सिटी ऑफ लाइट -पेरिस

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मुकेश के झा

फैशन जगत की राजधानी के रूप में पेरिस किसी स्वपन्न लोक से कम नहीं है। यहां पर पुरातनता और आधुनिकता का अनोखा मेल है। यह विश्व के गिने-चुने सुंदरतम, सुव्यवस्थित और मनोरम शहरों में से एक माना जाता है। फ्रांस के परी शहर के रूप में पेरिस अपनी सुन्दरता की कहानी अपने अंदाज़ में बयां करती है। ग्लैमर की रोशनी से नहाई पेरिस किसी को भी एक नज़र में भा जाती है। यहां की हर एक रचना फ्रांस का इतिहास, कला-संगीत और संस्कृति के स्वरूपों का विशद् वर्णन करता है। इन सब खूबियों के कारण पेरिस को सिटी ऑफ लाइट की संज्ञा दी जाती है।

फैशन दुनिया की राजधानी के नाम से मशहूर पेरिस विश्व के प्रसिद्ध शहरों में शुमार किया जाता है। ग्लैमर के तड़का ने इसके रूप और रंग पर गहरा प्रभाव जमाया है। इसे सिटी ऑफ लाइट की संज्ञा दी जाती है। यहां का एफिल टॉवर, द लूवे पैलेस, द नोटे-डैम कैथेड्रल, वर्साय पैलेस ऐसे अतुलनीय जगह है, जो पेरिस की दुनिया में गज़ब की चमक बिखेर रहा है। यहां का प्रसिद्ध व्यवसायिक जिला ला डिफेंस में डेनमार्क के वास्तुकार ऑटो वॉन स्प्रेककेलसेन की कृति ग्रांड आर्ची वास्तुकला पेरिस की आर्थिक और कलात्मक जीवन शक्ति का सबूत देता है। यहां की कला-संस्कृति के रंगों से रंगा प्रसिद्ध स्थानों पर जब घुमने जाएंगे, तो आप इस कदर से खो जाएंगे कि पता ही नहीं चलेगा कि इतना समय कैसे बीत गया। पेरिस सिटी पर्यटकों के आकर्षण के केन्द्र में है। यहां पर विश्व के कोने-कोने से लोग घुमने आते हैं। इसकी वैभवशाली रूप और ग्लैमर की चमक आपको आत्मविभोर कर सकता है। पेरिस सिटी को घुमने के लिए यहां के महत्वपूर्ण आकर्षक स्थानों के लिए कुछ योजनाएं बना कर जाएं, तो ज्यादा बेहतर होगा।

एफिल टॉवर

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पेरिस की पहचान का प्रतीक एफिल टॉवर यहां का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। इसके बिना पेरिस घुमना अधूरी ही मानी जाएगी। इस प्रसिद्ध कृति का डिज़ाइन गुस्तावे एफिल ने वर्ष 1889 में तैयार किया था। यह उस समय की सबसे ऊंची बिल्डिंग थी। एफिल टॉवर 300 मीटर ऊंची है। उस समय उसके निर्माण को लेकर लोगों में कोई खास खुशी नहीं थी लेकिन वर्तमान में यह अपनी चमक देश ही नहीं विदेशों में भी बिखेर रही है। विश्व के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की लिस्ट में शुमार इसे देखने लाखों की संख्या में पर्यटक प्रति वर्ष आते हैं। न्यूयॉर्क सिटी स्थित क्रैसलर बिल्डिंग जो वर्ष 1930 में बनी थी, उससे पूर्व एफिल टॉवर दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग थी।
इतिहास– वर्ष 1889 में एफिल टॉवर बनकर तैयार हो गया था। उस समय यह 300 मीटर की ऊंचाई के साथ विश्व की सबसे ऊंची बिल्डिंग थी। फ्रांस की क्रांति के सौ साल के उपलक्ष्य में एफिल टॉवर का निर्माण किया गया था। तब से अब तक यह लौह टॉवर यहां की संस्कृति की पहचान बन गई है। इसे सिटी के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। इसके निर्माण को लेकर एक प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था। जिसे उस समय के प्रसिद्ध इंजीनियर गुस्तोव ने जीता था। वह निर्माण की दुनिया में काफी प्रसिद्ध व्यक्ति थे। वे रेलवे ब्रिज वाइयडक्ट्स के निर्माण में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके थे। जनता की नज़र में इसके निर्माण को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया थी। कुछ लोग क्रांति समारोह की भव्य याद के रूप में इसे सैलीब्रेट कर रहे थे, तो कुछ इसे बेकार निर्माण की संज्ञा दे रहे थे। इस प्रतीक चिन्ह् की भव्यता बढ़ाने के लिए वर्ष 1889 और 1890 में पेंट किया गया। इसमें तीन फ्लोर्स हैं। पहला फ्लोर्स 57 मीटर, दूसरा 115 मीटर और तीसरा २७६ मीटर का है। इसका टॉप एरियल 320 मीटर है। यहां से आप पेरिस की रंगीन छटा को विस्तृत रूप से देख सकते हैं। इसे बनाने में करीब 12 हज़ार स्टील गर्डर( शहतीर), 25 लाख मोटी कीले से जुड़कर, एफिल टॉवर को मज़बूती प्रदान कर रहा है। इसके रूप को अनोखे रूप में ढालने में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। वर्ष 1986 के बाद इसमें लगे फ्लडलाइट से पूरी पेरिस जगमगा उठता है।

