बहुत ख़ास है माउंटन व्यू गूगलप्लेक्स

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मुकेश के झा
ऑफिस की दुनिया में गूगल के मुख्य ऑफिस गूगलप्लेक्स का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां का मस्त माहौल देखकर आप चौंके बिना नहीं रह सकते हैं। यहां के एम्प्लॉय के लिये कंपनी एक ऐसा खुशनूमा माहौल देती  है कि फर्क करना मुश्किल है कि यह ऑफिस है कि आरामगाह। इस माहौल से ऑफिस और घर में विभेद करना मुश्किल भी है। यहां का वातावरण इतना तनावरहित और मुक्त कार्यशैली से प्रभावित है कि कोई भी यहां घर से पालतू जानवर ला सकता है या फिर सुविधाएं के विषय में प्रश्न उठा सकता है या किसी भी मनचाहे प्रोजेक्ट पर काम भी कर सकता है।
सर्च ईंजन की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करने वाली गूगल कंपनी का दर्शन है कि सर्वोतम से समझौता नहीं। इसी सिद्धांत को अपना कर कंपनी नित नयी ऊंचाईंयों को छू रही है। इस कंपनी का विश्व मुख्यालय का भवन माउंटन व्यू, सान्ता कालरा काउंटी, कैलीफोर्निया में स्थित है। यह प्रसिद्ध स्थान शोरलाइन रीज़नल पार्क वेटलैंड्स से बहुत नज़दीक है। चार मुख्य बिल्डिंग जो 47,038 स्क्वेयर मीटर में फैली हुयी हैं। यह बिल्डिंग सिलीकॉन ग्राफिक्स के लिये बनाया गया था। यहां ऑफिस स्पेस और कॉरपोरेट कैंपस 26 एकड़ में है। यहां की सुविधाओं को देखकर एकबारगी आप चौंक भी सकते हैं, ऐसा भला हो भी, क्यों न। यहां का ऑफिस न होकर एक सुविधा सम्पन्न घर जैसा है। गूगलप्लेक्स में प्रवेश करते ही रिसेप्सन पर लैंपों की लड़ी आपका स्वागत करती है। यहां से पूरी दुनिया में सर्च का सीधा प्रसारण भी चलता है। इन खासियत के अलावा यहां पृथ्वी की एक थ्री डाइमेंशनल तस्वीर भी आकर्षण का केन्द्र है। लॉबी की सीढिय़ों के ऊपर वर्जिन एटलांटिक के स्पेसशिप वन की एक प्रतिकृति भी बनी हुयी है। इस कंपनी में एक खासियत यह भी है कि यहां के एम्प्लॉय के लिये कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया है। इस कैंपस में सूट और टाई में सिर्फ बाहर से आये लोग ही नज़र आते हैं। गूगल के एम्प्लॉय टी-शर्ट, जीन्स और कभी-कभी तो वे नाइट स्लिपर में भी नज़र आ जाते हैं।
यहां 11 कैफेटेरिया हैं, जहां दिन में तीन बार मुफ्त खाना दिया जाता है। यहां कॉफी ब्रेक का कोई समय निर्धारित नहीं है। आप जब चाहें यहां बने किचिन रूम की वॉक कर सकते हैं। यहां न सिर्फ कॉफी नहीं , हर तरह के स्नैक्स, फल, कैंडी, योगर्ट के साथ-साथ एम्प्लॉय के लिये मुफ्त फलों के जूस की मशीन भी लगी हुयी है। यह सुविधा मेहमानों के लिये भी उपलब्ध है। अगर आप देर तक कम्प्यूटर के सामने काम करते-करते थक गये हैं तो बॉडी मसाज की सुविधा काफी हद तक आराम देती  है। मसाज चेयर यहां हर कॉमन एरिये  में उपस्थित है। ऑफिस में हर जगह सॉफ्ट टॉयज, रंगीन गेंदें और अनके तरह के गेम्स खेलने की सुविधा भी है। आप चौंक भी सकते हैं, जब आपको पता चलेगा कि यहां के एम्प्लॉय जब काम करते-करते थक जाते हैं तो उनके लिये बड़े सोफे और सोने की जगहें भी मौजूद हैं। गूगल के एम्प्लॉय के आइडिया शेयर करने के लिये क्लिप बोर्ड और  बुलेटिन बोर्ड भी हर जगह मौजूद हैं। ऑफिस के बीचो-बीच एक पूल टेबल भी है, जो आश्चर्य में भी डालती  है। ऑफिस में संगीत के शौकीनों के लिये एक पियानो भी है। यहां के एम्प्लॉय को कल्पनाओं की दुनिया में सैर करने की पूरी आजादी है। नयी कल्पनाओं पर कुछ प्रोजेक्ट बनाने के लिए कंपनी हमेशा एम्प्लॉय को प्रोत्साहित करती है। यहां पर आपको कार्यालय में अपने पालतू प्राणी साथ रखने की मंजूरी है या फिर क्या आप मन चाहा तो एक दिन ऑफिस से छुट्टïी लेकर बीच वॉलीबॉल खेलने जा सकते है।
