खूनी हवेली

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मुकेश के झा

यह कहानी काल्पनिक है। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबन्ध नहीं है।

इनमें से किसी को पता नहीं था कि यह सफर मौत का सफर है, जिसे भाग्य की नियति ने एक खेल से बांध रखा है। अंधेरी रात पूरे वातावरण को और भी भयावह बनाती जा रही थी। हड्डी को जमा देने वाली कड़ाके की इस ठंड में धुंध और कोहरा इतना छाया हुआ था कि दिन के उजियारे में ही रात होने का अहसास दिला रहा था। सर्द मौसम में जोर से जब हवा चली तो एकबारगी प्रलय जैसा ही लगा उत्पल को। उसके कान के समीप एक डरावनी आवाज़ उसे बेहोश कर दिया। उसका माथा अन्नत गहराइयों में गोता लगाने लगा था। होश आने पर वह अपने को एक सुनसान और निर्जन स्थान में पाया। कुछ देर के लिये उसे विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि इस सुनसान स्थान पर इतनी अच्छी हवेली भी हो सकती है। उसे यह भी समझ नहीं आ रहा था कि वह यहां पहुंचा कैसे। हवेली के बारे में सोचकर उसका दिमाग चक्करघिन्नी की तरह घूमने लगा। उसे रह-रह कर डरावनी आवाज़ सुनाई देने का भ्रम हो रहा था। वह डरावनी आवाज़ उसके कानों में अभी तक गूंज रही थी। वह इस घटना के बारे में जितना सोचता, उतना ही उलझ जाता। कुछ देर बाद उसके सामने से एक परछाई हवा के झौंके माफिक गुजर गयी। यह परछाई अन्धेरी रात के गहराइयों में समा गयी। यहां का पूरा का पूरा वातावरण अजीब बन चुका था, जिसे उत्पल ही महसूस कर सकता था। वह उस पल को कोस रहा था, जब अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने का प्रोगाम बनाया। जल्दी ही सारे दोस्त मिलकर पिकनिक की पूरी तैयारी कर ली । इनके दोस्तों को एडवेंचरस लाइफ कुछ ज्यादा पसंद था। कार पर सब सवार होकर सुबह ही निकल पड़े। मौसम का मिजाज को देखकर उत्पल ने अपने दोस्तों को कहा-यार , आज यह प्रोगाम कैन्सल करते हैं। जब मौसम बेहतर हो जाएगा, तब पिकनिक का आन्नद उठाया जाएगा। लेकिन उसके दोस्तों को यह बात नागबार गुजरी। रोहन ने कहा यार, तुम बहुत डरपोक हो। लाइफ में कुछ एडवेंचरस हो तो जीने का मजा ही कुछ और है। विनीत ने कहा दोस्तोंलगता है उत्पल अभी भी बच्चा का बच्चा ही है। उसे छोड़ बाकी लोग चलते हैं। लेकिन बीच में प्रीति बोलीयार तुम लोग भी , गज़ब हो। उत्पल के बिना तो पार्टी का रंग ही फीका हो जाएगा। हमलोगोंं को गीतसंगीत से मनोरंजन तो यह तानसेन ही कर सकता है।

