वर्तमान समय की मांग है बिज़नेस सेंटर

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ग्लोबल होती दुनिया के लिए बिज़नेस का स्कोप बढ़ता जा रहा है। हर जगह  यह स्कोप रफ्तार में है। गांव लेकर शहर, शहर से लेकर महानगर में बिज़नेस आमदनी का मुख्य जरिया बन गया है। खासकर, युवा इसके माध्यम से दुनिया में अपना परचम लहराना चाहते हैं। ऐसा इसलिए संभव है कि इसके माध्यम से आप मेहनत और बुद्धिमानी से वह सब ई’छा पूरी कर सकते हैं, जिसकी चाहत आप रखते हैं। स्थिति ऐसी हो तो आप मानकर चलिए कि इस प्रकार की चाहत और बिज़नेस स्कोप को बढ़ाने के लिए बिज़नेस सेंटर का कॉन्सेप्ट रियल एस्टेट मार्केट को एक नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है। देश के प्रसिद्ध स्थानों में बिज़नेस सेंटर के निर्माण को लेकर सभी प्रसिद्ध डेवलपर्स नए-नए कॉन्सेप्ट और प्लानिंग लेकर आ रहे हैं।  देश के विकास में स्मॉल इंडस्ट्रीज महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, इस बात को अब बड़े डेवलपर्स भी मान रहे हैं। आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और कारोबार को नई दिशा देने में स्मॉल इंडस्ट्रीज की बड़ी भूमिका होगी। कारोबार बढऩे के साथ छोटे उद्यमियों को व्यापारिक योजनाएं बनाने और भविष्य के विकास का ताना बाना बुनने के लिए बिजनेस सेंटरों की ज़रूरत होगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए अब बड़े खिलाड़ी छोटों के लिए बिज़नेस सेंटर खोलने में जुट गए हैं, जिसका अ’छा परिणाम भी मिल रहा है।
 ज़रूरत 
कुछ सालों में इस इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट करीब 30 प्रतिशत के दर से हो रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर में 80 प्रतिशत करीब रेजीडेंशियल और बाकि में कॉमर्शियल स्पेस जैसे ऑफिस, शॉपिंग मॉल्स, होटल्स और हॉस्पिटल के निर्माण का डेवलपमेंट हो रहा  है। इस क्षेत्र में जो अतुलनीय रूप से ग्रोथ देखा जा रहा है, इसमें भारतीय इकॉनमी के विकास का महत्वपूर्ण योगदान है। देश के प्रसिद्ध स्थान पर कॉमशर््िायल प्रोजेक्ट की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में भारतीय शहरों में  रिडेवलपमेंट की दिशा में डेवलपर्स के लिए सम्भावनाओं की कोई कमी नहीं है। जहां भारत में हो रहा शहरीकरण दुनिया भर के निवेशकों को मुनाफा कमाने का सुनहरा अवसर प्रतीत हो रहा है, वहीं इसकी वजह से बढ़ रही ज़रूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। वर्तमान में बाजार चौकस है और इसकी ऐसी भावनाएं इस मामले में बिज़नेस सेंटर में भी कम स्कोप नहीं दिख रहा है, क्योंकि जिस प्रकार से बिज़नेस सेक्टर के कुछ आयाम जैसे आईटी सेक्टर ग्रोथ कर रहा है और बाहरी लोग हायर किए जा रहे हैं, इससे आने वाले समय में बिज़नेस सेंटर कल्चर कुलांचे भर सकता है। खासकर, महानगरों में यह ट्रेंड जोर पकड़ चुका है, अब तो महानगरों से सटे इलाके में भी यह कॉन्सेप्ट खूब फलने-फूलने लगा है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जैसे-जैसे रोजगार के नए अवसर और नए ठिकाने बनते रहेंगे, उसी तरह से यह कॉन्सेप्ट भी उन्नति करता रहेगा। भले ही कॉमर्शियल निर्माण के बारे में यह कहा जा रहा हो कि इसके निर्माण की लागत भी कई स्थानों डेवलपर्स की नहीं निकल पा रही हो, लेकिन इस सेगमेंट में उत्तरोतर वृद्धि होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। अब कॉमर्शियल सेक्टर की दुनिया भी काफी बदल रही है। इसके निर्माण में 2 इन 1 का कॉन्सेप्ट आ चुका है। यानि की बिज़नेस सेंटर कम होम। यह कॉन्सेप्ट काफी जोर पकड़ चुका है और आने वाले समय में इसका जलवा कायम होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। जिस प्रकार से सरकार ने एफडीआई को मंजूरी से रियल्टी सेक्टर को लाभ मिलेगा। इसके बारे में  पिछले कुछ वर्षों पर नज़र डालें तो खास तौर से आर्थिक मंदी के बाद कॉमर्शियल स्पेस की डिमांड बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है। रिटेल स्पेस का हाल तो और भी बुरा है। ऐसे में रिटेल क्षेत्र में एफडीआइ को मंजूरी मिलने से यह तो तय है कि कॉमर्शियल व रिटेल स्पेस की डिमांड को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी कंपनियों के आने से रिटेल स्पेस की डिमांड में तेज़ी आना तो तय कहा जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि देश में करीब 12 बिलियन डॉलर का रियल एस्टेट इंडस्ट्री है। अध्ययनों के अनुसार कुछ सालों में इस इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट करीब 30 प्रतिशत के दर से हो रहा है। यहां पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस प्रकार से सरकार ने 100 स्मार्ट सिटीज के कॉन्सेप्ट को लेकर गंभीर है, इससे साबित होता है कि आने वाले समय में इस प्रकार के विकसित स्मार्ट सिटीज में बिज़नेस सेंटर की मांग जोर पर होगी। इसके पीछे कारण यह है कि बिज़नेस सेंटर वर्तमान और भविष्य दोनों की ज़रूरत बनने जा रहा है।

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