स्वस्थ और प्रसन्न रखता वास्तु अनुकूल बगीचा

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हमारे जीवन में बगीचा का स्थान महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ तन-मन स्वस्थ रखने में इसकी भूमिका काफी अहम् है। इससे वातावरण स्वच्छ और सुवासित रहता है। तन-मन को तंदुरूस्त रखने में इसका विशेष योगदान होता है। लेकिन आप इस बगीचा को वास्तु के अनुकूल नहीं लगाएं तो स्वास्थ्य पर इसका विपरित प्रभाव भी रहता है। वास्तु गुरू कुलदीप सलुजा बता रहे हैं कि कैसे आप बगीचा को वास्तु के अनुकूल रखकर जीवन में खुशी और समृद्धि ला सकते हैं।
पेड़-पौधे से घर के सौंदर्य में निखार
हरियाली आंखों को अच्छी लगती है और मन को प्रसन्न करती है। बाग-बगीचे, पेड़-पौधे किसी भी घर के सौंदर्य को और उस घर में रहने वालों को प्रसन्नता प्रदान तो करते हैं, साथ ही पेड़-पौधे, वायु और वातावरण को शुद्ध करते हैं। यह मंं स्वस्थ एवं प्रसन्न रखते हुए स्फूर्तिदायक वातावरण भी प्रदान करते हैं। घर के आंगन में सुंदर और सुगन्धित फूलों के पौधे हो तो माना जाता है कि स्वास्थ्य की देवी को पुष्प अर्पित किए जा रहे हैं। यदि घर के पीछे इस तरह के पौधे हों तो वह भी बहुत शुभ होता है। ऐसे ही जैसे महिलाएं सिर के पिछले भाग में गजरा सजाकर सुंदर दिखती हैं एवं प्रसन्न होती हैं। प्राणियों का वृक्षों के साथ सह- अस्तित्व है। हमें जीने के लिए ऑक्सीजन की ज़रुरत होती है। ऑक्सीजन से हमारा रक्त शुद्ध होता है, इसलिए हम ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और ज़हर रूपी कार्बन-डाई-ऑक्साइड छोड़ते हैं। वृक्ष हमारे द्वारा छोड़ी गई ज़हर रूपी कार्बन-डाई-ऑक्साइड को अपने भीतर लेते हैं। यह पूरी प्रक्रिया एक आपसी सहयोग है। न तो मनुष्य वृक्षों के बिना रह सकता है औैर न वृक्ष मनुष्य के बिना रह सकते हैं। दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं।
पौधों को लगाते समय दिशा ज्ञान ज़रूरी
पौधों को लगाते समय उनको उचित दिशा में लगाना अत्यंत ज़रूरी होता है। ध्यान रहे भवन के उत्तर, ईशान और पूर्व दिशा में छोटे-छोटे पौधे लगाने चाहिए, ताकि इन भवनों पर पडऩे वाली प्रात: कालीन सूर्य की जीवनदायी किरणें बाधित न हों। हमें इन किरणों से मिलने वाली जीवनदायी ऊर्जा एवं विटामिन-ए और डी का लाभ मिल सके। विशाल वृक्ष दक्षिण, नैऋत्य व पश्चिम दिशाओं में लगाए जा सकते हैं, ताकि वे भवन पर पडऩे वाली दोपहर के पश्चात की गर्मी व सूर्य की हानिकारक किरणों से बचा जा सके।
ये हैं खास बात जिसे जानना है ज़रूरी
-घर के सामने के बगीचे को सुंदर और अच्छे तरीके से लगाना चाहिए। यदि बगीचे में झाड़ या झाडिय़ां बेतरतीबी से उगे हुए हों, तो उस घर के लोगों की मानसिक कमज़ोरी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे घरों में रहने वाले अपने मित्रों की चालाकियों से परेशान रहते हैं और गलत लोगों के संपर्क में आते हैं।
-जिन घरों के अंदर पेड़ों की शाखाएं, खिड़की, बरामदे से घरों के अंदर आती हैं, ऐसे घरों में रहने वाले पति-पत्नी में तालमेल का अभाव रहता है। घरवाली को मानसिक अशांति रहती है और पत्नी का स्वास्थ्य खराब रहता है।
-यदि टी-जंक्शन पर स्थित घरों में घर के अंदर झाड़ लगे हों और झाड़ों के पास पानी का कोई आउटलेट हो, बाथरूम हो तो यह दर्शाता है कि उस स्त्री का अपने पति के साथ संबन्ध सरल नहीं है, जबकि वह अपने फ्रेंड सर्कल से बहुत अच्छा संबन्ध रखती है।
-घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दाएं-बाएं सुंदर फूलों के गमले रखने चाहिए। यह भवन में प्रवेश करने वाली ऊर्जा को और अधिक सकारात्मक बनाते हैं। जो आपकी प्रसिद्धि को बढ़ाने में बहुत सहयोग देते हैं। ध्यान रहे यह पौधे चौड़ी पत्तियों वाले ही हों, पौधे कांटेदार या नुकीली पत्तियों वाले नहीं होने चाहिए।
-भवन के आसपास बेल का उगना इसलिए अशुभ माना जाता है, क्योंकि इन्हीं बेलों के सहारे चढ़कर कई प्रकार के जीव-जंतु जैसे- सांप, बिच्छु, रेंगने वाले कीड़े इत्यादि ज़हरीले जंतु घर में घुस जाते हैं, जिससे कि वहां रहने वाले लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अत: इस कारण इन्हें अशुभ माना जाता है।
-दूध वाले वृक्षों का भी घर के आसपास उगना काफी अशुभ माना जाता है, क्योंकि अधिकतर पेड़ों से निकलने वाला दूध ज़हरीला होता है। ऐसे पेड़-पौधों का दूध आंखों में चला जाए तो आंखें खराब हो जाती हैं और कई बार आंखों की रोशनी तक चली जाती है।
ध्यान रहे बेडरूम के अंदर कभी भी पौधे नहीं रखने चाहिए, क्योंकि यह पौधे रात को कार्बन-डाई-ऑक्साइड छोड़ते हैं। इस कारण ऐसे बेडरूम में सोने वालों का स्वास्थ्य खराब होता है।

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