झारखंड सरकार की पहल से उभर रहा है रांची रियल एस्टेट का बाजार

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नवीन सिंह,  रांची

प्रदेश निर्माण के बाद से सभी पूर्ववर्ती सरकार अस्थिर राजनीति की शिकार रही। सभी सरकारें अपना वजूद बचाने में ही लगी रहीं। नतीजा हुआ कि अफसर बेलगाम हो गए। मंत्री से लेकर संतरी तक आकंठ भ्रष्टाचार में गोता लगाते नजर आये। भ्रष्टाचार अपने चरम पर रहा। जिन पर आधारभूत संरचनाओं के विकास की जिम्मेवारी थी, उनका ध्यान राजनीति की उठा—पटक पर ज्यादा रहा। इस अवधि में अगर सबसे ज्यादा किसी उघोग का नुकसान हुआ तो वह है रियल एस्टेट उघोग। कारण बिना चढ़ावा का हर काम नामुमकिन नजर आता था। अगर बात राजधानी रांची की किया जाय तो चाहे नक्शा पास कराने का मामला हो या फिर निर्माण के दौरान विभागीय निगरानी की बात, रियलेटर या निजी मकान मालिक आरआरडीए और नगर निगम अधिकारियों की लेट—लतीफी का शिकार थे। विभाग द्वारा कर्मियों की कमी का बहाना बनाकर काम को जानबूझ कर लटकाया जाता रहा था। बिजली, पानी के कनेक्शन में भी बिना चढ़ावा चढ़ाये बात बनती नजर नही आती थी। यही वजह था कि प्रदेश में रियल एस्टेट उघोग धीमी गति से अपने बलबूते बढ़ता नजर आ रहा था। जितना विकास रांची का पिछले 15 वर्षों में होना चाहिए था शायद उतना नहीं हो पाया।

सरकार की पहल
अभी प्रदेश में रघुवर दास के नेतृत्व वाली भाजपा की बहुमत की सरकार है। मुख्यमंत्री ने रांची के विधायक सीपी सिंह को नगर विकास का जिम्मा दिया। मंत्री बनते ही श्री सिंह ने सबसे पहले बेलगाम नगर निगम पर लगाम कसना शुरू किया। एक—एक कर भ्रष्ट अधिकारी बेपर्दा हो रहे हैं। साथ ही श्री सिंह ने निगम के कार्य प्रक्रिया में फेरबदल करते हुए रियलेटरों व आमजनों के लिए सुगम प्रक्रिया बनाकर बदलाव और विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाना शुरू कर दिया है। अबतक रियलेटरों के लिए सबसे परेशानी का सबब रहा है। जिसका तकसीद रियल एस्टेट से जुड़े सभी लोग करेगें। पहले जहां नक्शा पास कराने में नगर निगम में महीनों लगते थे, अब रांची नगर निगम के सीइओ प्रशांत कुमार ने नक्शा पास करने के नियम प्रक्रिया में फेरबदल करते हुए आसान बनाने की कोशिश किया है। अब रांची नगर निगम में 46 दिनों में छोटे नक्शों की स्वीकृति दी जायेगी, वहीं बड़े नक्शों (बहुमंजली इमारतों का) को पास करने में 51 दिनों का समय लगेगा। सीइओ ने इसके लिए कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, टॉउन प्लानर से लेकर डिप्टी सीइओ तक के लिए समय का निर्धारण किया है। सीइओ द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार छोटे नक्शों का निपटारा अपर नगर आयुक्त करेंगें वहीं बड़े नक्शों की फाइल निगम सीइओ के पास जायेगी।

