मेट्रो परियोजना से विकास को लगे पर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामजिक तानाबाना हुआ मजबूत

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आनंद भारती, मुंबई

मेट्रो परियोजना से नवी मुंबई को लाभ मिलेगा। इससे सामजिक तानाबाना मजबूत हो रहा है। अब नवी मुंबई के भी दो हिस्से बनते जा रहे हैं। पुराना नवी मुंबई (खारघर, वाशी, पाम बीच रोड, बेलापुर) तथा नया नवी मुंबई (मुंबई-गोवा रोड तथा मुंबई-पुणे रोड, कर्जत)। नया नवी मुंबई में डेवलपमेंट की संभावना बढ़ गई है। वहां काफी जमीन उपलब्ध हैं। इसे हॉट लोकेशन के रूप में देखा जा रहा है। मेट्रो परियोजना ने नवी मुंबई की औकात और भी बढ़ा दी है।मुंबई पर जनसंख्या का भारी दबाब है। रोजगार की तलाश में देश भर से लोगों का आना जारी है, हालांकि ज्यादातर लोग रहते हैं, दूरदराज के उपनगरों में, मगर काम के लिए उन्हें मुख्य मुंबई में ही जाना पड़ता है। 25-30 साल पहले मुंबई मे समानांतर नवी मुंबई को विकसित किया गया था।

आवासीय इलाकों और रेलवे स्टेशनों को विदेशी लुक दिया गया। बड़ी-बड़ी कंपनियों के सामने कारखाने, कार्यालय, बाज़ार के आकर्षण दिए गए, मगर जो उम्मीद की गई थी, वह पूरी नहीं हो पाई। इसमें सरकार के विजन की कमी तो रही ही, इन्फ्रास्ट्रक्चर भी ठोस नहीं था। तीस साल बाद अब लगता है कि स्थिति बदलती जा रही है। इसके दो बड़े कारण हैं। पहला, यह कि मेट्रो परियोजना से नवी मुंबई को लाभ मिलेगा। दूसरा, वहां का सामजिक तानाबाना मजबूत हो रहा है। अब नवी मुंबई के भी दो हिस्से बनते जा रहे हैं। पुराना नवी मुंबई (खारघर, वाशी, पाम बीच रोड, बेलापुर) तथा नया नवी मुंबई (मुंबई-गोवा रोड तथा मुंबई-पुणे रोड, कर्जत)। नया नवी मुंबई में डेवलपमेंट की संभावना बढ़ गई है। वहां काफी जमीन उपलब्ध हैं। इसे हॉट लोकेशन के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्तावित मेट्रो परियोजना ने नवी मुंबई की औकात और भी बढ़ा दी है। यह मेट्रो बेलापुर से तजोजा वाया खारघर जाएगा। नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी नजदीक ही है। नवी मुंबई का विकास तीन तरफ से हो रहा है। पनवेल, जवाहरबाग नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तथा तनोजा औद्योगिक क्षेत्र के बीच में तो है ही, ठाणे-बेलापुर रोड़ का विकास जिस तरह हो रहा है, उससे उद्योगों को बढ़ावा मिलने वाला है। बड़े-बड़े कारपोरेट कंपनियों की आवासीय कॉलोनी की मांग बढ़ रही है।