सारे दोस्त, उत्पल की बात का मजाक उड़ा रहे थे। सिर्फ अमित ही था, जो उसकी बातों को गंभीरता से सोच रहा था। उसे उत्पल की बात खराब तो नहीं लगी थी, लेकिन दोस्तों की बात वह भी आकर रंग में भंग डालना उचित नहीं समझा। वह भी कुछ देर बाद गु्रप के अन्य लोगों की तरह ही वह भी हां-हां मिलाना ही बेहतर समझा। कुछ देर बाद सारे दोस्तों ने एक ही सांस में पूरी प्रोग्राम की खाका तैयार कर ली। उत्पल अपनी दोस्तों की बात रखने के लिए साथ हो लिया। सफर की शुरूआत  हो चुकी थी। इनमें से किसी को पता नहीं था कि यह सफर मौत का सफर है, जिसे भाग्य की नियति ने एक खेल से बांध रखा है। यह खेल कार के स्टार्ट होने से ही शुरू हो चुकी थी। जब वे लोग अपने कॉलोनी से कुछ ही दूरी की सफर तय की, उसी समय एक काली बिल्ली रास्ता के बीच से निकल गयी। कुछ देर के लिये सबका माथा तो ठनका लेकिन ये लोग उसे उमंग और उत्साह में इसे भूला दिया। कुछ देर बाद कार ही बंद हो गयी, जिसे लाख प्रयास करने के बावजूछ भी स्र्टाट ही नहीं हो पायी । काफी मशक्कत के बाद रोहन और गार्गी को मैकेनिक मिले। मैकेनिक आने के बाद कार तो स्र्टाट हो गयी लेकिन उसने कुछ ऐसा बात बोला कि सबके होश फख्ता हो गए। मैकेनिक ने कहा, यहां आप लोग क्या करने आए हुए हैं। सभी ने समवेत स्वर में कहा, पिकनिक मनाने आए हैं और क्या। मैकेनिक ने कहा मुझे लग रहा कि आप लोग गलत रास्ते पर आ गए हैं। यह रास्ता आगे बहुत ही खतरनाक है। मौसम भी ठीक नहीं है। आप लोग इस रास्ते को छोड़कर पल्ली साइड का रास्ता पकड़ लें तो ज्यादा बेहतर होगा। सारे दोस्तों ने कहा ,क्यों भाई यह रास्ता क्या जहन्नुम को जाती है। मैकेनिक को इन लोगों की एटिटयूड समझते देर न लगी। वह बोला-बरखुदार – यह रास्ता सही में जहन्नुम की ओर ही जाती है।  मेरा फर्ज था, सही बताना मैंने आप लोगों को बता दिया। आगे आपकी मर्जी। कुछ पल के लिए दोस्तों के बीच इस मसले को लेकर खूब तर्क-विर्तक हुआ,लेकिन होनी को कोई टाल सकता है। गार्गी बोली अरे भाई, मुझे तो इसी पल की तलाश थी। मैं तो एक-एक पल के रोमांच को कैमरे में कैद करूंगी। तर्क-विर्तक के कारण समय काफी बीत चुका था। अन्त में रोहन ने कहा, यार छोड़ो, इस पागल मैकेनिक की बात को। सब लोग कुछ देर बाद फिर जोश और उमंग खोने लगे।

