संपत्ति के अनेक साझेदार …………

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photo courtesy https://www.dhwpalaw.com/

जब संपत्ति के कई साझेदार हो तो समस्याएं बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया में ढंग से पता नहीं चल पाता है कि संपत्ति का असली मालिक कौन है। कई बार तो मामले कोर्ट तक पहुंच जाते हैं, जहां पर असली मालिक को भी संपत्ति का हक लेने में कई साल तक लग जाते हैं। इससे बेहतर है कि सब कुछ आपस में ही समझौते के तहत निपटारा कर लिया जाय। इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण बातों पर आप गौर करें तो यह समस्याएं आसानी से सुलझ सकती है। 

कई लोग बजट ज्यादा न होने की स्थिति में साझेदारी करके प्रापर्टी में निवेश करते हैं। हालांकि इस दौर पर आपको इसके तमाम कानूनी पहलुओं के बारे में भी जानकारी जरूर रखना चाहिए। अगर किसी प्रापर्टी का मालिकाना हक एक से ‘यादा व्यक्तियों के नाम हो तो इसे ‘वाइंट ओनरशिप या साझा मालिकाना हक कहतें हैं। पैतृक संपत्ति में बेटे व बेटियों का साझा व समान हिस्सा होता है। किसी भी प्रापर्टी का कोई को-आनर के नाम नाम हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरण पाने वाला व्यक्ति प्रापर्टी का को-आनर हो जाता है। बंटवारे के जरिए को-आनरशिप को इकलौते मालिकाना हक में भी तबदील किया जा सकता है। अगर किसी प्रापर्टी में किसी का शेयर है तो इसका मतलब हुआ कि उस प्रापर्टी का ‘वाइंट ओनरशिप है। को-आनर के पास प्रापर्टी पर कब्ज़े का अधिकार, उसका इस्तेमाल करने का अधिकार और यहां तक कि उसे बेचने तक का अधिकार होता है।
टेनेंट्स इन कामन को-आनरशिप का एक प्रकार है लेकिन इस तरह की को-आनरशिप के बारे में कानूनी दस्तावेजों पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया गया है। पूरी प्रापर्टी में प्रत्येक टेनेंट इन कामन का अलग-अलग हित होता है। अलग-अलग हित होने के बावजूद प्रत्येक टेंनेंट इन कामन के पास यह अधिकार होता है कि वह पूरी प्रापर्टी का पजेशन रख सकता है या उसे इस्तेमाल कर सकता है।
यह जरूरी नहीं कि पूरी प्रापर्टी में प्रत्येक टेनेंट इन कामन का अलग-अलग लेकिन बराबर हित हो। पूरी प्रापर्टी में उनके हक एक दूसरे से कम अथवा ज्यादा भी हो सकते हैं। उन सबके पास अपने-अपने हित दूसरे के पास हस्तांतरित करने का अधिकार भी होता है।

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