पानी की निकासी पर दिशाओं का प्रभाव

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By-कुलदीप सलुजा, वास्तु गुरु

घर छोटा हो या बड़ा उसमें जल की निकासी की व्यवस्था करना आवश्यक होता है। दैनिक दिनचर्या जैसे नहाने, कपड़े धोने, बर्तन साफ करने इत्यादि कार्यों में पानी के उपयोग के उपरांत निकले व्यर्थ जल की निकासी के लिए नाली अर्थात् ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था की जाती है। बरसाती पानी के निकासी के लिए भी यह आवश्यक है। जल निकासी की व्यवस्था सामान्यत: घर के फर्श के अनुरूप या सार्वजनिक नाली के अनुरूप की जाती है। विभिन्न दिशाओं में घर के पानी की निकासी का प्रभाव इस प्रकार पड़ता है-
-जिस घर का व्यर्थ पानी ईशान की ओर से बहकर बाहर की ओर जाता तो यह स्थिति वैभव एवं संतान वृद्धि कराती है।
-जिस घर का पानी पूरब की ओर से बाहर बह जाता है तो वह स्वास्थ्यवर्धक एवं घर के पुरुषों के लिए शुभ होता है।
-जिस घर का पानी आग्नेय से बाहर की ओर से बहकर बाहर जाता तो यह पुत्र संतान के लिए अशुभ होता है।
-जिस घर का पानी दक्षिण की ओर से बहकर बाहर जाता तो वह घर की स्त्रियों के लिए अशुभ होता है।
-जिस घर का पानी नैगत्य की ओर से बाहर बह जाता तो यह परिवार के सदस्यों को मृत्युतुल्य कष्ट देता है।
-जिस घर का पानी पश्चिम की ओर से बाहर बह जाता तो वह परिवार के ऐश्वर्य को नष्ट होगा।
– वास्तुशास्त्र के अनुसार टॉयलेट में कमोड की बैठक इस प्रकार रखनी चाहिए कि बैठने वाले का मुँह उत्तर की ओर पीठ दक्षिण दिशा की ओर हो, किन्तु वर्षों के मेरे अनुभव के आधार पर मैंने पाया है कि कमोड पर पूर्व दिशा की ओर मुँह और पश्चिम की ओर पीठ करके बैठने से कोई हानि नहीं होती, जबकि इसके विपरीत पश्चिम दिशा की ओर मुँह और पूर्व दिशा की ओर पीठ करके बैठना ना तो शुभ होता है और ना ही वास्तु सम्मत होता है। टॉयलेट का निकलने वाला गंदा पानी उत्तर या पूर्व दिशा से निकलना शुभ होता है। प्रयास करना चाहिए कि यह गंदा पानी ईशान कोण से ना निकले। कभी भी घर के टॉयलेट, बाथरूम, किचन इत्यादि के पानी की निकासी दक्षिण या पश्चिम दिशा से बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। नहाने के लिए बॉथरूम बनाने का सबसे अच्छा स्थान उत्तर या पूर्व दिशा होती है। जरूरत पडऩे पर बाकी दिशाओं में भी बनाए जा सकते हैं, जहां पानी के नल व शॉवर उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं। बाथरूम में गीजर आग्नेय कोण में ही लगाएँ। बाथरूम के पानी की निकासी भी उत्तर या पूर्व दिशा की ओर से होना चाहिए। बाथरूम में तेल, साबुन, शैम्पू, टॉवेल, झाडू़, ब्रश इत्यादि रखने के लिए आलमारी बाथरूम की दक्षिण या पश्चिम दिशा में बनानी चाहिए। आजकल आधुनिक घरों में हर बेडरूम के साथ एक से अधिक टॉयलेट एवं बाथरूम बनाने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। भवन बनाते समय ध्यान रहे कि मुख्य द्वार के सामने या दांए-बांए टॉयलेट का दरवाजा खुलना अशुभ होता है और इससे नकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में फैलती है। टॉयलेट में कमोड के ऊपर लटकता बीम या टांड नहीं होनी चाहिए। बाथरूम में एक दर्पण अवश्य लगाना चाहिए।