मैकेनिक की बात को इन लोगों ने मजाक मेें उड़ा दिया लेकिन उसकी बातों में दम था। जिसे ये लोग आने वाले समय में महसूस कर सकते थे। थोड़ी ही देर बाद गाड़ी अचानक बंद हो गयी। सब लोग थक हार कर वहीं बैठ गये। अमित ने कहा, यार अब क्या किया जाय। मैन रास्ता से हम लोग बहुत आगे निकल चुके हैं। गार्गी बोली – अब तो  हम लोग मैकेनिक को भी ढूंढ कर नहीं ला सकते हैं। रोहन को आश्चर्य भी हो रहा था कि गाड़ी तो एक दम नयी है लेकिन बार -बार खराब क्यों हो जा रही है। कार तो परसो ही खरीदी गयी है। यह सोचकर भी कुछ नहीं बोल पा रहा था। चुपचाप सबकी बातों को सुनने लगा। दोस्तों की हंसी-ठिठोली के बीच समय कैसे बीता पता ही नहीं चल पाया, सभी को। शाम घिर आयी। शाम होते ही पूरा का पूरा रास्ता विरान सा लगने लगा। सभी को यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि शाम होते ही रास्ता विराना सा क्यों लगने लगा। रोहन ने गाड़ी स्र्टाट करने के लिए फिर से मशक्कत करने लगा लेकिन कितना भी प्रयास करने के बाद गाड़ी नहीं स्र्टाट हो पायी तो तंग आकर उसने गाड़ी को वहीं छोड़कर दोस्तों के साथ बैठ गया। सारे लोग वहीं बैठकर पिकनिक मनाने की बात करने लगे। अमित, रोहन, गार्गी और उत्पल सब मिलकर गप्पे हांकने शुरू कर दिये। फिर खाने-पीने का समान निकाला गया। सब ने खूब मौज-मस्ती की । दो घंटे के बाद वहां का वातावरण सिहरन पैदा करने लगा। इन लोगों को दूर तक पहाड़ी से कोई बसेरा नजऱ नहीं आ रहा था। तभी कार चलने की आवाज़ सुनाई दी। सभी चौंक गए कि खराब गाड़ी को रोहन ने कैसे स्र्टाट कर दिया। लेकिन सहसा सभी चौंक गये कि रोहन तो बैठा हुआ है। गाड़ी को फिर किसने स्र्टाट की? कार का बल्ब अपने आप जलने-बूझने लगा। हॉर्न की आवाज़ भी सुनाई देने लगी। यह दृश्य को देखकर सभी हालत खराब हो गयी। अब इन लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। कुछ देर के बाद एक दम सब कुछ शान्त हो गया। कार भी अपने स्थान पर ही खड़ी थी, मानों इस घटना को देखकर यह भी स्तब्ध हो गयी हो। इस घटना के थोड़ी देर बाद ही यहां जोर से हवा चली। हवा की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी। सबों की हालत हवा की रफ्तार के साथ खराब होने लगी। बढ़ती हवा ने रात में यह हवा मंजर को और भी खतरनाक बना दिया। तभी अचानक हवा में तैरती एक विचित्र हंसी गूंजी। यह हंसी यहां के वातावरण में घुल कर माहौल को और भी संगीन कर दिया। डर के मारे सभी की हालत खराब थी। इस कड़ाके की ठंड में भी सभी के माथे पर पसीने की बंूदे छलक आई थी। सभी लोगों की हालत इस कदर खराब हो गयाी थी, मानों की सांस की डोर टूटने ही वाली है। सभी के चेहरे पर हवाईयां उडऩे लगी। अचानक उसी समय एक चेहरा विचित्र हंसी के साथ उभर आया। यह चेहरा इतना खौफनाक था कि सबों को देखकर ही बेहोशी छाने लगी। रोहन और गार्गी के पास यह चेहरा पहुंच चुका था और अपनी आगोश में इन दोनों को लेने का प्रयास करने लगा। दोनों चाहकर भी भाग नहीं पा रहे थे। कुछ देर बाद रोहन और गार्गी कियी को नजऱ नहीं आया। उत्पल और अमित को यह दृश्य को याद कर रौंगटे खड़े होने लगे। उत्पल के सामने ही अमित को यह चेहरा अपने आगोश में ले चुका था, लेकिन सब कुछ देखकर भी उत्पल कुछ कर नहीं पाया। यह दृश्य को देखकर उत्पल का दिमाग अन्नत गहराइयों में हिचकोले खाने लगा। जब उसे होश आया तो एक हवेली के पास अपने को पाया। उसका पूरा माथा चक्कर दे रहा था। सिर इतना भारी हो चुका था कि उसमें सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो गयी थी। हिम्मत करके वह अपने दोस्तों को खोजने लगा लेकिन बहुत दूर तक खोजने के बाद उसके हाथ कुछ नहीं आया। रात की भयानक मंजर को याद करके उसके शरीर में सिहरन होने लगी थी।

