ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट

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ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट  आज कल लोकप्रिय हो चला है। यह ज़मीन के मालिक और बिल्डर्स दोनों के लिये फायदेमंद है। इसमें जहां एक ओर ज़मीन के मालिक को निर्माण के लिए रकम के इंतज़ाम और अन्य ज़रूरतों के लिए परेशान नहीं होना पड़ता, वहीं दूसरी ओर बिल्डर को ज़मीन मिल जाती है जिसे खरीदने के लिए उसे कोई रकम नहीं देनी होती है।

प्रॉपर्टी  के सौदे में फायदे  को लेकर कई बातों पर ध्यान रखना ज़रूरी होता है। सामान्य तौर पर देखा जाता है कि जब आप  किसी रियल एस्टेट में निवेश के लिए प्लॉट खरीदते हैं। इससे मुनाफा कमाने के लिये आपको कुछ समय तक के लिये अपनी प्रॉपर्टी को होल्ड पर रखकर दाम बढऩे का इंतज़ार करना होता है। ऐसे देखा जाय तो खरीदी ग यी ज़मीन पर भी निर्माण कार्य करके भी अच्छा-खासा मुनाफा भी कमाया जा सकता है। इस बात के लिये प्रॉपर्टी के मालिक को इस बात के लिये ज़रूरी अनुमतियां लेने के साथ ही निर्माण की निग रानी करनी होती है। मुनाफा कमाने के लिये प्रॉपर्र्टी के मालिक के पास इन विकल्पों के साथ एक अन्य विकल्प भी है जो आजकल काफी लोकप्रिय हो रहा है, जिसे ज्वाइंट डेवलपमेंट एग ्रीमेंट (संयुक्त विकास अनुबंध)कहा जाता है। यह एग्रीमेंट बिल्डरों के साथ किया जाता है।  इस एग्रीमेंट  के अनुसार बिल्डर प्लाट पर फ्लैट बनाता है। इस निर्माण में साइट का एक हिस्सा मालिक के लिए अलग  रखा जाता है। बाकी का क्षेत्र या फ्लैट की बिक्री सीधे बिल्डर करता है। इससे दोनों ही पक्षों की ज़रूरतें पूरी होती हैं। इसमें जहां एक ओर ज़मीन के मालिक को निर्माण के लिए रकम के इंतज़ाम और अन्य ज़रूरतों के लिए परेशान नहीं होना पड़ता, वहीं दूसरी ओर बिल्डर को ज़मीन  मिल जाती है जिसे खरीदने के लिए उसे कोई रकम नहीं देनी होती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस एग ्रीमेंट से रियल एस्टेट की कंपनियों को प्रोजेक्ट की लाग त में ज़मीन की कीमत का  खर्च बच जाता है। इससे बिल्डर की एक बड़ी रकम ब्लॉक नहीं होती और प्लॉट पर निर्माण की ग ति भी तेज़ रहती है। इस नियम में देखा जाय तो एक प्रकार से बिल्डर और साइट का मालिक संयुक्त उपक्रम के आधार पर साइट डेवलप करते हैं। इस लोकप्रिय प्रोसेस से साइट के मालिक को आमतौर पर 30 से 40 फीसदी हिस्सेदारी मिलती है और बाकी का बिल्डर के पास जाता है। इस प्रोसेस से लाभ के हिस्से का बंटवारा अनुबंध की शर्तों पर निर्भर करता है। संपत्ति के मालिक को बिल्डर के पक्ष में एक जनरल पावर ऑफ एटॉर्नी करनी होती है जिसे वह वापस नहीं ले सकता। जनरल पॉवर ऑफ एटॉर्नी को दोनों पक्षों के लिए कानूनी तौर पर बाध्य बनाने के लिये इसे उपयुक्त मूल्य के स्टॉम्प पेपर पर रजिस्ट्रार के पास पंजीकृत कराना होता है। निर्माणकर्ता को ज्वाइंट डेवलपमेंट एग ्रीमेंट के तहत दी जाने वाली इस तरह की जीपीए के लिए स्टाम्प ड्यूटी 1,000 रुपये होती है। यह स्टाम्प ड्यूटी अलग -अलग  राज्य में अलग  हो सकती है। जनरल पावर ऑफ एटॉर्नी(जीपीए)होने के साथ दोनों पक्ष ज्वाइंट डेवलपमेंट एग ्रीमेंट में शामिल हो जाते हैं, इसके बाद बिल्डर ज़रूरी अनुमतियां लेने के बाद ज़मीन पर निर्माण कार्य शुरू करता है। यदि बिल्डर वित्तीय या किसी अन्य प्रकार से अनुबन्ध का उल्लंघन करता है तो ज़मीन के मालिक के पास जीपीए को वापस लेने का अधिकार भी होता है और ज़मीन पर निर्माण पूरा होने तक प्रॉपर्टी की सुरक्षा का इंतजाम मालिक को भी करना होता है। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट का मानना है कि इस प्रोसेस में  योजना को मंजूरी मिलने के बाद मालिक को अवाटंन अनुबन्ध (एलाकेशन एग्रीमेंट )करा लेना चाहिए। इस  एग्रीमेंट  में यह जानकारी होती है कि कितने क्षेत्र पर निर्माण किया जाएग ा और इसमें मालिक और बिल्डर का कितना हिस्सा होग ा। इमारत के तैयार होने और एलाकेशन एग्रीमेंट  हो जाने पर डीड ऑफ डिक्लेयरेशन कराना भी बेहतर होता है, जिसमें यह जानकारी होती है कि साइट के मालिक के लिए निर्माण ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के तहत हो रहा है। सामान्य तौर पर देखा जाता है कि निर्माणकर्ता इस बात पर जोर देते हैं कि मालिक उनके द्वारा चुने ग ए संभावित खरीदारों के पक्ष में एक सेल डीड जारी कर दे। इससे फायदा यह होता है कि ज्वाइंट डेवलपमेंट एग ्रीमेंट के तहत साइट का मालिक या उसके कानूनी वारिस उन्हें सौंपी ग ई निमिर्त प्रॉपर्टी को बेचने के हकदार होते हैं। मालिक निर्मित क्षेत्र में अपना हिस्सा रख सकता है और उसके पास इसे बाद में बेचने का विकल्प भी मौजूद रहता है। ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट  उन लोगों  बेहतर बेहतर होता है, जिनके पास ज़मीन तो मौजूद है लेकिन उनकी वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वे उस पर निर्माण कार्य कर सकें। इसके लोकप्रिय ज्वाइंट डेवलपमेंट एग ्रीमेंट के जरिये वे बिना कुछ खर्च किए ज़मीन पर निर्माण करवा सकते हैं। इसमें उन्हें अपनी ज़रूरत  की जगह  पर रहने के लिए तैयार फ्लैट भी  मिल जाता है और साथ कई अन्य अधिकार भी उनके पास होते हैं।

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