में घरों से निकलने वाले कूड़े-कचड़े को पाइपलाइन के जरिए सीधे वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। सिटी के अंदर ही रोज के काम को व्यवस्थित करने के लिए इनफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन सेंटर भी बनाया जाएगा।
-2,500 स्मार्ट सिटी में काम करनेवाली आईबीएम के अनुसार, एक स्मार्ट सिटी के अंदर किए जानेवाले काम के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

-बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में 100 स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया था। लेकिन इतनी स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करीब 20 से 30 साल लग सकते हैं। इसीलिए सबसे पहले दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर पर 7 स्मार्ट सिटी बनाई जाएंगी।
– किसी भी स्मार्ट सिटी में सूचना तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया जाता है.सेंसर,कैमरे, वायरलैस उपकरणों, डाटा सेंटर बनाए जाते हैं। स्मार्ट सिटी को बनाते वक्त इसे इको फ्रेंडली भी बनाया जाता है। स्मार्ट सिटी में ऊर्जा बचाने के लिए भी पूरे इंतजाम किए जाते हैं।

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