नोट्रे दमे

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यह सिटी ऑफ पेरिस की प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह गौथिक शैली की उम्दा की शिल्पकारी इसमें देखने को मिलती है। इसका निर्माण कार्य लुई 7 वां के शासन काल 1163 ई.में शुरू हुआ था। पॉप एलेक्जेंडर तृतीय ने इसकी नींव रखी थी। हालांकि इसका निर्माण कार्य 200 साल बाद वर्ष 1345 में खत्म हुआ। वर्ष 1991 में दस सालों के लिए एक योजना बनाई गई, जो उसके देखेरख की समुचित व्यवस्था और जीर्णोद्धार को लेकर था। इसके बाद नोट्रे दमे की सुन्दरता और भव्यता काफी बढ़ गई। इस स्थान का महत्व इस बात से पता चलता है कि यह कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्यों का गवाह रह चुका है। यहां पर वर्ष 1430 में हैनरी षष्टम का राज्याभिषेक किया गया था। 2 दिसम्बर, वर्ष 1804 में नेपोलियन का राज्यभिषेक पाइयुस सप्तम ने किया था। अपनी शक्ति प्रदर्शन करते हुए नेपोलियन ने अपने को सम्राट घोषित कर लिया । उसकी पत्नी जोसेफिने ने महारानी घोषित कर दिया। 31 मई, वर्ष 1980 को पॉप जॉन पॉल ने मैग्नीफिकेट ( प्रभु ईशु की मां मरियम का भजन)के उत्सव को इसके अहाते में सैलीब्रेट किया था। इस ऐतिहासिक स्थल की भव्यता और सुन्दरता को देखने का एक अपना ही आंनद है। हां, इस बात को आप ज़रूर ख्याल रखें कि यहां का गार्डन घुमे बिना यहां की यात्रा अधुरी ही रह जाएगी। यह प्रसिद्ध गार्डन इसके पूर्व में स्थित है। यहां पर बहने वाली नदी की सुन्दरता और उसका प्राकृतिक दृश्य काफी मनोरम है। जहां पहुंच कर प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत आंनद लिया जा सकता है। कैथेड्रल के सामने एक प्रसिद्ध संगहालय द क्रयपते अर्चेवलॉगिकुए भी है, जहां पर रोम के समय का ऐतिहासिक तथ्यों का अनूठा संग्रह देखने को मिल जाता है। नोट्रे दम के पश्चिमी दरवाजा जिसे किलोमीटर जीरों के नाम से जाना जाता है। यहां की सुन्दरता देखते ही बनती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे फ्रांस की मुख्य सड़कों की दूरी यहां से निर्धारित किए जाते हैं। यहां का आइल दे ला साइट बहुत प्रसिद्ध है। यह काउंटी के हृदयस्थली के रूप में स्थित है। यहां पर चहल-पहल और मानवीय गतिविधियों के उमंग-तरंग देखते ही बनती है।

शैटो दे वेर्साई

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यह प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। यहां पहुंचने के लिए आधे घंटे तक करीब ट्रेन से सफर करनी होती है। वेर्साई का महल यूरोप में सबसे बड़ा महल है। इसका फ्लोर स्पेस करीब 51,210 स्क्वेयर मीटर है। महल में लगे खिड़कियों की संख्या 2,153 है। महल में 700 कक्ष हैं। सीढिय़ों की संख्या 67 है। यहां पर भव्य संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में छह हज़ार से ज्यादा दुलर्भ पैटिंग्स हैं, जो फ्रांस के इतिहास के रूपों को बारिकी से प्रस्तुत करता है। यहां पर १1500 ड्रायिंग्स हैं, जो फ्रांस के सभ्यता और संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरती है । यहां पर 15 हज़ार से ज्यादा नक्काशीदार चित्रों का अनूठा संग्रह है। संग्रहालय में 2000 से ज्यादा शिल्पकृतियों का संग्रह भी है। यहां पर 5000 से भी ज्यादा की संख्या में बेमिसाल कला संग्रह वस्तुएं हैं, जो फ्रांस के अतीत से वर्तमान तक की जि़दगी के कई रूपों को बारिकी से प्रस्तुत करती है। यह लुई 16 वें शासन काल तक फ्रांस के राजसत्ता का प्रतीक के रूप में रहा है। फ्रांस की क्रान्ति 1789  के बाद इसकी चमक फिकी पड़ गई। फ्रांस के राजतंत्र का संचालन यहां से किया जाता था। पैलेस ऑफ वेर्साई की नकल 18 वीं शताब्दी के यूरोप में राजकीय शासन तंत्र के राजाओं ने कई बार की थी। यहां पर स्थित पार्क अपनी भव्यता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां पहुंच कर पार्क में घुमना आपको सुनहरी दुनिया से रूबरू होने का मौका प्रदान करता है। खासकर, यहां का ग्रैनड्स ओक्स म्यूजि़कल्स की दुनिया आपको संगीत के तराने से तरोताजा करने की क्षमता रखता है। पानी के फाउंटेन की थीम पर आधारित म्यूजि़क शो काफी प्रसिद्ध है। पार्क का गृहमुख के सामने 70 मीटर की हॉल ऑफ मीरर है। इसकी भव्यता और सुन्दरता देखते ही बनती है। यहां पर राजा और रानी की विलासिता से पूर्ण घर है। यह घर में फ्रांस की क्लासिकल आर्किटेक्ट का सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
यहां पर आप चाहेंगे कि एक दिन में पूरा महल भ्रमण कर लें तो संभव नहीं है। इसे देखने के लिए आपको पूरी प्लानिंग करनी होगी, वह भी समय के साथ। इसलिए बेहतर यह है कि इस महल को देखने जाने से पूर्व समय का ख्याल रखें।
नेशनल स्टेडियम फ्रांस

