आधुनिक किचिन

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बीसवीं सदी के अव्यवस्थित रसोईघर अब एक स्वप्न से अधिक कुछ नहीं हैं। जब दाल, रोटी, चावल तैयार करने के बाद सब्जी के लिए देर तक सिर खपाने के बाद चाकू नहीं मिलता था, जब चाकू मिला तो बहुत देर हो चुकी थी। दिनचर्या भी अव्यवस्थित होने से मन किसी अन्य आवश्यक कार्य को करने के लिए भी नहीं करता था। यहां-वहां फैले बर्तन, डिब्बे, रसोई से उठता घुआं, और हाथ से गिरते-टूटते सामान यह थी पूर्व में रसोई घरों की स्थिति। वर्तमान परिवेश में हालात एकदम बदल चुके है और भारतीय रसोईघरों ने भी घर के अन्य हिस्सों की तरह सुव्यवस्थित आधुनिकता का दामन थाम लिया जो 21वीं सदी के परिचायक बन गए हैं। वर्तमान समय में रसोईघर को सजाकर रखने एवं सामान को व्यवस्थित रखने का चलन चल पड़ा है। इसका लाभ उठाने से भारतीय कंपनिया भी सिंक यूनिट्स, किचन रैक, ट्रे, बास्केट, वाल कैबिनेट्स और चिमनी जैसे अतिरिक्त समान का निर्माण कर किचन की कायापलट करने की और अग्रसर हो गई हैं। आर्किटेक्ट बताते है कि एक शानदार किचन का होना आपकी विकासशील जीवन शैली को प्रदर्शित करता है। जगह का अधिकतम उपयोग फिलहाल नई शैली के किचन की प्रमुख विषेषता है। भारतीय महिलायें सामान्यत: अधिक समय किचन में ही बिताती हैं। गर्मी के दिनों में किचन गर्म हो जाता है। धुएं से आक्सीजन कम होकर कार्बनडाई आक्साईड में परिवर्तित हो जाती है। ऐसे में दूषित धुएं को बाहर करने के लिए काम की है चिमनी, जो महिलाओं के लिए सुविधाजनक माहौल बनाने के साथ ही घी, तेल को तलने से आंखों को होने वाले नुकसान से भी रक्षा करती है। चिमनी में एक आइल फिल्टर होता है जिससे रसोईघर की दीवारों में गंदगी नहीं होती साथ ही प्रदूषण से मुक्ति मिलती है। बाजार में आसानी से उपलब्ध चिमनी के दाम भी बजट के अनुरूप है। आयातित चिमनी में लगे उपकरण लंबे समय तक काम देने के साथ ही जल्दी खराब नहीं होते।

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