फ्लैट बुक के समय ध्यान रखें कुछ महत्वपूर्ण बातें

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नए मकान का अपना जादू होता है, खास तौर से तब जब उसकी कीमत आसमान तक न पहुंची हो। कई लोग निर्माणाधीन इमारत में फ्लैट बुक कराने का जोखिम केवल इसी कारण लेते हैं। इससे न केवल अपना मकान होने का ख्वाब पूरा करने में मदद मिलती है, बल्कि यह रहने के लिए तैयार फ्लैट की तुलना में सस्ता भी पड़ता है। निर्माणाधीन फ्लैट के साथ सबसे बड़ा फायदा यह है कि निर्माण की प्रगति के हिसाब से पैसा धीरे-धीरे निकलता है। इसके अलावा आप अपनी जरुरतो के हिसाब से फ्लैट में बदलाव भी कर सकते हैं। जब बिल्डर अपनी परियोजना शुरू कर रहा होता है, तो आपके पास फ्लैट की लोकेशन, दिशा और फ्लोर चुनने का विकल्प रहता है। इनकी तलाश आसान होती है, क्योंकि आम तौर पर कंपनी हाल में लॉन्च हुए प्रोजेक्ट को लेकर बड़े विज्ञापन अभियान चलाती है, ऐसे में आपको ब्रोकरों के जरिए जाने की जरुरत नहीं होती, लेकिन निर्माणाधीन परियोजना में फ्लैट बुक कराने से पहले कुछ अहम बिंदुओं पर गौर करना चाहिए।

डॉक्यूमेंटस  की जाँच-पड़ताल

यह सुनिश्चित करना आपके हित में है कि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो। बिल्डर तभी निर्माण कार्य शुरू कर सकता है, जब उसके पास इंटिमेशन ऑफ डिसप्रूअरवल (आईओडी) और कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (सीसी) हो। आईओडी के तहत वे शर्तें होती हैं, जिनके आधार पर निर्माण किया जाता है। यह आम तौर पर एक साल की अवधि के लिए वैध होता है और उसके बाद संबन्धित प्रशासन से दोबारा वैलिडेशन की जरुरत होती है। सीसी स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किया जाता है और यह बिल्डर को निर्माण शुरू करने की इजाजत देता है। आपको तभी निर्माणाधीन फ्लैट खरीदना चाहिए, जब बिल्डर के पास उस फ्लोर के लिए कमेंसमेंट सर्टिफिकेट हो, जिसमें आप अपने फ्लैट की बुकिंग करा रहे हैं। इस मामले में मालिकाना हक भी एक महत्वपूर्ण मसला है। टाइटल पर ड्यू डिलिजेंस अनिवार्य है। मालिकाना हक का टाइटल तमाम अवरोधों और कानूनी विवादों से दूर होना चाहिए। खरीददार के पास टाइटल से जुड़े दस्तावेजो की जांच-पड़ताल का अधिकार होता है। टाइटल सर्च के लिए किसी सक्षम वकील की मदद लेने में समझदारी है। इसके अलावा आप होम लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। होम फाइनेंस कंपनियां और बैंक जरुरी टाइटल सर्च करते हैं और लोन को मंजूरी देने से पहले ड्यू डिलिजेंस करते हैं। वे लोन प्रोसेसिंग शुल्क वसूलते हैं, लेकिन इसे चुकाने में फायदा ही है, क्योंकि भविष्य में गतिविधियां शांतिपूर्वक तरीके से निपटेंगी।

सैंपल फ्लैट मार्केट टूल के साथ कई बातों का लेखा-जोखा

निर्माणाधीन घर खरीदने के समय फ्लैट के सैंपल पर भी गौर करना चाहिए। इस प्रक्रिया को ज्यादातर प्रतिष्ठित बिल्डर इसे मार्केटिंग टूल के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह एक प्रकार से खरीददार जो खरीदने जा रहा है, यह उसका विजुअल प्रस्तुतिकरण होता है। सैम्पल फ्लैट बुनियादी रूप से खरीददार को स्पेस और डाइमेंशन देने का उद्देश्य पूरा करता है। सैम्पल फ्लैट खरीदार को इस बात का अंदाजा देता है कि तैयार होने पर उसकी यूनिट कैसी दिख सकती है। हालांकि,आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खरीदी जाने वाली यूनिट में डाइमेंशन और विशेषताएं, सैंपल फ्लैट जैसी हों। बिल्डर बैंकों और एनबीएफसी से कर्ज लेते हैं और बैंक के पास प्रोजेक्ट को गिरवी रखा जाता है। निर्माणाधीन फ्लैट खरीदते समय अगर आपसे किसी बैंक के साथ बिल्डर के खास खाते के पक्ष में चेक काटने के लिए कहा जा रहा है,  तो यह इस बात का साफ संकेत है कि प्रोजेक्ट बैंक के पास मॉर्गेज रखा गया है। ऐसे प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदते समय आपको बैंक से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की जरुरत होगी। एनओसी में आपके फ्लैट का ब्योरा शामिल होना चाहिए, जैसे आपके फ्लैट का नंबर, इमारत आदि। अगर बिल्डर बैंक से लिया गया पैसा चुकाने में नाकाम रहता है, तो बैंक प्रोजेक्ट पर कब्जा कर सकता है और खरीददार को फ्लैट खाली करने के लिए कह सकता है। एनओसी से सुनिश्चित होता है कि खरीददार को दिक्कतों का सामना न करने पड़े, क्योंकि अगर खरीददार प्रॉपर्टी के लिए पूरी कीमत चुकाता है, तो फ्लैट पर बैंक का कब्जा नहीं रहता।

कीमत के मायने

इस तरह के घर खरीदने के समय कीमत के मामले काफी मायने रखते हैं। कई लोग निर्माणाधीन फ्लैट खरीदने का विकल्प इसलिए चुनते हैं, क्योंकि रेडी टू मूव इन फ्लैट की तुलना में इनकी कीमतें कम रहती हैं, लेकिन आपको स्टाम्प ड्यूटी और प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन में आने वाले खर्च, इलेक्ट्रिक मीटर, गैस कनेक्शन, फर्निशिंग का खर्च, फिटिंग और बदलावों के खर्च पर गौर करना चाहिए।

बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड पर गौर करें

बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड भी खरीददार को देखना चाहिए। संभावित खरीददार को डेवलपर की विश्वसनीयता, अतीत की उसकी परियोजनाओं और प्रदर्शन तथा डिलीवरी रिकॉर्ड पर गौर करना चाहिए।

बढिय़ा ट्रैक रिकॉर्ड वाले बिल्डर के साथ बने रहना बेहतर है, क्योंकि वे परियोजना को अमली जामा पहनाने की क्षमताएं रखते हैं और साथ ही संसाधनों तक उनकी बेहतर पहुंच होती है। अगर आप निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले निवेशक हैं और कीमतें बढऩे पर फ्लैट बेचकर मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो जब प्रोजेक्ट पूरा होने के करीब पहुंचे, समझौते की शर्तों पर गौर करना सही रहता है।

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