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यह सिटी ऑफ पेरिस का प्रमुख स्टेडियम है। इसका निर्माण 1998 के विश्व वल्र्ड कप के आयोजन के तत्वाधान में किया गया था। यह मास्टरपीस टेक्नोलॉजी स्टेडियम में करीब 80 हज़ार दर्शकों की बैठने की क्षमता है। फ्रांस के महत्वपूर्ण स्र्पोट्स इवेंट का आयोजन का गवाह स्टेडियम बन चुका है। खासकर, विश्व कप फुटबॉल, फुटबॉल सॉकर, रगबी, एथलेटिक्स जैसे महत्वपूर्ण खेलों का आयोजन के समय इसका शबाब देखते ही बनता है। स्टेडियम का डिज़ाइन प्रसिद्ध आर्किटेक्ट मकारी जुबेलेना ने तैयार किया था। यहां पर प्रत्येक साल विभिन्न इवेंट को देखने करीब 18 लाख दर्शक आते हैं। स्टेडियम में नामी-गिरामी कंपनी पीआर इवेंट, कॉन्फ्रेंस, मीटिंग और ट्रेड एग्जि़बिशन्स और सेमीनार का आयोजन भी करती है। यहां पर कई प्रमुख शॉपिंग एरिया और रेस्तरां भी है, जहां पर आप खरीदरारी और विभिन्न व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं। कुल मिलाकर यह स्टेडियम पर्यटकों के लिए आकर्षण के केन्द्र में है, जहां पर पर्यटकों को खेल की दुनिया के रंगतों से रूबरू होने के साथ-साथ यहां पर शॉपिंग और विभिन्न देशों के डीश खाने का मौका मिलता है।

पॉम्पिडोयू सेंटर

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यह सिटी ऑफ पेरिस का महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल है। यह पैरिस के चौथे एरोनडिसमेंट के ब्यूबोर्ग क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध कॉम्लैक्स है। पॉम्पिडोयू सेंटर हाइटेक व शानदार आर्किटेक्ट से सुसज्जित बेहतर निर्माण है, जो अपनी चमक से यहां की दुनिया को भव्य अंदाज़ देता है। सेंटर में मॉडर्न आर्ट कई विलक्षण वस्तुओं का संग्रह भी है। यहां का सिनेमा , संगीत समारोह और बच्चों पर आधारित कार्यक्रम काफी खास होता है। इन कार्यक्रमों से यहां का समां काफी रंगीन हो जाता है। पॉम्पिडोयू सेंटर पांच फ्लोर्स में बंटा हुआ है। यहां के पांचवें फ्लोर ज्यादातर समय प्रसिद्ध एग्जि़बिशन्स लगते हैं। तीसरे और चौथे फ्लोर पर संगीत की दुनिया का रंग-रूप देखते ही बनता है। तीसरे फ्लोर पर पब्लिक लाइब्रेरी भी स्थित है। इसमें दुनियाभर के प्रसिद्ध लेखकों की नायाब पुस्तकों का संग्रह है। यहां पर संगीत रिसर्च केन्द्र है। रिसर्च केन्द्र में आपको प्रसिद्ध वीडियो का संग्रह, माइक्रोफिल्मस, विडियो डिस्क और मूवी थियेटर से सम्बन्धित जानकारी ले सकते हैं। खासकर, प्रथम फ्लोर पर मूवि थियेटर का प्रोग्राम स्पेशल थीम पर आधारित होता है, तो इस स्थान का शबाब देखते ही बनता है। यहां के एस्क्लेटर पर राइडिंग करने का अपना ही विशेष महत्व है। यहां से पेरिस का नयनाभिराम दृश्य देखने का अपना एक अलग ही आनंद है। इसका नाम जॉर्ज पोम्पिडोयू जो फ्रांस के राष्ट्रपति थे, के नाम पर रखा गया है। इसे औपचारिक रूप से आम जनता के लिए वर्ष 1974 में खोला गया। तब से अब तक यहां पर 150 मिलियन से भी ज्यादा विजिटर आ चुके हैं।

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