निर्माण की गुणवत्ता को कैसे परखें?

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हर इंसान के जि़न्दगी में घर खरीदने का फैसला बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि घर रोज़-रोज़ नहीं खरीदे जा सकते। हर कोई इसे खरीदने से पहले बहुत सोच-विचार करता है। ढ़ेर सारी जानकारी इक्ट्ïठा करता है कि प्रोजेक्ट का लोकेशन कैसा है, कौन डेवलपर डेवलप कर रहा है, रेट क्या है, फ्लैट का इंटीरियर कैसा है, कब तक बन कर तैयार होगा आदि। लेकिन एक जो सबसे मुख्य जानकारी होती है, वह कम कस्टमर ही जानने की कोशिश करता है, वह है प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन क्वालिटी कैसी है। ऐसा इसलिए भी होता है कि कंस्ट्रक्शन के विषय में आम कस्टमर को जानकारी न मात्र की होती है। प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन क्वालिटी को आप कैसे जांचे आइए जानते हैं।

रियल एस्टेट एक के बाद एक नई इबारत लिख रहा है। देश के छोटे-बड़े शहरों में गगनचुंबी इमारत से लेकर लग्जुरियस अपार्टमेंट का निर्माण हो रहा है। डेवलपर्स भी घर की बढ़ती ज़रूरत को देखते हुए नए-नए प्रोजेक्ट लॉन्च करते जा रहे है। लॉन्च हुए प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करना चाहते है। मार्केट में प्रतिस्पर्धा होने से कस्टमर कि ओर से शिकायत आती है कि उसे जो घर दिया गया है उसमें निर्माण में कई तरह की खामियां है। इसके लिए डेवलपर्स को दोषी ठहराना जायज नहीं होगा। इसके लिए सरकारी तंत्र भी जि़म्मेदार है। जानकारों का मानना है कि बढ़ता भ्रष्टïाचार, लेट-लतीफी नौकरशाही के कारण निर्माण में बिल्डिंग कोड का बड़े पैमाने पर उल्लंघन भी है। डेवलपर्र्स अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में बिल्डिंग की संरचना और सुरक्षा में लापरवाही बरत रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह सिर्फ वहां पर रह रहे लोगों के लिए किसी बड़े दुर्घटना के आमंत्रण से कम नहीं है, बल्कि आस-पास रह रहे लोगों के लिए भी खतरा हो सकता है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहे कामगार बताते हैं कि यह बड़ा ही पेचीदा मामला है और इस सेक्टर के सभी पहलुओं पर प्रकाश नहीं डाला जा सकता। उदाहरण के तौर पर, सामान्य लोगों को यह पता नहीं होता है कि इस बिल्डिंग स्ट्रक्चरली ठीक है या नहीं। इसके लिए कस्टमर को चाहिए कि वह बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल और आर्किटेक्चरल विवरण एक स्वतंत्र वास्तुकार से दिखाकर समझे। वह आपको बिल्डिंग की सही जानकारी उपलब्ध कराएगा। आप नीचे दिए गए कुछ बिंदुओं को जानकर खुद भी सारी जानकारी इक्ट्ïठा कर सकते हैं।
सही पेपर वर्क
हालांकि रियल एस्टेट में काम कर रहे सभी डेवलपर्स क्वालिटी कंस्ट्रक्शन कि बात करते हैं, पर इस विषय पर कोई गहन विवरण कस्टमर को पेपर पर उपलब्ध नहीं कराते, लेकिन एक डेवलपर्स के लिए ज़रूरी है कि वह अपने कस्टमर को कंस्ट्रक्शन संबन्धी जानकारी दें। कस्टमर को भी कंस्ट्रक्शन संबन्धी जानकारी जानने का हक है। हालांकि डेवलपर्स अपने कस्टमर को बुकिंग के दौरान बिल्डिंग में क्या सुविधा मिलेगी, फ्लोरिंग कैसा होगा, दरवाजे और खिड़की, सेनेटरी, बिजली वायरिंग किस क्लास का यूज किया जाएगा आदि जानकारी देता है, पर वह इसका विस्तृत विवरण नहीं देता। कस्टमर को चाहिए कि अपने फ्लैट का पजेसन लेने से पहले यह सुनिश्चत कर लें कि बुकिंग के समय डेवलपर्र्स ने जो वादा किया था, उसे पूरा किया है या नहीं। काफी कस्टमर की शिकायत होती है कि जो वादा किया गया, उसे पूरा नहीं किया गया। यदि किया भी गया तो जिस रूप-रेखा में कहा गया था, वैसा नहीं किया गया है। कस्टमर को चाहिए कि घर की चाबी लेने से पहले डेवलपर्स पर दवाब डालें कि आपने जो पेपर पर मेनसन किया था, वह सारी सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मीङ्क्षटग
जब आप घर खरीदने जा रहे हैं और जिस प्रोजेक्ट में आप घर लेने का मन बनाया है, उस प्रोजेक्ट का मुआयना स्वयं करें। इससे आपको उस प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन क्वालिटी किस दजऱ्े की है, वह पता लग जाएगा। आप बिना बताए साइट पर जाएं और देखें कि निर्माण में किस प्रकार का मैटीरियल यूज किया जा रहा है।
मिट्टïी की जांच