उत्पल के लिए यह  हवेली ने एक रहस्मय दुनिया बन चुका थी। उसे यह हवेली विचित्र लग रहा था। उसने हिम्मम करके हवेली में जाने का मन बना रहा था कि उसे फिर रात वाली विचित्र हंसी ने जाने नहीं दिया। दिन के उजाले में यह हंसी खौफनाक मंजर बना दिया था। उत्पल किसी प्रकार से भागने का प्रयास करने लगा लेकिन उसका पांव उसका साथ छोड़ चुका था। वह धम्म से ज़मीन पर गिर पड़ा, उसे एकबारगी लगा कि उसका प्राण नहीं बचेंगे। लेकिन हिम्मत में बहुत दम होता है। उसने फिर हिम्मत दिखाते हुए, वहां से भागने में सफल रहा। वह बदहवास भाग रहा था, अचानक उसे रास्ते में एक गड़ेडिय़ा मिला लेकिन जब तक वह पूरी बात बताता कि वह फिर से बेहोश हो गया। उसे गड़ेडिय़ा ने उठाकर घर ले आया। गड़ेडिय़ा के काफी मशक्कत करने के बाद उसकी आंख खुली। गड़ेडिय़ा को समझते देर न लगी कि खूनी हवेली ने फिर से मौत का खेल खेला है। उत्पल की सारी वृतांत सुनने के बाद,वह बोला- आप बाबू,बहुत भाग्यशाली हो कि इस खूनी हवेली के कोप से बच गए। नहीं तो जो भी इसके इर्द-गिर्द मंडराता है, वह जान से हाथ धो बैठता है। उत्पल्ल से रहा नहीं गया, उसने पूछा, आखिर, इस हवेली में ऐसा क्या है, जो लोगों की जान की दुश्मन बन चुकी है। गड़ेडिय़ा एक लंबी सांस लेकर कहा, बेटा यह हवेली किसी ज़माने में यहां का शान हुआ करती थी, लेकिन अचानक कुछ ऐसी घटना घटी कि सब कुछ बिखर  गया। राजा भानसिंह का रूतबा अपने राज्य ही में नहीं बल्कि दस प्रदेशों तक था। उनकी न्यायप्रियता से जनता बहुत खुशहाल रहती थी। जनता उनकी भूरी-भूरी प्रशंसा करते नहीं थकती। वक्त के साथ सब कुछ बदलता है। अंग्रेजों के अधीन भारत हो गया। इस प्रदेश के आस-पास के जितने इलाके थे, सभी को अंग्रेज़ों ने अपने अधीन कर लिया था। सिर्फ , एक यह स्थान बचा था, जिसे वह लाख चाहने के बावजूछ अधीन नहीं कर पाया। भानसिंह अंग्रेज़ों के आंखों की किरकिरी बन गए थे। उसने इस प्रदेश को अधीन करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद चारों का सहारा लिया। भानसिंह का छोटा भाई मान सिंह को अंग्रेज़ो ने अपने जाल में फांस लिया। राज्य का प्रलोभन देकर उसे बगाबत करने को मज़बूर कर दिया। भानसिंह को जब इस बात का पता चला तो वह आग बबूला हो गया। उसने अंग्रेज़ों के साथ आमने-सामने की लड़ाई में मात देने की बात सोचने लगा लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था। अचानक रात में अंग्रेजों ने हमला बोल दिया। चूंकि मानसिंह सेनापति था, इसलिए सैनिकों के बीच आपसी फूट बढ़ चुकी थी लेकिन वफादार सैनिकों के कारण भानसिंह का हौसला पस्त नहीं हुआ था। अचानक हमला से सब हैरान थे,  युद्ध लडऩे सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा था । इस युद्ध में दोनों तरफ से व्यापक जान-माल की क्षति हुयी। र्मोचे पर लड़ते -लड़ते भानसिंह थक कर चूर हो चुका था। आपसी रंजिश के कारण मानसिंह एक मातहत को यह सही मौका नजऱ आया। उसने थके भानसिंह पर हमला कर दिया। भानसिंह अपने मातृभूमि के लिये जान की बाजी लगा दी। भानसिंह को चारों तरफ से अंग्रेजों के सैनिकों ने घेर लिया। वह अंतिम सांस तक लड़ता रहा। युद्ध में भानसिंह वीरगति को प्राप्त हुआ। कुछ दिन राज करने के बाद मानसिंह को कपटी अंग्रेजों की चाल पता चल चुका था। अंग्रेज चाहते थे कि मानसिंह की हालत भी भानसिंह की तरह कर दिया जाय और राज्य को अपने में मिला लिया जाय । अब मानसिंह को अपने किये कार्य पर शर्मिंदा होने लगा।अंग्रेजो की नियत भांपकर मानसिंह ने एक भोज के आयोजन में अंग्रेजों को बुलाया। अंग्रेज जब इस हवेली में पहुंचा तो उसका भव्य स्वागत हुआ। मानसिंह दांव चलते ही सभी अंग्रेजों को गिरफ्तार कर लिया। सभी को मौत की सजा के तहत चुन-चुन कर मरबा डाला। इस घटना के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने बदला लेने के लिए अपनी पूरी शक्ति मानसिंह के खिलाफ झौंक दी। पूरे कीले को अंग्रेज़ों ने चारों ओर घेर लिया और बाहर निकलने वाले व्यक्तियों को चून-चून कर मारना शुरू कर दिया। इस घटना में कीले के अंदर हवेली में कोई भी बच नहीं पाया। उसी समय से इस हवेली का खूनी खेल चल रहा है। उत्पल को सारी कहानी सुनने के बाद सारे रहस्यमयी राज का पता चल गया।

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