भोपाल रियल एस्टेट रफ्तार में

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल देश के उभरते शहरों में एक बड़ा नाम है। इस शहर में रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से तरक्की कर रहा है। व्यावसायिक और आवासीय निर्माण तो शहर के चारों तरफ हो रहे है और यहां निवेश करने वालो ने ऊंचा मुनाफा भी कमाया है। देश के दूसरें शहरों के बिल्डर्स को जहां 14 फीसदी की ग्रोथ मिल रही हैं, वहीं भोपाल का रियल एस्टेट का बाजार 35 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल आमतौर पर ऐसे लोगों के लिए एक बेहतर शहर माना जाता है जो रिटायरमेंट के बाद यहां बसना चाहते हैं और इसी बात को ध्यान में रखते हुए भोपाल के नामी बिल्डरो में से एक आकृती बिल्डर हर वर्ग के लिए अपनी योजनाएं लेकर आ रहा है। सीनियर सिटीजन और रिटायरमेंट के बाद की सुकून भरी जिंदगी के लिए आकृति बिल्डर ने द नेस्ट नाम से प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। 60 साल से अधिक के लोगों को यहां पर हर तरह की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इस प्रोजेक्ट में 7 लाख रुपए से 1 करोड़ रुपए तक के घर बनाए जा रहै हैं। बिल्डर्स के मुताबिक भोपाल के बेहतर इंफ्रस्ट्रक्चर और यहां की आबोहवा ने इसे निवेश के लिए एक बेहतर जगह बना दिया है। भोपाल का चिनार ग्रुप भी मिडिल क्लास को ध्यान में रखते हुए 18-30 लाख रुपए तक के कई प्रोजेक्ट लेकर आया है। उनके मुताबिक रियल एस्टेट सेक्टर को वास्तविक खरीदार आकर्षक बनाते हैं ना की निवेशक। डेवलपमेंट के लिए कम जमीन और मकानों की बढ़ती मांग के चलते अब भोपाल के बिल्डर हाई राईज डेवलप करने की सोच रहे हैं। सरकार ने 2013 में हाइराइज बिल्डिंगों की ऊंचाई 12 मीटर से बढ़ाकर 30 मीटर करने की मंजूरी दे दी है। भोपाल में इस तरह के विकास को देखते हुए अब राष्ट्रीय स्तर के बिल्डर्स भी यहां अपने प्रोजेक्ट लाना चाहते हैं।

बढ़ते मॉल कल्चर से भी बदले नहीं शहर के बाजार
झीलों की नगरी भोपाल भी मॉल कल्चर में अच्छे से ढल गई है। पिछले कुछ सालों में यहां 3 शॉपिंग मॉल खुल गए हैं और कई खुलने की तैयारी में हैं। इस बदलाव के बावजूद नवाबों और बेगमों का ये शहर अपने परंपरागत बाजारों की पहचान भी बनाए हुए है। वक्त बदला तो भोपाल भी बदल गया है। मॉल अब इस शहर की नई पहचान बन गए हैं। भोपाल में इस वक्त 3 मॉल हैं। और तीनों बढ़िया बिजनेस कर रहे हैं। भोपाल एजुकेशन हब के तौर पर भी उभर रहा है। इसलिए पूरे शहर में बहुत स्टूडेंट्स हैं। जो इस शॉपिंग और एंटरटेनमेंट का पूरा लुत्फ उठाते हैं। मॉल कल्चर ने भोपाल में एंटरटेनमेंट की तस्वीर भी बदल दी है। पहले यहां के सिनेमाघर सिंगल स्क्रीन में बदले। अब सिंगल स्क्रीन भी पीछे छूट गया है। मल्टी स्क्रीन में बेहतरीन साउंड और पिक्चर क्वॉलिटी ने एंटरटेनमेंट की दुनिया को और भी खूबसूरत बना दिया है। लेकिन इस बदलते वक्त में भी जिसने भोपाल को नहीं बदला है वो हैं यहां के बाजार। नवाबों के महलों और तंग गलियों से होते हुए पुराने भोपाल के बाजारों में जाइए और असल तस्वीर देख लीजिए। यहां खरीदारों की भीड़ कभी कम नहीं होती। बदलते वक्त के साथ बदलने और पुरानी पहचान को मजबूत करके चलने की भोपाल को अलग बनाती है।