रियल एस्टेट के लिए बेहतर

नगर विकास विभाग के इस पहल पर रियल एस्टेट से जुड़े तमाम लोगों ने खुशी जाहिर किया है। परंतु अभी यह पहल सिर्फ नगर निगम में लागू किया गया है। जो निगम क्षेत्र के अंदर सभी छोटे व बहुमंजली इमारतों के निर्माण में लागू होगा। वहीं निगम क्षेत्र के बाहर का एरिया आरआरडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है। जहां आज भी परेशानी जस का तस बना हुआ है। राजधानी बनने के बाद एक बहुत बड़ी आबादी रांची में बस रही है या फिर बसने के लिए तैयार है। अधिकतर निर्माण कार्य शहर के रिंग रोड के आसपास के क्षेत्रों में जारी है। जिसका नक्शा पास करने का अधिकार आरआरडीए के पास है।यहां कई नक्शों की फाइलेें पिछले दो से अधिक वर्षों से धूल फांक रही है। प्राधिकरण में कर्मियों की कमी साफ तौर पर देखी जा सकती है। सिर्फ यहां चेयरमैन और सेक्रेटरी ही नजर आते हैं। कोई इंजीनियर नही है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्राधिकरण नक्शे का निपटारा कैसे करेगा। जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।

प्रतिक्रिया

एसआर कंसट्रक्शन के सीएमडी रिजवान खान कहते हैं कि आज की तारीख में आरआरडीए बंद होने के कगार पर खड़ा है। यहां पिछले डेढ़ साल से कोई नक्शा ही जमा नही हुआ है। वहीं अंचल कार्यालयों में कर्मियों की कमी के कारण जमीन जांच में समस्या उत्पन्न होती है। उसके बाद रजिस्ट्री, म्यूटेशन आदि में इतना समय लग जाता है कि जो प्रोजेक्ट दो से तीन सालों में पूरी हो जानी चाहिए थी उसमें पांच से सात वर्ष लग जाते हैं। प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद रॉ मेटेरियल की प्रॉब्लम आती है। पिछले कई महीनों से बालू(रेत) का सरकारी दर निर्धारित न होने के कारण 1500—2000 रूपये में मिलने वाला बालू 4000—5000 प्रति ट्रक बिक रहा था। रघुवर सरकार ने बालू(रेत) का सरकारी दर निर्धारित कर रियलेटरों को बहुत बड़ा राहत पंहुचाई है। बहुमत की सरकार है आनेवाला समय में दशा व दिशा दोनो बदलने की उम्मीद है। वहीं साई होम के सीएमडी अजय कुमार गुप्ता का मानना है कि सबसे ज्यादा रांची में रियल एस्टेट को समय—समय पर हुए सरकारी नियमों में हुए बदलाव ने नुकसान पंहुचाया है। उन्होने बताया कि पूर्व में प्रखंड कार्यालय से नक्शे पास किये जाते थे। जिसे बाद में आरआरडीए व नगर निगम के अधीन कर दिया गया। पूर्व में पास किये गए नक्शे को आरआरडीए व नगर निगम के अधिकारियों ने मानने से इंकार कर दिया। कारण नक्शा पास करने के नियम मेें कई बदलाव किये गए। जिससे हुआ कि कई बहुमंजली इमारतें प्राधिकरण द्वारा अवैध घोषित कर दिये गए। जिससे बिल्डरों की बदनामी हुई। जो रियल एस्टेट उघोग के लिए एक आघात था। भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से पास हुए नक्शे व बने अपार्टमेंटों जो बाद में विवाद का कारण बना यह भी लोगों का बिल्डरों पर विश्वास नही करने का कारण बना। अब प्रदेश में नई सरकार है। उससे तो यही उम्मीद है कि जो जमीन बीच के वर्षों में रजिस्ट्री हुई उसका जल्द से जल्द म्यूटेशन किया जाय, पूर्व में पास किये गए नक्शे को रेग्युल्राइज किया जाय। वहीं विचलन आदि समस्याओं को शुद्धिकरण करते हुए रेग्युल्राइज किया जाय। अगर ऐसा होता है तो निश्चित रूप से राजधानी रांची सहित पूरे प्रदेश में रियल एस्टेट फिर से बूम करेगा और अच्छे लोग इस धंधे में आयेगें। सरकार ने इसकी शुरूआत कर दी है जो स्वागत योग्य है।

