गहराई से जानिये होम इंश्योरेंस की दुनिया को

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होम इंश्योरेंस वर्तमान में काफी मायने रखता है। जिस प्रकार से वर्तमान में संयुक्त परिवार के कॉन्सेप्ट धीमा पड़ रहा है। न्यूक्लियर फैमली जोर पकड़ रहा है। साथ ही बढ़ती महंगाई के असर ने आर्थिक स्थिति की दुनिया को काफी हद तक बदल कर रख दिया। हर महीने कुछ बचत करने की आदत से आप एक अदद आशियाने के सपने को साकार कर पाते हैं। सामाजिक स्वरूप के बदलते व्यवहार और प्राकृतिक घटनाओं से हुए नुकसान आदमी को अन्दर तक हिला देता है। भावनाओं के नुकसान की भरपाई तो कोई नहीं करता, लेकिन ऐसे में होम इंश्योरेंस कुछ हद तक राहत ज़रूर देता है। इंश्योरेंस की सभी शाखाओं में होम इंश्योरेंस सबसे कम प्रचलन में है। बीमा क्षेत्र में निजी कम्पनियों की दस्तक के बाद इस क्षेत्र का परिदृश्य बहुत बदला है। लेकिन आपको होम इंश्योरेंस के बारे में भी पूरी जानकारी रखना चाहिए। इसके बारे में जब तक आपको विस्तृत जानकारी नहीं हो तो आप उलझन में भी रह सकते हैं। यहां पर आपको हम होम इंश्योरेंस के कई महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तृत रूप से बताने जा रहे हैं।

अगर आप पॉलिसी एक साल की जगह की पांच साल की अवधि के लिए लेते हैं तो कंपनियां प्रीमियम पर 15 प्रतिशत तक का डिस्काउंट देती हैं। यह और अधिक सस्ती हो सकती है अगर आप अपनी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के जरिए इसे लेते हैं। होम इंश्योरेंस लेकर आप कई तरह की चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। लेकिन पॉलिसी लेने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि कंपनियां किन हालात में क्लेम नहीं देती हैं। जैसे आपने अपने पैतृक घर के लिए हाउस होल्डर्स इंश्योरेंस पॉलिसी ली है। और किसी स्थान पर आपका घर खाली पड़ा रहता है। आप भले ही छुट्टियों में कुछ दिनों के लिए वहां जाते हैं। शायद यह बात आपको नहीं मालूम हो कि अगर आपके घर में सेंधमारी की वारदात हो गई तो उनकी बीमा कंपनी, जो एक जानी-मानी निजी साधारण बीमा कंपनी है, क्लेम का भुगतान नहीं करेगी, क्योंकि अगर बीमित प्रॉपर्टी लगातार 30 दिनों से अधिक समय तक खाली रहती है तो बीमा कंपनी ऐसे मामले में क्लेम का भुगतान नहीं करेगी। अधिकांश साधारण बीमा कंपनियां इसे एक्सक्लुजन में रखती हैं। इसलिए, घर का बीमा करवाने से पहले यह जानना जरूरी है कि क्लेम का भुगतान किन-किन हालातों में नहीं किया जाएगा और पॉलिसी के एक्सक्लुजंस क्या-क्या हैं।

एक्सक्लुजंस की समझ
बीमा लेने वाले को एक्सक्लुजंस को समझना ज़रूरी होता है यानि कि पॉलिसी में क्या शामिल किया गया है और क्या नहीं और किन-किन हालातों में आपको क्लेम का भुगतान नहीं दिया जाएगा। इसे आपको ध्यान से समझ लेना बहुत ज़रूरी है। किन-किन स्थिति में ऐसी पॉलिसियों के तहत किन हालातों में बीमा कंपनियां लॉस व डैमेज की भरपाई नहीं करती। इसके महत्वपूर्ण बात को नीचे बताया जा रहा है। आपके घर में सेंधमारी की वारदात हुई और इस वारदात में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आपके नौकर/ नौकरानी का हाथ है। तब इस तरह के हालातों में कुछ कंपनियां आपको क्लेम का भुगतान नहीं करेंगी। आपके घर को हुए नुकसान की भरपाई करने में होम इंश्योरेंस पॉलिसी तब भी नाकामयाब रहेगी जब आपका घर 30 दिन से ज्यादा खाली पड़ा रहे और आपने इस बारे में बीमा कंपनी को सूचित नहीं किया। यदि आवासीय परिसर का इस्तेमाल कारोबारी उद्देश्य से किया जाता है तो अधिकांश बीमा कंपनियां उसके लिए होम इंश्योरेंस पॉलिसी देती ही नहीं। इस क्षेत्र के जानकार का कहना है कि होम इंश्योरेंस पॉलिसी या हाउस होल्डर्स इंश्योरेंस पॉलिसी में नकद रकम, शेयर सर्टिफिकेट, बांड और मोटर-कार आदि शामिल नहीं होते हैं। प्रत्येक होम इंश्योरेंस लेने वाले ग्राहक को इन एक्सक्लुजंस को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
सावधानी में है भलाई
जानकारों का कहना है कि पॉलिसी डॉक्यूमेंट में अत्यंत छोटे अक्षरों में छपी सूचनाओं को ज़रूर पढ़ें। सरकारी सामान्य बीमा कंपनियों की होम इंश्योरेंस पॉलिसी एक बेहतर पॉलिसी मानी जाती है। सरकारी बीमा कंपनियों की पॉलिसियों में खास सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे फायर एंड उससे जुड़ी घटनाएं, बर्गलरी, ऑल रिस्क-जेवरात व मूल्यवान वस्तुएं, प्लेट ग्लास,, वीसीपी, वीसीपी समेत टीवी व अन्य घरेलू उपकरणों का खराब होना, साइकिल, बैगेज इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट व पब्लिक लाइबिलिटी आदि।
ढांचे की रिइंन्वेस्टमेंट वैल्यू बीमा
ध्यान रहे कि होम इंश्योरेंस पॉलिसी किसी मकान के ढांचे की रिइन्वेस्टेटमेंट वैल्यू का बीमा करती है, उसकी बाजार वैल्यू का नहीं। ढांचे की रिइन्वेस्टेटमेंट वैल्यू से मतलब है कि डैमेज की स्थिति में मकान को फिर से उसी तरह बनाने में होने वाला खर्च। जबकि बाज़ार वैल्यू में ज़मीन की कीमत, कंस्ट्रक्शन की लागत और वहां की लोकेशन के अनुसार मूल्य शामिल होता है। ध्यान रहे कि अगर इलाका महंगा है तो वहां ज्यादा खर्च होता है।

