ओल्ड एज होम

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Ashiana Housing Ltd, pioneers of Senior Living in India, to organize the 2nd edition of Inter Senior Citizen Game

बाज़ार में ओल्ड एज  होम का प्रचलन बढ़ रहा है। वैसे  तो भारतीय बाज़ार के लिये यह एक प्रकार से नया आइडिया है लेकिन पश्चिम के देशों में यह पहले ही पॉपुलर हो चुका है। इस कॉन्सेप्ट के अन्तर्गत बुजुर्गों की ज़रूरतों के अनुसार घर बनाए जाते हैं। ऐसे लोगों के लिये यह घर काफी सुरक्षित और फायदेमंद है, जो रिटायरमेंट के बाद उसमें रहना चाहते हैं। इस प्रकार के घर बनाने के समय डेवलपर्स  लोकेशन चुनते वक्त यह विशेष ध्यान रखते हैं। रिटायरमेंट होम में बुनियादी सुविधाओं के साथ वहां के पर्यावरण का भी ख्याल रखा जाता है।  इस कॉन्सेप्ट को देश के जानी-मानी डेवलपर्स कंपनी भी अपना रही है।  कई डेवलपर्स और डिगनीटी लाइफ स्टाइल टाउनशिप इस कॉन्सेप्ट को लेकर कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

समय के साथ सब कुछ बदल रहा है। अब संयुक्त परिवार की अभिधारणा खत्म सी हो गयी है। मार्केट में न्यूक्लिर फैमिली का कॉन्सेप्ट जोर पकड़ लिया है। घर में मियां-बीबी और बच्चे ही परिवार को आधार दे रहे हैं। आप इसे व्यक्गित सोच भी कह सकते हैं। पहले जहां माता-पिता, चाचा-चाची एक परिवार की तरह रहते थे, वहीं वर्तमान में परिवारिक स्वरूप में ये लोग कुछ अलग-थलग से हो गये हैं। अपने बच्चों के सपने को साकार करने के लिये माता-पिता ने जो दिन-रात एक किया था, वह बच्चे अपने सपने को साकार करने के बाद अपनी मां और पिता को भूल जाते हैं। जब स्थिति ऐसी हो तो मानकर चलें कि वर्तमान में ही आपको अपने भविष्य को सुरक्षित करने में ही भलाई है। इस बात का इससे बड़ा सबूत और किया हो सकता है कि आये दिन मीडिया की खबरों में बुर्जुग दंपत्ति से लूटपाट और हत्या जैसी वारदात की खबरें  रहती है। ऐसे भी देखा जाय तो रिटायरमेंट के बाद अधिकतर लोग शांत, स्थिर और तसल्ली की जि़न्दगी जीना चाहते हैं। जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में रिटायरमेंट के बाद शहर के शोर से दूर और परिवार से अलग आत्मनिर्भर रहने की चाहत बढ़ी है और नतीजतन वरिष्ठ नागरिकों के लिए मकान की मांग बढ़ी है। इस ट्रेंड का प्रचलन पश्चिमी देशों में खास लोकप्रिय रहा है। यह ट्रेंड अब भारत में भी अपनी जगह बना रहा है।  प्रसिद्ध ग्लोबल रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी जोंस लैंग लसाल मेघराज (जेएलएलएम) की एक रिपोर्ट के अनुसार पुणे, कोच्चि, बंगलुरु, चेन्नई, मुंबई और दिल्ली एनसीआर में रिटायरमेंट होम लोकप्रिय हो रहे हैं। इस होम में बुजुर्गों के लिये बेहतर होता है। यह होम आरामदायक होने के साथ-साथ सुरक्षा की बेहतर चाक चौबंद रहती है। सबसे अच्छी बात यह  है कि यहां रहने वालों के लिये घर के पास ही आधुनिक मेडिकल सुविधा भी मिल जाती है, जो बढ़ती उम्र में एक प्रकार से ज़रूरत बन जाती है। उपभोक्ता चाहे तो अपनी ज़रूरत के हिसाब से अपार्टमेंटस के डिज़ायन में कुछ बदलाव भी करवा सकते हैं या और भी कोई विशेष सुविधा चाहते हैं तोइसका पूरा ख्याल रखा जाता है। जानकारों का मानना है कि  रिटायरमेंट होम एक नया आइडिया है। इसमें बुजुर्गों की ज़रूरतों के अनुसार घर बनाए जाते हैं, जो लोग दूसरा घर खरीदते हैं, उनमें से ज्यादातर रिटायरमेंट के बाद उसमें रहना चाहते हैं। इसलिए इसका लोकेशन चुनते वक्त यह देखा जाता है कि यह पहले घर के करीब हो। बुनियादी सुविधाओं के साथ वहां के पर्यावरण का भी ख्याल रखा जाता है। देश में कुछ ऐसे डेवलपर्स हैं, जो खासतौर पर रिटायर तबके के लिए घर बना रहे हैं। जैैसे,  जयपुर, पुणे और भिवाड़ी में आशियाना हाउसिंग के रिटायरमेंट रिजॉर्ट हैं। हाल में इस गु्रप ने उत्सव रिटायर्ड होम्स भी लॉन्च किया है। इस प्रकार के घरो के कीमतों में अंतर भी होता है। जयपुर में जहां इसकी शुरुआती रेंज करीब 15 लाख रुपये हैं, तो वहीं भिवाड़ी में करीब 20 लाख रुपये हैं।

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