ऑफिस-ऑफिस

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एक छोटे  ऑफिस  में भी कम से कम 20 गुणा 20 फीट जगह की आवश्यकता होती है। बेहतरीन डिजाइनिंग के लिये समकोण ऑफिस को तरजीह दी जाती है।ऑफिस को डिजाइन करने के पहले एक फ्लो चार्ट बनाया जाता है जो कि बजट और जगह पर आधारित होता है। यदि ऑफिस में रिसेप्सन की जरूरत है तो उसके लिये थोड़ी जगह छोड़ी जा सकती है।

आमतौर पर ऑफिस का 20 प्रतिशत गलियारे के लिये छोड़ा जाता है ताकि इस जगह पर आसानी से चहलकदमी की जा सके। असल में छोटे ऑफिसों को ऐसे व्यवस्थित करना चाहिये ताकि कम से कम जगह को ज्यादा से ज्यादा उपयोगी बनाया जा सके। ऑफिस के अंदर एक छोटी सी जगह को स्टोर की तरह इस्तेमाल करें। यदि ऑफिस में स्पेशल केबिन की आवश्यकता न हो तो उससे बचे रहें। क्योंकि केबिन बनवाने से अतिरिक्त जगह की ज़रूरत होती है। इससे अन्य कर्मचारियों को परेशानी भी उठानी पड़ सकती है। अत: टॉप एग्जिक्यूटिव या अकाउंट डिपार्टमेंट के अलावा अन्य डिपार्टमेंट को एक साथ ही एडजस्ट किया जा सकता है।
ऑफिस को डिजाइन करने से पहले अपने बजट और डिजाइन की अधिकतम उपयोगिता को समझ लेना जरूरी है। इंटीरियर, प्रबंधन की गुणवत्ता, समय, अन्य साधनों के आधार पर बजट प्लान किया जाता है। इसी प्रकार डिजाइनिंग आधुनिक उपकरण पर निर्भर करता है। तमाम उपकरणों को अपनी सहूलियत के अनुसार ही खरीदें। ध्यान रखें ऐसी चीजें खरीदें जो ऑफिस को मार्डन लुक भी देती हों और आपकी जरूरत के अनुसार सुविधाजनक भी हो। ऐसी किसी चीज को ऑफिस के लिये न खरीदें जो भविष्य में बोझ मात्र बनकर रह जाए। ऑफिस में इस प्रकार की चीजों से अतिरिक्त जगह का भी इस्तेमाल होता है। इसके अलावा बेवजह आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। ऑफिस को सेट करने के लिये कांट्रेक्टर से संपर्क करें और कम से कम में ज्यादा से ज्यादा फायदे पर विचार-विमर्श अवश्य करें, लेकिन ध्यान रखें कि ऐसे किसी कांट्रेक्टर के पास न जाएं जिसका मोलभाव आपके आफिस की तुलना में ज्यादा हो।
ऑफिस को मार्डन लुक देने में गुड लाइटिंग, पेंटिंग कलर और कुछ इंटीरियर शोकेस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऑफिस में कम से कम इतनी खिड़कियां हों ताकि दिन के उजाले में कृत्रिम रोशनी की जरूरत न पड़े। खिड़कियां होने से ऑफिस में खुली हवा आती है जो कि कर्मचारियों को सक्रिय रहने में मदद करती है। इससे काम में मन लगा रहता है और कम्पनी पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। कम्पनी के डेकोरेशन के दौरान यह ध्यान रखें कि ऑफिस को डिपार्टमेंट अनुसार विभाजित करते हुए दीवारों का कम इस्तेमाल करें। दरअसल दीवार स्थायी होती है इसलिये उसे बार-बार तोड़कर बनवाना आसान नहीं होता। इसलिये दीवार की बजाय पतली प्लाई का इस्तेमाल करें।

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