इमारत की बुनियाद की मज़बूती मिट्टी  पर निर्भर करती है। मिट्टी की क्वालिटी पर निर्माण की गुणवत्ता अलग-अलग जगहों पर तय की जाती है। उदाहरण के तौर पर क्लेरिच मिट्टीका गुण होता है वह नमी को सोखता है। हर बिल्डर निर्माण से पहले मिट्टïी की जांच करता है। आप डेवलपर्स सेमिट्टी की जांच की एक कॉपी मांग सकते है।
स्ट्रक्चर डिज़ाइन
एक आम इंसान के लिए बिल्डिंग का डिज़ाइन और ले-आउट समझना मुश्किल काम है। इसके लिए आप उस प्रोजेक्ट के स्ट्रक्चर डिज़ाइन को किसी थर्ड स्ट्रक्चरल डिज़ाइनर से दिखा कर जानकारी हासिल कर सकते हैं और उस प्रोजेक्ट के विषय में तमाम जानकारी इक्ट्ïठा कर सकते हैं। आप प्रोजेक्ट के ले-आउट डिज़ाइन से यह जानकारी इक्ट्ठा कर सकते हैं। आप जिस प्रोजेक्ट में घर लेने जा रहे है वह भूंकपरोधी है या नहीं। यदि है तो वह कितने रियेक्टर पैमाने के भूंकप को सह सकता है। जहां पर प्रोजेक्ट को डेवलप किया जा रहा है, वह किस सिसमिक ज़ोन में आता है। क्या उस सिसमिक ज़ोन के अनुरूप प्रोजेक्ट का डिज़ाइन किया गया है। मौजूदा समय में ज्यादातर प्रोजेक्ट का निर्माण 4 रिक्टर पैमाने को सहने की क्षमता किया जा रहा है। कुछ बिल्डिंग का निर्माण 9 रिक्टर पैमाने पर भी किया जा रहा है। यह पैमाना बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन पर निर्भर करता है कि वह ज़मीन पर कितना दवाब दे रहा है और उसके निर्माण में इस्पात की गुणवत्ता कैसी है।
कंक्रीट मिश्रण
कंक्रीट का मिश्रण स्ट्रक्चर की मज़बूती पर निर्भर करता है। स्ट्रक्चर का लोड के अनुसार कंक्रीट का मिश्रण किया जाता है। कोई भी डेवलपर्स के लिए यह संभव नहीं है कि वह साइट पर जाकर हमेशा कंक्रीट के मिश्रण का अवलोकन करे, उनके लिए पहले से तैयार मिश्रण एक अच्छा विकल्प होता है। आप बिल्डर से पूछ सकते हैं या जानकारी ले सकते हैं कि किस परीक्षण प्रयोगशाला से मैटीरियल की जांच करायी गयी है और वह प्रयोगशाला ने क्या रेटिंग दी है।
दीवार की मोटाई
बिल्डर को बुकिंग के समय ले-आउट डिज़ाइन में दीवार की चौड़ाई व मोटाई का उल्लेख करना  चाहिए। आप साइट पर जाकर यह पता कर सकते हैं कि बिल्डर ने जो आपसे कहा है उसका वह पालन कर रहा है की नहीं।
इंटीरियरडेवलपर्स आपसे वादा करता है कि बिल्डिंग की फिनिशिंग अला दजऱ्े की होगी और इसमें लगने वाले समान उत्तम क्वालिटी का होगें। आप पजेसन लेने के समय खुद से बाथरूम फिटिंग, इलेक्ट्रिक तार, स्वीच फिटिंग, टाइल्स, पलम्बर, प्लास्टर, टाइल्स, मारबल और पेंट की क्वालिटी आदि की जांच कर लें। क्या बिल्डिंग में जो समान इस्तेमाल हुए हैं, वह भारतीय बिल्डिंग मानक को पूरा कर रहे हैं या नहीं। यदि आपको किसी भी प्रकार का संदेह है तो आप बिल्डर से उसके बारे जानकारी ले सकते हैं और पूछ सकते हैं कि इसमें कौन सा ब्रांड यूज किया गया है। यदि बिल्डिंग में घटिया क्वालिटी का पेंट और टाइल्स का उपयोग किया गया है तो आप उसे चेंज करने को कह सकते हैं।
तीसरे पक्ष का प्रमाणपत्र
समय की कमी और दूसरे काम का बोझ होने से यह संभव नहीं है कि आप बिल्डिंग के हर पहलुओं की जांच खुद से करें। इसके लिए आप थर्ड पार्टी जो इस सेक्टर का जानकार हो, उसकी राय ले सकते हैं। वह आपको सभी पहलुओं का विस्स्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराता है। थर्ड पार्टी आपको कई मायने में फायदेमंद हो सकता है। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से भी आप संपर्क कर सकते हैं। आप डेवलपर्स से कह सकते हैं कि आप एक स्वतंत्र लेखा परीक्षक को हायर करें, जो प्रोजेक्ट को मॉनीटर कराएं। इससे आपके ऊपर बोझ भी कम होगा और प्रोजेक्ट का काम भी क्वालिटी का होगा। कई प्रतिष्ठिïत बिल्डर इस तरह की पहल कर भी रहे हैं। उन्होंने अपने प्रोजेक्ट कोCIDC-CQRA  गुणवत्ता प्रमाण पत्र ले रहे हैं। ये बॉडी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की रेटिंग देते हैं। ये उपक्रम भारत सरकार के कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री डेवलपमेंट कौंसिल द्वारा मान्या प्राप्त है। इसकी बॉडी को योजना आयोग द्वारा सहयोग मिलता है। आप यदि खुद से कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की जांच करना चाहते हैं तो भी आप किसी पेशेवर ऑडिटर से सेवा आवश्य लें। एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि जो प्रॉपर्टी आप खरीद रहे हैं, उसके लेकर आप सर्तक रहें।

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