एक नया जयपुर बनाने की कवायद

0
71

विनय श्रीवास्तव

जयपुर में टाउनशिप में मिनी सिटी का कॉन्सेप्ट वाकई में सराहनीय है। अगर यह कॉन्सेप्ट सफल रहता है तो जयपुर की तरह अन्य शहरों में भी मिनी सिटी की शुरूआत जल्द हो सकती है। पूरी दुनिया में गांवों से शहरों की ओर लोगों का पलायन बढ़ रहा है। इसको देखते हुए साल 2050 तक दुनिया की करीब 70 प्रतिशत आबादी शहरों में होगी। भारत भी इससे अछूता नहीं होगा। इसलिए भारत को 500 नए शहरों की दरकार होगी, ताकि गांवों से शहरों में आने वाले लागों को समायोजित किया जा सके। इस मिनी सिटी में तीन से नौ किलोमीटर की परिधि में बच्चों के लिए स्कूल कॉलेज और स्टेडियम होगा। वहीं शॉपिंग के लिए मॉल, रेस्टोरेन्ट,फाइव स्टार होटल, हॉर्स राइडिंग एकेडमी और हॉस्पिटल जैसे तमाम सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। शहर आने के लिए ट्रांसर्पोटेशन की सुविधा होगी। इस टाउनशिप कम मिनी सिटी का निर्माण इस प्रकार किया जाएगा कि कम से कम दस हजार लोग एक साथ रह पाएं। यह भी कम रोचक नहीं है कि भारत में शहरीकरण की प्रक्रिया लंबे समय से देखने को मील रही है। लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर शहरीकरण की प्रक्रिया विफल ही रही है। ऐसे में शहरीकरण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सबसे ज्यादा मकानों की कीमत को कम करने पर काम करना होगा, ताकि विकास के काम को तेज किया जा सके।

अगले 10 साल में एक नया जयपुर बनाने की तैयारी है। एक ऐसे नए जयपुर का निर्माण होगा, जिसको मिनी सिटी के नाम से जाना जाएगा। यह होगा 40 किलोमीटर के दायरे में। ऐसा माना जा रहा है कि शहर वर्टिकल के साथ साथ होरीजेंटल भी बढ़ेगा। नए जयपुर में हाइराइजिंग बिल्डिंग्स, विलाज और इंडीविजुयल्स हाउस भी होंगें। अब टाउनशिप में ही मिनी सिटी बसाया जाएगा। लोगों की सहुलियत के हिसाब से उनकी ज़रूरत की हर चीज़े उपलब्ध होंगी। इस मिनी सिटी में तीन से नौ किलोमीटर की परिधि में बच्चों के लिए स्कूल, कॉलेज और स्टेडियम होगा। वहीं शॉपिंग के लिए मॉल, रेस्टोरेन्ट, फाइव स्टार होटल, हॉर्स राइडिंग एकेडमी और हॉस्पिटल जैसे तमाम सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। शहर आने के लिए ट्रांसर्पोटेशन की सुविधा होगी। इस टाउनशिप कम मिनी सिटी का निर्माण इस प्रकार किया जाएगा कि कम से कम दस हजार लोग एक साथ रह पाएं। यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस मिनी सिटी के निर्माण के साथ साथ जन मानस की सुविधाओं के लिए कहां किन चीज़ों का निर्माण किया जाएगा।

रणजी खेलने के लिए स्टेडियम

ग्रास फील्ड के एमडी के अनुसार एफडीआइ की पच्चास परसेंट भागीदारी के साथ 1800 एकड़ में मिनी सिटी डेवलप किया जा रहा है। इसका एरिया एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी मानसरोवर से भी अधिक है। मानसरोवर का एरिया 2400 बीघा है। नौ किलोमीटर में फैली यह टॉउनशिप रेजीडेंशियल कम स्पोर्टस सिटी होगी। 35 बीघे में क्लब और 24 हजार गज में स्टेडियम तैयार करने का प्रस्ताव है। स्टेडियम में रणजी मैच खेले जायेंगे। इसमें बारह टेनिस कोर्ट और सात एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स भी होंगे।

बच्चों के लिए क्रेच की सुविधा

जयपुर में प्रोफेशनल्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर महिला प्रोफेशनल्स की। उनके आवश्यक्ताओं को ध्यान में रखते हुए क्रेच की सुविधा दी जाएगी। प्रोफेशनल्स के लिए अलग से प्रोजेक्ट लाया जाएगा जहां वर्किंग महिलाओं को अपने बच्चों के देखभाल और लालन पालन में कोई कमी ना रहे। देश की आबादी लगातार बढ़ रही है। जनसंख्या के हिसाब से लोगों के पास ज़मीन की कमी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। लोगों की चाहत रहती है कि वे किसी ऐसे जगह अपने आशियाना का निर्माण करें, जहां उनके आस पास सभी प्रकार सुविधायें उपलब्ध हों। इसी के मद्देनज़र टाउनशिप में मिनी सिटी का कॉन्सेप्ट लॉन्च किया जा रहा है।