-आजकल टॉयलेट, बाथरूम बहुत ज्यादा सजाने का फैशन चल रहा है। फेंगशुई के अनुसार टॉयलेट ज्यादा सजाने से मकान में एकत्रित सकारात्मक ऊर्जा फ्लश हो जाती है। इसलिए टॉयलेट बाथरूम को ज्यादा सजाना वास्तु सम्मत नहीं है। यूं तो वास्तुशास्त्र एवं फेंगशुई दोनों के ही प्राचीन ग्रन्थों में घर के अंदर टॉयलेट को निषेध किया गया है। इसके विपरीत बाथरूम को घर के अंदर होना बहुत शुभ माना गया है। केवल उत्तर और पूर्व दिशा में, परन्तु आज की जीवन-शैली में छोटे से मकान में भी तीन-तीन चार-चार टॉयलेट बाथरूम होते हैं। ऐसे में टॉयलेट, बाथरूम बनाते समय कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें।
उत्तर और पूर्व दिशा में प्लेटफॉर्म बनाकर भारतीय शैली का कमोड़ ना लगाएं। इससे उत्तर और पूर्व दिशा ऊंची हो जाती है जो कि महत्वपूर्ण वास्तुदोष होता है। इन दिशाओं में वेस्टर्न स्टाइल के कमोड लगाना चाहिए, जिससे बाथरूम के फर्श का लेवल घर के फर्श के लेवल से ऊंचा नहीं होता।
दक्षिण और पश्चिम दिशा में प्लेटफॉर्म बनाकर भारतीय शैली का कमोड लगा सकते हैं, परन्तु प्रयास करें कि, यह प्लेटफॉर्म बहुत ऊंचा ना बने।
उत्तर व पूर्व दिशा स्थित टॉयलेट बाथरूम के फर्श का लेवल घर के फर्श से थोड़ा नीचा रख सकते हैं ताकि बाथरूम से पानी घर के कमरों में ना आए, जबकि दक्षिण व पश्चिम दिशा में बने टॉयलेट बाथरूम के फर्श का लेवल घर के फर्श के लेवल के बराबर ही रखे और पानी बाहर ना इसके लिए बाथरूम के दरवाजे पर पत्थर का राईजर लगा दें।
सामान्यत: सभी वास्तुविद् नैऋत्य कोण में टॉयलेट-बाथरूम को वास्तु सम्मत ना मानते हुए उसका विरोध करते हैं। व्यावहारिक अनुभव में आया है कि नैऋत्य कोण में भी टॉयलेट, बाथरूम बनाया जा सकता है, परन्तु यहाँ टॉयलेट, बाथरूम बनाते समय एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि, टॉयलेट, बाथरूम के फर्श लेवल बाकी घर के फर्श के लेवल से एक सूत भी नीचा नहीं होना चाहिए और न ही इस कोण में भवन के अंदर या बाहर पानी की निकासी के लिए कोई चेम्बर नहीं बनाना चाहिए।
एक भ्रामक धारणा यह भी है कि सीढिय़ों के नीचे टॉयलेट नहीं बनाना चाहिए। प्राचीन ग्रन्थों में तो इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, परन्तु वर्षों के वास्तु परामर्श के दौरान अनुभव में आया है कि सीढ़ी के नीचे टॉयलेट, बाथरूम होने से कोई वास्तुदोष उत्पन्न नहीं होता है। मैंने ऐसे कई परिवार सुखी एवं समृद्धशाली परिवार देखे हैं, जिनके यहाँ वर्षों से सीढ़ी के नीचे टॉयलेट, बाथरूम हैं। मेरे यहाँ भी पिछले 50 वर्षों से एक टॉयलेट, बाथरूम सीढी के नीचे बना हुआ है।

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