भोपाल बन रहा इंडस्ट्रीयल क्षेत्र में नई पहचान
इसके अलावा देश के मध्य स्थित भोपाल अब इंडस्ट्रियल क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। जहां एक ओर भोपाल से लगे मंडीदीप से लगभग 8,000 करोड़ रुपए का निर्यात किया जा रहा है। वहीं गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में लगभग 2,000 करोड़ रुपए का उत्पादन हर साल किया जा रहा है। बढ़ती मांग के चलते गोविंदपुरा के इंडस्ट्रियलिस्ट अब और जगह की मांग कर रहे हैं, ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके। गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में भले ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो, लेकिन यहां के उद्यमी अपनी क्षमता से भी ज्यादा उत्पादन करके करीब 40,000 लोगों को सीधे रोजगार दे रहे हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोग मानते हैं कि भोपाल देश के बीचोंबीच स्थित है और इसका फायदा इस शहर को मिलता है। इंडस्ट्री के चलते इस शहर में विकास की बहुत संभावनाएं हैं। इसलिए आने वाले वक्त में ये दूसरे शहरों को आसानी से पीछे छोड़ सकती है। गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में बरसों से कारोबार कर रहे योगेश गोयल का कहना है कि सरकार की मंशा क्षेत्र की और विकास की है, लेकिन इसके बावजूद सड़क और पानी जैसी समस्या बनी हुई है। उद्योगपतियों को अब अपना प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए जमीन की जरूरत है, अगर सरकार इसमें मदद करे तो पूरे इलाके का अच्छा विकास हो सकता है। उद्योगपतियों का ये भी मानना है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद सरकार की नीतियों के चलते पिछले 10-15 वर्षों में क्षेत्र का अच्छा विकास हुआ है। मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में प्रॉक्टर ऐंड गैंबल, एचईजी और ल्यूपिन जैसी कंपनियां अपने कारोबार को विस्तार देने में जुट गई हैं। प्रॉक्टर एंड गैंबल मंडीदीप में नई इकाई शुरू करने के बारे में सोच रहा है तो, एचईजी ने अपनी उत्पादन क्षमता 1 लाख टन तक पहुंचाना चाहती है। कंपनियों की विस्तार योजनाओं से इलाके का विकास तो होगा ही, साथ ही लोगों के लिए रोजगार के मौके भी पैदा होंगे।
अब आया स्मार्ट होम का जमाना
भोपाल। भारत में स्मार्ट होम्स का चलन बढ़ रहा है। स्मार्ट होम्स यानी ऐसे घर जहां अधिकांश चीजें तकनीक चालित होती हैं। बटन दबाने पर वहां कई काम एक साथ हो जाते हैं। पूरा घर एक स्मार्ट होम नियंत्रक के संकेत पर चलता है। ये नियंत्रक एक रिमोट की तरह काम करता है जिससे घर का तापमान आदि भी व्यवस्थित हो जाता है। भविष्य में स्मार्ट होम्स की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह कितने उन्नत तकनीक से काम कर सकते हैं। वे दिन बीत गए जब हम अपने घर के डिजाइन के अनुसार खुद को ढालते थे। घर का डिजाइन अब इसके मालिक की जीवनशैली के अनुरूप तैयार किया जाता है और इसे बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। मनुष्य के क्रमिक विकास के साथ उसके रहने-सहने का तरीका, सलीका आवास विकास में जबरदस्त परिवर्तन आया है। मां अपनी बेटी के एयर-कंडीशंड बेड रूम में बैठकर उसे होमवर्क पूरा करानें की कोशिश कर रही हैं। मां इस कमरे में बैठकर भी अपने फ्लैट में लगे क्लोज सर्किट कैमरे की बदौलत यह देख सकती हैं कि मुख्य दरवाजे से कौन घर के अंदर आ रहा है या बाहर निकल रहा है। यहीं बैठकर अपनी किचन के लाइट बंद कर सकती हैं। फ्लैट के प्रत्येक कमरे में एक पैनल लगा है जिसके जरिए रिमोट कंट्रोल के इस्तेमाल से पूरे फ्लैट की लाइटिंग का नियंत्रण किया जा सकता है। पैसेज में कोई गतिविधि होने के साथ ही लाइट आॅन हो जाती है। इसकी वजह पैसेज में लगा सेंसर है जो खुद ब खुद लाइट आॅन या आॅफ कर देता है। आज स्मार्ट होम का दौर है, इन घरों में आधुनिक तकनीक के साथ ही नवीनतम डिजाइन और कला के इस्तेमाल से सुविधा, सुरक्षा और जीवन के सौंदर्य को बढ़ाया जाता है। तकनीक में परिवर्तन आने के साथ ही हमारे जीवन की सुख सुविधाओं में भी दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है। अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार बढ़ने के साथ ही लोगों की आमदनी भी बढ़ी है। रियल एस्टेट के बाजार में तेजी और आकांशाओं के बढ़ने के साथ ही नए मैटीरियल, गैजेट और डिजाइन सेवाओं के उपलब्ध होने से स्मार्ट होम अब वास्तविकता बन गए हैं और आर्थिक रूप से मजबूत परिवार अब ऐसे घरों की ओर बड़ी संख्या में आकर्षित हो रहे हैं। होम आटोमेशन में वातानुकूलन, प्रकाश व्यवस्था, निगरानी और सुरक्षा सम्मिलित होते हैं। इस प्रकार के उपकरणों एवं प्रणाली को गृह स्वचालन एवं इनसे सुसज्जित गृह को स्मार्ट होम की संज्ञा दी जाती है। भारत में स्मार्ट होम्स का चलन बढ़ रहा है। स्मार्ट होम्स यानी ऐसे घर जहां अधिकांश चीजें तकनीक चालित होती हैं। बटन दबाने पर वहां कई काम एक साथ हो जाते हैं। पूरा घर एक स्मार्ट होम नियंत्रक के संकेत पर चलता है। ये नियंत्रक एक रिमोट की तरह काम करता है जिससे घर का तापमान आदि भी व्यवस्थित हो जाता है। भविष्य में स्मार्ट होम्स की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह कितने उन्नत तकनीक से काम कर सकते हैं। स्मार्ट होम्स किसी घर को सुचारु रूप से चलाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इससे घर के लोगों के समय और पैसे की बचत होती है। एक अच्छी गृह स्वचालन प्रणाली में कई तरह की सुविधाओं का मिश्रण होता है, जैसे बगीचे में आवश्यकता अनुसार पानी पहुंचाना या पानी गर्म करने के साधन का काम पूरा होते ही स्वत: बंद (स्विच आॅफ) हो जाना या फिर कमरे का तापमान परिवार के सदस्यों की आवश्यकता अनुसार स्थिर रखना आते हैं। इस प्रकार स्वचालित गृह मितव्ययी भी होते हैं।