नि:शुल्क शटल बस फैसिलिटी

शहर के साथ साथ सुविधाओं का तरीका भी बदल रहा है। इस मिनी सिटी में न सिर्फ फ्लैट दिया जाएगा बल्कि हर तरह के सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। सुबह सात बजे से शाम के सात बजे तक निशुल्क शटल बस फैसिलिटी की सुविधा होगी। शटल बच्चों के स्कूल समय के अनुसार उन्हे निश्चित प्वाइंटस तक छोड़ेगी।

24 घंटे कैब की सुविधा

इमरजेंसी और आउटींग के लिए 24 घंटे कैब की सुविधा होगी। कैम्पस में पांच कैब होंगी। ये कैब मार्केट रेट से आधे रेट पर उपलब्ध होंगे। कैब का पैसा ऑपरेटिंग खर्च के आधार पर सोसायटी में जायगा। सोसायटी ही कैब का मेन्टीनेन्स और ड्राईवर का खर्च उठायेगी।

राजस्थान का पहला वाटर पार्क

जयपुर से करीब 70 किलोमीटर दूरी पर 500 एकड़ में गोल्फ स्र्पोट्स पर टाउनशिप बनेगी। प्रोफेशनल्स गोल्फ कोर्स की तरह इसमें 18 हॉल होंगे। इसमे वाटर पार्क, हॉर्स राइडिंग, एकेडमी, पांच सितारा होटल, आर्ट एंड क्राफ्ट बाज़ार, कन्वेंशनन सेंटर होगा। इस कन्वेंशनन सेंटर में रोजना दो से तीन घंटे का शो होगा। इसमें राजस्थान सहित अन्य राज्यों और देशों की आर्ट पर कार्यक्रम होंगे। इंटीग्रेटिड टॉउनशिप में विला, हॉस्पिटल, स्कूल और वलनेस क्लिनिक की सुविधाएं प्रदान की जाएगी। टॉउनशिप में मिनी सिटी का कॉन्सेप्ट वाकई में सराहनीय है। अगर यह कॉन्सेप्ट सफल रहता है तो जयपुर की तरह अन्य शहरों में भी मिनी सिटी की शुरूआत जल्द हो सकती है। पूरी दुनिया में गांवों से शहरों की ओर लोगों का पलायन बढ़ रहा है। इसको देखते हुए साल 2050 तक दुनिया की करीब 70 प्रतिशत आबादी शहरों में होगी। भारत भी इससे अछूता नहीं होगा। इसलिए भारज को 500 नए शहरों की दरकार होगी, ताकि गांवों से शहरों में आने वाले लागों को समायोजित किया जा सके। यह भी कम रोचक नहीं है कि भारत में शहरीकरण की प्रक्रिया लंबे समय से देखने को मील रही है। लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर शहरीकरण की प्रक्रिया विफल ही रही है। ऐसे में शहरीकरण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सबसे ज्यादा मकानों की कीमत को कम करने पर काम करना होगा, ताकि विकास के काम को तेज़ किया जा सके। शहरीकरण के विस्तार से गांवों की ज़मीन भी कम हो रही है। यह देखते हुए केन्द्र सरकार ने नए शहरों के विकास और विस्तार की ज़रूरत को महसूस किया है। हालांकि नए शहरों के विकास की राह में कई रोड़े हैं। इसके अलावा नए शहरों के विकास के लिए बड़े निवेश की ज़रूरत भी है। वैसे केंद्र सरकार ने अपने पहले आम बजट में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की है। यह शहर कैसे होंगे, इसका खाका भी तैयार कर लिया गया है। यह स्मार्ट सिटी दूसरे शहरों से काफी आगे होगी। इनका बुनियादी ढांचा, रियल एस्टेट, संचार व्यवस्था और बाज़ार सभी आला दर्जें के होंगे। वास्तव में ये शहर कैसे बनेंगे, यह भविष्य में ही पता लगेगा। लेकिन इतना ज़रूर है कि जब यह स्मार्ट सिटी अस्तित्व में आएगी तो रियल एस्टेट क्षेत्र भी नया आकार लेगा।

LEAVE A REPLY