नवी मुंबई की बढ़ती लोकप्रियता
कहा जा रहा है कि अब तक लोग बड़े दफ्तरों के लिए नरीमन पॉइन्ट , बांद्रा-कुर्ला कांप्लैक्स, वर्ली-लोअर परेल को पसंद कर रहे थे, मगर बढ़ती भीड़, आवागमन की असुविधा बढ़ती ट्रैफिक समस्या के कारण नवी मुंबई को अपनी पसंद बना रहे हैं। वाशी, बेलापुर, खारघर, नेरूल, कोपर खैरणे, सीवुड में आदि अलग-अलग टॉउनशिप के रूप में इमर्ज हो रहे हैं। रेजीडेंशियल और कॉमर्शियल कॉम्प्लैक्स के साथ-साथ बड़े-बड़े स्कूल, इंस्टीटयूट, अस्पताल, मल्टीप्लेक्स, कॉलेज पार्क, मॉल बनते जा रहे हैं। मेट्रो के अलावा नेरूल- बेलापुर-उरन रेल प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू हो रहा है। पेयजल की सुविधा के लिए बाल गंगा डैम पर 1,450 करोड़ रूपए खर्च किया जा रहा है। सौ नए स्मार्ट शहर बसाने की मात्र संसार की योजना का एक फायदा मुंबई को तो मिलेगा कि उस पर से आबादी का बोझ घटेगा। संभव है मुंबई के आसपास भी दो-तीन स्मार्ट शहर बन जाऐ। किन सुविधाओं के लिए लोग मुंबई में तरस रहे है, वे उन्हें पड़ोस के स्मार्ट शहर में मिल जाएं। लेकिन यह भी हकीकत है कि मुंबई का रूतवा कम नहीं होगा। यह आर्थिक राजधानी बनी रहेगी और फिल्म-टीवी के लिए इससे और अच्छी जगह भी मिला अधिक है। लेकिन तब उम्मीद की जा सकती है कि मुंबई को बैंकाक या सिंगापुर बनाने की इच्छा पूरी हो जाएगी। मुंबई जिनके लिए जरुरी है, वही रह पाएंगे।
मेट्रो ने किया कयाकल्प
केन्द्र सरकार ने अर्फोडेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए ऋण में कमी की जो घोषणा की है, उससे मुंबई के बिल्डर्स और खरीददारों में भी उम्मीद जगी है। बिल्डर्स को अपना कारोबार दिखाई दे रहा है तथा खरीददारों को अपना घर। हालांकि यह सफर अभी लंबा है, मगर बिल्डर अभी से ही मुंबई के उपनगरों में ज़मीन खरीदने की तैयारी में लग गए हैं। आम खरीददार खुश है कि आज नहीं तो कल, किराए के घर से निकलकर अपने घर में जाएंगे, ठाणे जिला का पिछले दिनों विभाजन हुआ है। पावघर के रूप में यह इलाका हद तक उपेक्षित था, मगर अब उसके विकसित किए जाने की योजना से वसई, विरार और नाला-सोपारा को फायदा मिलेगा। मोनो और मेट्रो के आने से शहर का तनाव थोड़ा कम हुआ है। ट्रैफिक में सुबह-शाम घंटों फंसे रहने वाले लोग मिनटों में अपने गंतव्य तक पहुंचने लगे हैं। ऑटो और टैक्सी वालों की मनमानी पर भी अंकुश लग गया है। बस लोकल ट्रेनों से चलने वालों को जब स्टेशनों से उतर कर बस-ऑटो – टैक्सी में सवार होना पड़ता है, तब उन्हें समय की कीमत का पता चलता है। वर्सोवा घाटकोपर मेट्रो के चालू होने के बाद कई और रूटों पर मेट्रो प्रस्तावित है। कोलाबा-बांद्रा-चारकोप, बांद्रा- कुर्ला-मानसुई, घाटकोपर, मुलुंड-चारकोप-दहिसर, अंधेरी-दहिसर, बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स (बीकेसी,कांजुरमार्ग वाया एयरपोर्ट, घाटकोपर तथा सीनरी-प्रभादेवी मुंबई के लिए गेम चेंजर माने जा रहे हैं। इसका बिल्कुल पॉजिटिव इफेक्ट पड़ेगा। जब यह मुख्य शहर को दूर के इलाकों से जोड़ेगा, तब लोग कहीं भी घर खरीदने के लिए तैयार मिलेंगे।
मुंबई मुफीद
यह तो तय है कि देश को टैक्स के वित्त के लिए मुंबई पर हमेशा निर्भर रहना होगा। वित्तीय राजधानी होने के कारण पूरी दुनिया की निगाह मुंबई पर टिकी रहती है। एक लाईन में कहना हो तो राजनीतिक राजधानी दिल्ली पिछले कुछ सालों से देश को अविश्वास का माहौल देती रही है, मगर मुंबई ने हमेशा भरोसा दिया है। शेयर बाजार का उथल-पुथल भी कभी परेशान नहीं करता। सिनेमा के कारण दुनिया में मुंबई और भारत की बेहतर छवि बनी है। उसके बाद रियल इस्टेट ने मुंबई के विकास में जो रोल अदा किया है, उसपर कोई पानी नहीं फेर सकता। हीरानंदानी ग्रुप के एमडी निरंजन हीरानंदानी का कहना मायने रखता है कि मुंबई का रियल एस्टेट ने बिज़नेस का कानफिडेंस दिया है। एफडीआई के आने से यह और भी मज़बूत औैर विकसित होगा।

फायदा आम निवेशकारों और खरीदारों को होगा
इसकी भी कोशिश होगी कि केन्द्र सरकार की योजनाओं को ठीक से लागू कराए। इसमें फायदा आम निवेशकारों और खरीदारों को ही होगा। यहां पर आप सामान्य घरों से लेकर लक्जरी फ्लैटों तक का सुख ले सकते हैं। कह सकते है कि आम लोगों को अपने बजट के हिसाब से बदलापुर, नाला-सोपारा, वसई में फ्लैट खरीदनें में कोई दिक्कत नहीं होगी। आगामी वर्षों में मेट्रो से जुडऩे वाले इलाकों में ज्यादा मारा-मारी रहेगी। हर कोई घर खरीदने से पहले यातायात की सुविधा देखता है। स्टेशन से उतरकर देर रात घर जाने के लिए जहां बस-ऑटो नहीं है, वहां लोग जाने से कतराते हैं। लोकल ट्रेन की अपनी सीमा है। लेकिन मोनो और मेट्रो लोकल लाइनों का पार कर अपना सफर तय करेगा। कोलकाता, दिल्ली, बैंगलुरू के बाद मुंबई ही मेट्रो का बड़ा आकर्षक बन रहा है। समुन्द्र से घिरे होने के कारण यहां जगह की समस्या है। मेट्रो यहां ऊपर से जाएगा और छोटे-छोटे उपनगरों को जोड़ेगा।

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