इस गूगलप्लेक्स में काम करना फिर से कॉलेज के दिनों का मजा उठाने जैसा ही है। इस मदमस्त ऑफिस को फॉच्र्यून पत्रिका ने अपने एम्प्लॉय को ऐसी सुविधाएं देने के कारण ही नौकरीपेशा लोगों के लिए अमेरिका की सर्वोत्तम कंपनी की दर्जा दी है। वर्ष 2007 में फोर्ब्स  पत्रिका ने अमेरिका में नौकरी करने के लिये बेहतरीन 100 कंपनियों में से गूगल को पहला स्थान दिया था। यातायात के लिए कंपनी के पास स्कूटर तथा पुशबाइक से लेकर शटल बस तक सारे वाहन हैं। यह सारी सुविधाएं गूगल ने अपने एम्प्लॉय को आरामदेह मानसिक स्थिति बहाल कर उन की प्रतिभा से उत्तम परिणाम पाने के लिए दी है। यहां काम करने वाले एक एम्प्लॉय के अनुसार यह सारी सुविधाएं मुझे दिनभर अच्छा काम करने के लिए मदद करती है और घर से बाहर भी जिंदगी का अहसास भी देती है। एम्प्लॉय को खुश रखने का यह फार्मूला काफी हीट हो चुका है। गूगल के पास नौकरी के लिए प्रत्येक दिन तीन हजार से ज्यादा आवेदन आते है। एम्प्लॉय के खुद के प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए कंपनी उन्हें हफ्ते में एक पूरे दिन उसी प्रोजेक्ट पर काम करने की छूट भी देती है। इसी तरह की योजना के कारण जीमेल का जन्म हुआ है। गूगलप्लेक्स के ऑफिस की रचना ऐसी खास है कि यहां कोई भी कर्मचारी इस ‘गूगलीÓ वातावरण में किसी भी मनचाही जगह बैठकर काम कर सकता है। एम्प्लॉय को एक साथ कुछ समय बिताना हो तो ऑफिस में छोटे सफेद तंबू भी ऑफिस के कैम्पस में उपलब्ध है।
यहां के बारे में कहा जाता है कि जो भी एम्प्लॉय इसमें काम कर लेता है, उसे या तो यहां से पूर्णरूपेण निवृत होना चाहिए या फिर अपना खुद का कुछ कारोबार शुरू करना चाहिए क्यों की वह खुद तो गूगलप्लेक्स के अलावा किसी भी जगह काम नहीं कर पाएंगे। इस कंपनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पूरी दुनिया में जहां कहीं भी इसका ऑफिस है, वहां की व्यवस्था, इस देश की सभ्यता और संस्कृति के हिसाब से की गयी है। भारत में इसके कॉरपोरेट ऑफिसों गुडग़ांव, मुम्बई, हैदराबाद, बंगलुरू में ये सारी सुविधाएं एम्प्लॉय को प्रदान की गयी है, जो गूगलप्लेक्स में है। बिना विभेद किये और दुनिया के बदलते परिदृश्य के हिसाब से अपनी रणनीति बनाना भी कंपनियों की सफलता के कारण होते हैं। दुनिया की प्रसिद्ध कंपनी मैक्डोनाल्ड की ही बात किया जाय तो जहां वह जर्मनी में बियर बेचती है, वहीं चीन में पीजा, बर्गर। यह पीजा और बर्गर भी दुनिया के देशों में सभ्यता और संस्कृति के अनुसार ही होता है। जैसे चीन में मैक्डोनाल्ड के पीजा और बर्गर में चावल की मात्रा ज्यादा होती है। बदलती दुनिया में बड़ी कंपनियों ने इन रणनीतियों पर काम करके ही नित- नये सफलता की इतिहस गढ़े हैं.
सोच से बनता है इतिहास .

 

महज दस साल पूर्व सिलिकॉन वैली में शुरूआत करने वाली कंपनी का पहला ऑफिस एक छोटे से गैराज में था। कुछ महीनों के बाद तक इस कंपनी में सिर्फ सात कर्मचारी ही थे। लेकिन लैरी पेज और सेर्गेई ब्रिन की ब्रैन चाइल्ड यह कंपनी वर्तमान में 75 बिलियन पाउंड से भी ज्यादा की हो चुकी है। इस कंपनी की पूरी दुनिया में दस हज़ार से ज्यादा एम्प्लॉय हैं। गूगल को हर 25 सेकेंड में कंपनी को एक रिज्यूमे मिलता है और हर रोज नौ कर्मचारियों की नियुक्ति होती है।

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