अच्छे दिन आने के संकेत

नक्शा पास करने की प्रक्रियाः निगम से मिली जानकारी के अनुसार सबसे पहले आवेदक अपने नक्शे को निगम काउंटर में सभी कागजातों(जिसमें मकान की निर्धारित राशि, भूखंड तक जानेवाली सड़क का ब्योरा, आर्किटेक्ट का मोबाइल नंबर) के साथ शपथ पत्र देगा। काउंटर प्रभारी उस फाइल पर बीसी नंबर अंकित कर उप प्रशासक/उप नगर आयुक्त के पास भेजेगा। उपप्रशासक/उप नगर आयुक्त पांच दिनों के अंदर अपने हस्ताक्षर करेगें। इसके बाद जांच के लिए विधि शाखा में भेजे जायेगें। यहां पांच दिनों में जांच पूरी करनी होगी। यहां से नक्शा टाउन प्लानर के पास भेजा जायेगा। यहां से नक्शे को तत्काल जेई के पास भेजा जायेगा। जेई एक सप्ताह में स्थल जांच कर रिपोर्ट देगें। फिर नक्शा सहायक अभियंता के पास भेजा जायेगा। यहां एक सप्ताह का समय लगेगा जिसमें सहायक अभियंता भवन प्लान की जांचकर, चेक लिस्ट तैयार कर टाउन प्लानर के समक्ष प्रस्तुत करेगें। अगले एक सप्ताह के भीतर टाउन प्लानर तमाम कागजातों की जांच कर व मंतव्य देकर उप प्रशासक/ उप नगर आयुक्त को प्रेषित करेगें। उप प्रशासक/उप नगर आयुक्त नक्शे की इस फाइल को पांच दिनो के भीतर अपर नगर आयुक्त को भेजेगें। अपर नगर आयुक्त इस नक्शे को पांच दिनों के भीतर निबटारा कर शर्त अनुपालन का आदेश पत्र जारी करेगें। अगर नक्शा बहुमंजिली इमारत का हुआ तो अपर नगर आयुक्त पांच दिनों के भीतर इसे सीइओ के पास भेजेगें। सीइओ इस नक्शे पर पांच दिनो के अंदर स्वीकृति देगें। इसके बाद उप प्रशासक/उप नगर आयुक्त आदेश पत्र जारी करेगें। सभी शर्तों के अनुपालन के बाद नक्शा शाखा के सहायक संबंधित कनीय व सहायक अभियंता की मुहर लगाकर पांच दिनों के भीतर टाउन प्लानर के समक्ष रखेगें। इसके बाद नगर निवेशक एवं उप प्रशासक/ उप नगर आयुक्त संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर इसे जारी करेगें।
यह सुधार हुआ है अबतक के जटिल नक्शा पास करने का आसान प्रक्रिया में तब्दीली का। इसके अलावा राज्य के आर्किटेक्टों को छोटा नक्शा स्वीकृत करने का अधिकार देने की भी बात हो रही है। नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने इसकी योजना बनाने का निर्देश दिया है। अगर ऐसा हुआ तो रांची नगर निगम में नक्शा निष्पादन में तेजी आयेगी जो अबतक काफी शिथिल था। जिसके कारण रियलेटरों सहित तमाम निजी मकान मालिकों को काफी परेशानी होती थी। जटिल नियम जहां भ्रष्टाचार के बढ़ावा का कारण बना हुआ था वहीं इन सुधारों से निश्चित रूप से रियल एस्टेट उघोग में तेजी आयेगी साथ ही भ्रष्टाचार पर लगाम भी लगेगा। नई सरकार है और नई उम्मीद भी। जिस युद्धस्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाते हुए तमाम आधारभूत संरचनाओं के विकास में आमूल—चुल बदलाव किये जा रहे हैं, निश्चित रूप से अच्छे दिन आने के संकेत हैं।

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