चीन ने बनाया एशिया का पहला वर्टीकल गार्डन

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वायु प्रदूषण को लेकर पूरा विश्व चिंतित है। इस मामले में दिल्ली और बीजिंग सबसे आगे है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे लेकर चीन ने अर्लट जारी करके सभी कोयले की खादानों पर रोक लगा दी। आलम ये है कि पिछले साल दोनों शहरों में विषाक्त धुंध से लोगों का दम घुटने लगा था और उन्हें घर में रहने की सलाह दी गई थी। कई जगह तो हालात इतने खराब हैं कि लोगों को मास्क लगा कर रहना पड़ रहा है। स्थिति ऐसी हो तो इससे निपटना ज़रूरी हो जाता है…खैर इस मामले में चीन भारत से ज्यादा संवेदनशील नज़र आ रहा है। चीन ने  इस समस्या का हल निकालने के प्रयास में लगा है। चीन ने बढ़ते प्रदूषण से  बचने के लिए वर्टीकल गार्डन विकसित किया है। वर्टीकल गार्डन का निर्माण चीन के नानजींग शहर में किया जा रहा है। ये बिल्डिंग 656 feet लंबी और उतनी चौड़ी है। 354 feet ऊंची इस वर्टीकल बिल्डिंग को हज़ार से ज़्यादा पेड़-पौधे और झाड़ियों को लगाकर मनभावन डिजाइन बनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि इस संरचना के जरिए प्रत्येक दिन लगभग 60 किलो ऑक्सीजन मुक्त होगी, जिसे वायु प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसका विकास दो टॉवर्स पर किया जा रहा है। जिसे’नानजिंग टॉवर्स’ का नाम दिया गया है। एशिया के पहला वर्टिकल गार्डन के निर्माण के लिए दीवार से लेकर बालकनी पर एक विशेष प्रकार की झाड़ियां और पौधों का उपयोग किया जाएगा। बिल्डिंग्स में विभिन्न कंपनियों के ऑफिस, म्यूजियम, एक ग्रीन आर्किटेक्चर स्कूल और क्लब भी शामिल हैं। जबकि छोटी बिल्डिंग में 247 कमरों के साथ-साथ हयात होटल भी है। यहां पर रहने वालों को टॉवरो की बालकनी से अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। जानकारों का कहना है कि वर्टीकल गार्डन से  यहां की जैव विविधता संतुलन बनाने और पर्यावरण को स्वछ रखने में मदद मिलेगी। ये प्रोजेक्ट साल 2018 में पूरा होगा। वर्टिकल फॉरेस्ट की डिजाइन स्टीफानो बोइरी ने तैयार की है।

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