टाइटिल यानि नो चिंता, नो फिक्र

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Deed to a House
photo courtesy http://boyerlawfirmblog.com

प्रॉपर्टी की दुनिया में टाइटिल काफी महत्व रखता है। प्रॉपर्टी की खरीदारी लीगल है या नहीं, इसके प्रमाण को साबित करने में इसकी भूमिका अहम् हो जाता है। प्रॉपर्टी के टाइटिल की जांच को एक प्रकार से प्रॉपर्टी के मालिकाना हक की जांच करना भी कहते हैं। यह जांच कोई भी कर सकता है। आमतौर पर टाइटिल की जांच या तो प्रॉपर्टी खरीदने वाला व्यक्ति कराता है या फिर उस पर लोन देने वाला।

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले कई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान रखना काफी ज़रूरी माना जाता है। इसके लिए कई महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट की जांच-पड़ताल करना आवश्यक है। इसी महत्वपूर्ण जांच-पड़ताल करने की श्रेणी में टाइटिल का नाम भी शामिल किया जाता है। प्रॉपर्टी की मालिकाना हक को पुख्ता करने में इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। कानूनी रूप से प्रॉपर्टी पर अपना हक जमाने का यह एक सशक्त माध्यम है। प्रॉपर्टी के टाइटिल की जांच करने से यह पता किया जा सकता है कि प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक पूरी तरह स्पष्ट है या नहीं और इस पर कोई विवाद तो नहीं है। इससे प्रॉपर्टी खरीदने के बाद कोई झगड़ा पैदा होने का डर नहीं रहता। किसी भी प्रॉपर्टी की डील फाइनल करते समय सबसे पहले आप यह देखें कि  डील करने वाला व्यक्ति प्रॉपर्टी को कानूनन बेच भी सकता है या नहीं। इसके बाद गौर करें कि प्रॉपर्टी का वैध टाइटिल उस व्यक्ति के ही पास है या नहीं। टाइटिल की जांच करने के कई तरीके होते हैं। आमतौर पर टाइटिल की जांच का काम वकीलों को सौंपा जाता है। प्रॉपर्टी के टाइटिल की बेहतर ढंग से रिकॉर्ड्स की तलाश करें। प्रॉपर्टी जिस इलाके में स्थित है, उस इलाके के सबरजिस्ट्रार के कार्यालय में प्रॉपर्टी से जुड़े कागजों का होना ज़रूरी है। टाइटिल की जांच करने वाला वकील वहीं उनकी तलाश करता है। इस कड़ी में प्रॉपर्टी के सबसे पहले मालिक या पिछले 30 सालों का ब्योरा निकाला जाता है। इनमें से जो भी पहले हो, वही पर्याप्त है। इसके पीछे उद्देश्य यह जांच करना होता है कि इस समय से लेकर आज तक प्रॉपर्टी या ज़मीन किसी भी झगड़े और देनदारी से मुक्त है या नहीं। यदि आपको अगर टाइटिल के संबन्ध में ऐसी कोई आपत्तिजनक बात भी पता चले, जिसके बारे में खुद प्रॉपर्टी बेचने वाले को भी नहीं पता। उस स्थिति में बेचने वाले व्यक्ति को इसकी जानकारी देकर इस मामले को निपटारा किया जा सकता है। इस तरह प्रॉपर्टी के मौजूदा मालिक को पिछले 30 बरसों का हिसाब-किताब निकलवाने से फायदा हो जाता है। पहले तो टाइटिल की जांच करने वाले वकील 30 की बजाय 60 बरसों का रिकॉर्ड चेक करते थे, क्योंकि लिमिटेशन एक्ट के अंतर्गत यह व्यवस्था थी कि यदि कोई प्रॉपर्टी गिरवी रखी गई है, तो उसे मुक्त होने में 60 वर्ष का समय लगेगा। हालांकि लिमिटेशन एक्ट 1963 के आर्टिकल 61 के अंतर्गत अब यह समय सीमा घटाकर 30 बरस कर दी गई है। इतने समय बाद प्रॉपर्टी का पजेशन वापस मूल मालिक को मिल जाता है। हालांकि आजकल तैयार की जाने वाली मॉर्गेज डीड में प्रॉपर्टी गिरवी रखने का समय आमतौर पर दो से पांच बरस का होता है, इसलिए वकील 30-40 बरस का रिकॉर्ड चेक करने को पर्याप्त मानते हैं। इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आप प्रॉपर्टी के विज्ञापनों पर भी नज़र रखें। आपने कभी-कभी अखबारों में ऐसे विज्ञापन भी देखे होंगे, जिनमें प्रॉपर्टी खरीदने वाले पक्ष का वकील खरीदार के प्रतिनिधि के रूप में यह कहता है कि उसके क्लाइंट अ प्रॉपर्टी को ब पक्ष से खरीदने जा रहे हैं। इस प्रॉपर्टी के संबन्ध में किसी किस्म की देनदारी, गिरवी होना, लीज, लीन एग्रीमेंट, गिफ्ट या किसी भी प्रकार के दावा 15 से 30 दिन के अंदर किया जा सकता है। इसके बाद किसी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा। इस बारे में यह समझा