सिंपल कवर भी हैं उपलब्ध
अगर आप सिंपल कवर चाहते हैं तो जनरल इंश्योरेंस कंपनियों की फायर एंड एलाइड पेरिल्स पॉलिसी लें। यह योजना मकान के ढांचे व इसकी सारी सामग्री को भूकंप, आग, बाढ़, दंगा, हड़ताल, आतंकवाद, बिजली-आंधी-तूफान समेत अन्य जोखिम के खिलाफ सुरक्षा देती है।
मल्टीपल कवर पर डिस्काउंट
आप मल्टीपल कवर से प्रीमियम में डिस्काउंट भी हासिल कर सकते हैं। इसके बाद अन्य कवर हैं जिन्हें आप अपनी इच्छानुसार ले सकते हैं। जैसे कवर अगेंस्ट बर्गलरी से लेकर थर्ड पार्टी लाइबिलिटी कवर तक। इससे आपका प्रीमियम बढ़ता जाएगा, इतना ध्यान रखें। लेकिन यदि मल्टीपल कवर लेते हैं तो बीमा कंपनियां प्रीमियम में छूट भी देती हैं।
बीमा कवर की गणना
होम इंश्योरेंस पॉलिसी में सम एश्योर्ड यानि बीमा के कवर की राशि घर के बिल्ट-अप एरिया को प्रति वर्ग फीट कंस्ट्रक्शन कॉस्ट से गुणा कर निकाला जाता है। यानी यदि किसी घर का बिल्ट-अप एरिया 1000 फीट व कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 800 रुपए प्रति वर्ग फीट है तो उस घर के ढांचे का सम इंश्योर्ड 8 लाख रुपये होगा। ध्यान रहे कि कंस्ट्रक्शन कॉस्ट लोकेशन, फर्श बनाने में उपयोग किए गए सामान व घर के बाहर लॉन/ गार्डेन की मौजूदगी पर निर्भर होता है। और प्रत्येक बीमा कंपनी ने इसे अपने तरीके से तय किया है।

सोसायटी के जरिये पॉलिसी पड़ती है सस्ती
किसी महानगर में 19 लाख रुपए की होम इंश्योरेंस पॉलिसी का सालाना प्रीमियम 2912 रुपये से 6949 रुपये के बीच होगा। इसमें ढांचे के साथ-साथ घर के अंदर के पांच लाख रुपये कीमत की वस्तुएं जिसमें एक लाख रुपये की ज्वैलरी भी शामिल है। अगर आप पॉलिसी एक साल की जगह की पांच साल की अवधि के लिए लेते हैं तो कंपनियां प्रीमियम पर 15 प्रतिशत तक का डिस्काउंट देती हैं। यह सस्ती भी हो सकती है अगर आप अपनी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के जरिए इसे लेते हैं। यानि यदि सोसाइटी ने पहले ही बिल्डिंग के पूरे ढांचे की बीमा करा लिया है तो आप सिर्फ अपने घर के सामानों का ही बीमा कराएं। और इस प्रकार आप प्रीमियम में अच्छी खासी बचत कर सकते हैं। घर का बीमा करवा कर आप कई तरह की चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं।

बीमा कवर की गणना
होम इंश्योरेंस पॉलिसी में सम एश्योर्ड यानि बीमा के कवर की राशि घर के बिल्ट-अप एरिया को प्रति वर्ग फीट कंस्ट्रक्शन कॉस्ट से गुणा कर निकाला जाता है। यानी यदि किसी घर का बिल्ट-अप एरिया 1000 फीट व कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 800 रुपए प्रति वर्ग फीट है तो उस घर के ढांचे का सम इंश्योर्ड 8 लाख रुपये होगा। ध्यान रहे कि कंस्ट्रक्शन कॉस्ट लोकेशन, फर्श बनाने में उपयोग किए गए सामान व घर के बाहर लॉन/ गार्डेन की मौजूदगी पर निर्भर होता है। और प्रत्येक बीमा कंपनी ने इसे अपने तरीके से तय किया है

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