सुविधाओं से गुलजार होतीं टॉउनशिप

लोन आज के वक्त की जरूरत है। घर खरीदने के लिए लोन के बगैर काम चलाना मुश्किल होता है। जाहिर तौर पर हर तरह के लोन को समान मासिक किस्तों यानी इवेटेड मंथली इंस्टालमेंट (ईएमआई) के जरिए चुकाना होता है। पर अहम बात ये है कि इएमआई के गणित को बहुत कम लोग समझ पाते हैं। यही नहीं, तमाम लोग इसकी शर्तों और नियमों को भी ठीक से समझने की कोशिश नहीं करते हैं। हकीकत में जब आप अपने बाकी वित्तीय फैसले सोच समझकर लेते हैं तो लोन की ईएमआई में लापरवाही यों? अगर आप परेशानी बचना चाहते हैं तो ईएमआई के रहस्य को समझना जरूरी है। ईएमआई लोन चुकाने का एक तरीका है। ईएमआई की दर तीन बातों यानी लोन की राशि, ब्याज दर और अवधि पर निर्भर करती है। हर महीने ईएमआई के रूप में जो रकम चुकानी पड़ती है, उसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। इसमें हर महीने का इंस्टालमेंट पहले ही निर्धारित हो जाता है। आप ईएमआई की रकम को अपने बजट का हिस्सा मान सकते हैं जो आपको हर महीने खर्च करना है।
भोपाल में घर खरीदने वालों में आसपास के शहरों के अलावा अन्य राज्यों के लोग भी शामिल हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भोपाल प्रदेश की राजधानी होने के साथ ही बेहतरीन वीकेंड प्लेस भी है। यह इंदौर के नजदीक होने की वजह से भी रियल एस्टेट कारोबार में ग्रोथ पकड़ रहा है। इतनी शानदार लोकेशंस शायद ही और किसी शहर में देखने को मिलें। प्राकृतिक खूबसूरती से सराबोर भोपाल में घर खरीदना हर किसी का सपना बन गया है। इसीलिए यहां हर साल हजारों डुप्लेक्स, बंगले और फ्लेट बेचे जाते हैं। शहर के हर हिस्से में विश्वस्तरीय टाउनशिप्स आकार ले रही हैं। अयोध्या बाईपास रोड़, होशंगाबाद रोड, जाटखेड़ी, कटारा हिल्स, शाहपुरा, बावडिया कलां, त्रिलंगा, एयरपोर्ट रोड, भौंरी आदि कई जगह शानदार कॉलोनियां और टाउनशिप डेवलप हो रही हैं। ज्यादातर लोग स्वतंत्र बंगलों की कॉलोनी में रहना पसंद करते हैं जिनकी कीमत 20 से 50 लाख तक हो सकती है। ये बंगले पूर्णत: सुरक्षित, शॉपिंग कामप्लेक्स, क्लब हाउस, पार्टी हॉल, जिम्नेजियम, कवर्ड पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं से परिपूर्ण हैं।

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