जा सकता है कि ज़रूरी नहीं कि वास्तविक दावेदारों की नज़र इस विज्ञापन पर पढ़े, लेकिन वकील ऐसा विज्ञापन इसलिए प्रकाशित कराते हैं, जिससे बाद में कोई झगड़ा होने पर यह उनका पक्ष मज़बूत करे। टाइटिल के बारे में प्रॉपर्टी टैक्स की देनदारी एक महत्वपूर्ण भाग होता है, इसलिए इस बारे में भी गौर करें। इसके लिए आपको प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उस इलाके के म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के ऑफिस जाकर इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि प्रॉपर्टी पर किसी किस्म का कोई टैक्स तो बकाया नहीं है। इनमें हाउस टैक्स, वॉटर टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स आदि हो सकते हैं। यह जांच इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि प्रॉपर्टी का कंस्ट्रक्शन पूरा होने के बाद इन टैक्सों का बंटवारा दोनों पक्षों के बीच किया जाता है। उसका अनुपात कॉरपोरेशन ऑफिस से देनदारी का पता लगाने के बाद ही किया जा सकता है, जैसे- प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री की तारीख वाले दिन तक प्रॉपर्टी बेचने वाला और उसके बाद खरीदने वाला पक्ष प्रॉपर्टी के सभी टैक्स चुकाएगा। जानकारों का कहना है कि यदि आप प्रॉपर्टी खरीदने से पहले टैक्स की देनदारी की जांच नहीं करते हैं, तो इसका नुकसान आगे चलकर आपको उठाना पड़ सकता है। लंबे समय की देनदारी होने पर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन अपना पूरा बकाया वसूल करेगी, जिसे नहीं चुकाने पर आपके पास की प्रॉपर्टी बेचने का अधिकार भी होता है। टाइटिल की जांच करने वाले वकील इस बात की भी जांच करते हैं कि पिछले 12 बरसों में सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में किसी व्यक्ति ने उस प्रॉपर्टी को लेकर कोई कोर्ट केस तो दायर नहीं किया है। आम भाषा में इसे ’12 सालाÓ भी  कहा जाता है। प्रॉपर्टी खरीदने के समय इनकम टैक्स क्लियरेंस के बारे में भी बेहतर ढंग से जांच-पड़ताल भी करें। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 230 ए के अनुसार, अब किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं है। फिर भी इस बात की सावधानी रखनी ज़रूरी है कि कहीं उस प्रॉपर्टी पर इनकम टैक्स या सरकार के प्रति कोई बड़ी रकम देय न हो। इसके लिए आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से न सही, लेकिन प्रॉपर्टी बेचने वाले व्यक्ति के चार्टर्ड अकाउंटेंट से क्लियरेंस सटिर्फिकेट ज़रूर ले लें। जमीन का आरक्षण के मामले के तह में भी जाएं। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले संबन्धित वॉर्ड के वॉर्ड ऑफिसर से यह पता कर लेना चाहिए कि संबन्धित ज़मीन, प्रॉपर्टी या उसके किसी हिस्से को लैंड एक्विजिशन एक्ट के अंतर्गत आरक्षित तो नहीं कर दिया गया है या फिर प्रॉपर्टी को लेकर कोई अन्य नोटिस, नोटिफिकेशन, एक्शन या क्लेम तो पेंडिंग नहीं है। इन सभी बातों का यदि आप ख्याल रखते हैं, तो प्रॉपर्टी की दुनिया आपके लिए एक बेहतर वर्तमान और भविष्य दोनों लेकर आएगी।
महत्वपूर्ण बात 
-कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सबसे ज़रूरी काम यह है कि उसके टाइटिल को लेकर पूरी तरह से तसल्ली कर ली जाए। अगर इसमें ही कोई चूक हो गई, तो आप कानूनन ही उस प्रॉपर्टी से हाथ धो बैठेंगे। इसके जांच-पड़ताल करने के कई तरीके हैं, जिस पर गौर करने पर आपका वर्तमान और भविष्य दोनों ही सुरक्षित रह सकता है।
-टाइटिल की जांच के लिए पहला कदम है कि आप प्रॉपर्टी के बैकग्राउंड को समझने के लिए सबरजिस्ट्रार ऑफिस इसके 30 साल का रिकॉर्ड का से चेक करें। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है कि आप प्रॉपर्टी संबन्धित कोर्ट यानि सिविल कोर्ट में जाकर इसके 12 साल का इतिहास मालूम करें।
-प्रॉपर्टी की म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफिस में  देनदारी को भी देंखे। प्रॉपर्टी बेचने वाले के सीए से हासिल करें नो ड्यूज सर्टिफिकेट

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