प्रॉपर्टी के देखरेख की जिम्मेदारी

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responsibilities property executive
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मिस्टर सुमित काफी समय पहले दिल्ली के पॉश कॉलोनी में घर लिया था। वे इस घर में करीब 4-5 साल तक रहे भी। लेकिन विदेश से बेहतर ऑफर और पैसे मिलने के कारण सुमित सपरिवार चले गए। वह वहीं पर सेटल हो गए। उन्होंने कुछ दिनों बाद दिल्ली स्थित अपनी प्रॉपर्टी के देखरेख की जि़म्मेदारी रामदीन जो उनके गांव के रहने वाला था, उसे सौंप दिया। वक्त धीरे-धीरे बीतने लगा, देखते -देखते 20 साल कैसे बीत गया, सुमित को पता ही नहीं चला। शुरुआती समय में रामदीन पूरी प्रॉपर्टी का रेंट उसे हर महीने भेज दिया करता था, लेकिन अचानक दो-चार महीने से पैसे आने बंद हो गए। सुमित को लगा कि किसी कारणवश रामदीन पैसे नहीं भेज रहा है। एक दिन उन्होंने रामदीन को फोन भी लगाया, लेकिन रामदीन बातचीत ढंग से नहीं कर पा रहा था। सुमित को लगने लगा कि हो सकता है, रामदीन किसी समस्या में फंस गया हो और मुझे नहीं बताना चाह रहा हो। सुमित ने कहा कि किसी प्रकार की प्रोब्लमस है तो मुझे बताओ लेकिन रामदीन गोल-मोल घुमाकर जवाब दिया। खैर-सुमित इस बात को खास तरह से गौर नहीं कर पाया, उसे लगा कि पैसे की बात को लेकर मेरा लिहाज कर रहा है। उन्होंने रामदीन से कहा, खैर छोड़ो इन बातों को, पैसे की और जरुरत हो तो बताना। लेकिन रामदीन के मन में कुछ और चल रहा था, उसने कोर्ट में एक याचिका दायर करके कोर्ट से अपील की कि वह संपत्ति की देख-रेख काफी दिनों से कर रहा है, अत: यह अब उसकी प्रॉपर्टी हो गई। जब सब बात का पता सुमित को चला तो उसके पांव के नीचे की जमीन खिसक गई। पूरा मामला कोर्ट पहुंच चुका था।

 

इस प्रकार के मामले बढ़ते जा रहे हैं

इस प्रकार की कहानी कहीं एक जगह की नहीं, देश के कई भागों में ऐसा वाकया देखने को मिल रहा है। लेकिन हाल में प्रॉपर्टी के असली मालिक को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से काफी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि किसी प्रॉपर्टी पर लंबे समय तक कब्जा किसी व्यक्ति को उस पर मालिकाना हक नहीं देता है। रख-रखाव के लिए रखे गए चौकीदार या एजेंट उस प्रॉपर्टी पर इस आधार पर स्वामित्व नहीं जता सकते कि वे लंबे समय से उसकी देखभाल कर रहे हैं या उसमें रह रहे हैं। जस्टिस दलवीर भंडारी और दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा कि किसी चौकीदार, केयरटेकर या नौकर को इस आधार पर किसी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक नहीं मिल सकता कि वह लंबे समय से उसकी देखरेख कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक चौकीदार की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उसने कहा था कि एक प्लॉट की देखरेख उसकी दो पीढिय़ां कर रही हैं इसलिए उसका स्वामित्व उसे मिलना चाहिए।

बेंच ने कहा कि केयरटेकर या चौकीदार मूल स्वामी की तरफ से उस प्रॉपर्टी की देखरेख कर रहा होता है, ऐसे में लंबे समय से उसकी देखरेख मालिकाना हक का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने याची चौकीदार पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया क्योंकि उसने अपने मालिक की संपत्ति पर कब्जे के लिए उसे कानूनी मुकदमे में घसीटा। मालिक ने यह प्लॉट धर्मशाला के निर्माण के लिए सुरक्षित छोड़ा था। बेंच ने कहा कि प्रॉपर्टी के स्वामी ने उस प्रॉपर्टी की देखरेख के लिए चौकीदार को रहने दिया है तो वह उस पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामले में याची चौकीदार पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता था, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं किया गया है। कोर्ट ने याची को 25,000 रुपये का जुर्माना दो महीने के भीतर जमा करने और उस प्रॉपर्टी को भी 2 महीने में खाली करने का आदेश दिया।

 

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