क्या है कारपेट एरिया और बिल्टअप एरिया ?

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रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) बिल  में कारपेट एरिया की परिभाषा दी गई है। इससे बिल्डर्स के लिए सुपर एरिया के आधार पर अपार्टमेंट बेचना मुश्किल हो जाएगा। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कारपेट एरिया क्या होता है और बिल्टअप एरिया और सुपर बिल्टअप एरिया क्या होता है। इन तीनों में बेसिक फर्क क्या है।  इस मामले को समझना काफी ज़रूरी होता है, प्रत्येक होम बायर्स के लिए

वास्तव में देखा जाय तो कारपेट एवं सुपर बिल्टअप एरिया में 20 फीसदी तक का फर्क रहता है। यदि ग्राहक फ्लैट या आफिस लेना चाहता है, तो बिल्डर दो विकल्प देता है जैसे पहला विकल्प 1000 स्क्वयेर फीट का फ्लैट 16 लाख रुपए में, दूसरा विकल्प 1200  स्क्वयेर फीट का फ्लैट भी 16 लाख रुपए में। ऐसे में ग्राहक बराबर कीमत को देखते हुए 1200  स्क्वयेर फीट  का फ्लैट लेना चाहेगा। बस गड़बड़ी भी यहीं से शुरू होती है। बाज़ार के नीति के अनुसार कीमत कारपेट एवं सुपर बिल्टअप दोनों को मिलाकर तय की जाती है। फ्लैट खरीदते समय सामान्य जोड़-घटाव के बदले एरिया के कैलकुलेशन पर ध्यान देना चाहिए। उदाहरण स्वरूप यदि फ्लैट का सुपर बिल्टअप एरिया 1200  स्क्वयेर फीट है, तो इसका मतलब हुआ कि उपयोग वाला एरिया 960  स्क्वेयर  फीट ही हुआ। यानि पेमेंट 1200  स्क्वेयर फीट का और इस्तेमाल के लिए एरिया 960  स्क्वेयर फीट मिला। डील फाइनल करते समय एरिया की स्पष्ट जानकारी बिल्डर से लेनी चाहिए। अगर बिल्डर एरिया की बात कर रहा है तो वास्तविक उपयोगी एरिया को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
कारपेट एरिया :
कारपेट एरिया का मतलब है कि फ्लैट में इस्तेमाल की कितनी जगह मिलेगी। इसे दीवार से दीवार तक का कुल एरिया भी कहा जा सकता है। दूसरे अर्थ में अगर दीवार से दीवार तक कारपेट बिछाना है, तो जितने बड़े कारपेट की ज़रूरत पड़ेगी, वह फ्लैट का कारपेट एरिया माना जाएगा। फ्लैट का दरवाजा बंद करने के बाद जो हिस्सा है, वह कारपेट एरिया होता है।
बिल्टअप एरिया :
फ्लैट, मकान, ऑफिस, दुकान के कारपेट एरिया में दीवारों के नीचे की जगह को शामिल किया जाए तो वह कुल बिल्टअप एरिया कहलाता है। बिल्टअप एरियों को फ्लैट का कुल बिल्टअप एरिया कहा जाता है।
सुपर बिल्टअप एरिया :
कारपेट एरिया, बिल्टअप एरिया के साथ कॉमन स्पेस को जोड़ दिया जाए तो वह सुपर बिल्टअप एरिया कहा जाता है। बिल्डर्स, बायर्स से हमेशा सुपर बिल्टअप एरिया की बात करते हैं। बिल्डिंग में कॉमन रूम, सीढिय़ां, एलीवेटर, फ्लैट के बाहर की गैलरी को बिल्टअप एरिया में जोड़कर सुपर बिल्टअप एरिया कहा जाता है। सुपर बिल्टअप एरिया में क्या-क्या शामिल हो, इसे बिल्डर अपने हिसाब से तय करता है। एक्सपर्ट की राय में बड़े और प्रोफेशनल बिल्डर्स को साझा इस्तेमाल की कुछ चीज़ों को सुपर बिल्टअप एरिया में शामिल नहीं करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर सोसायटी का ऑफिस, कॉमन टायलेट, इलेक्ट्रिक मीटर रूम, पंप रूम, जेनरेटर रूम, सिक्युरिटी चेम्बर, सीढिय़ां, लिफ्ट मशीन रूम, ओवरहेड एवं अंडरग्राउंड टैंक, कॉमन टैरेस, ओपन स्टोट्र्स एरिया, स्वीमिंग पूल, कपड़े सुखाने का एरिया आदि।
अक्सर देखने में आता है कि मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में लिफ्ट एवं सीढिय़ां होती हैं, इसलिए इसे सुपर बिल्टअप एरिया में शामिल कर लिया जाता है। अभी तक लगभग रियल एस्टेट सेक्टर में यह भी तय नहीं था कि बिल्टअप अथवा सुपर बिल्टअप एरिया में से कीमतें किस पर तय होगी। सब कुछ बिल्डर पर निर्भर है। सुपर एरिया कैलकुलेशन में भी बिल्डर्स की मजऱ्ी चलती है। कस्टमर मार्केट इनके शिकंजे में फंस जाता है।
जब ग्राहक बिल्डर के पास जाता है तो उसे अलग-अलग एरिया के नाम पर कीमतें बताई जाती है। एरिया को लेकर कोई भ्रम नहीं हो, इसके लिए ज़रूरी है कि सुपर बिल्टअप एरिया का कॉन्सेप्ट बिल्डर्स और बायर्स मार्केट के बीच स्पष्ट हो। इसके लिए एक स्टैंडर्ड तय किया जाना चाहिए। अगर बिल्डर इसका पालन करेंगे तो, सुपर बिल्टअप एरिया का कॉन्सेप्ट ज्यादा बेहतर तरीके से अपनाया जा सकता है। ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड के अलावा कई अन्य सरकारी एजेंसियां इस पर मंथन कर रही है। कारपेट एरिया को नेशनल रेफरेंस एरिया के आधार पर कीमतें निर्धारित करने का कानून बनाए जाने की पहल हो रही थी और इस बिल में इसके बारे में तय कर दिया गया। अक्सर देखने में आता है कि मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में लिफ्ट एवं सीढिय़ां होती हैं, इसलिए इसे सुपर बिल्टअप एरिया में शामिल कर लिया जाता है। अभी तक लगभग रियल एस्टेट सेक्टर में यह भी तय नहीं था कि बिल्टअप अथवा सुपर बिल्टअप एरिया में से कीमतें किस पर तय होगी। सब कुछ बिल्डर पर निर्भर है। सुपर एरिया कैलकुलेशन में भी बिल्डर्स की मजऱ्ी चलती है। कस्टमर मार्केट इनके शिकंजे में फंस जाता है।
एक्सपर्ट की राय में बड़े और प्रोफेशनल बिल्डर्स को साझा इस्तेमाल की कुछ चीज़ों को सुपर बिल्टअप एरिया में शामिल नहीं करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर सोसायटी का ऑफिस, कॉमन टायलेट, इलेक्ट्रिक मीटर रूम, पंप रूम, जेनरेटर रूम, सिक्युरिटी चेम्बर, सीढिय़ां, लिफ्ट मशीन रूम, ओवरहेड एवं अंडरग्राउंड टैंक, कॉमन टैरेस, ओपन स्टोट्र्स एरिया, स्वीमिंग पूल, कपड़े सुखाने का एरिया आदि।

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