एमपी के उभरते शहरों में सबसे आगे : इंदौर

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देवेन्द्र मीणा

मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी के रूप में आज इंदौर की पहचान है। बीते कुछ वर्षों में शहर का स्वरूप तेजी से बदला है और इसी के साथ संभावनाओं के कई नए द्वार भी खुले हैं। चहुंमुखी विकास ने शहर की तस्वीर ही बदलकर रख दी है। एक निजी न्यूज चैनल ने इंदौर को प्रदेश की बेस्ट सिटी के अवार्ड से नवाजा है। शहर की सुविधाओं व व्यवस्थित विकास को ध्यान में रखते हुए यह अवार्ड दिया गया। भौगोलिक स्थिति के कारण यहाँ की जलवायु अच्छी है, और यहाँ का तापमान भारत के अन्य शहरों कि तुलना मे काफी स्थिर रहता है। इसलिए रहने के लिहाज से यह एक बेहतर शहर है। सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ अब आधुनिकता के समावेश ने इंदौर को महानगरों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। बदलते वक्त के साथ शहर की प्रगति ने देश की बड़ी कंपनियों का रूख अपनी ओर कर लिया है। रेजीडेंशियल तथा कॉमर्शियल सेक्टर में जबर्दस्त ग्रोथ दर्ज हुई है। रियल एस्टेट सेक्टर लगातार वृद्धि कर रहा है। इंदौर से सटे आसपास के क्षेत्रों में कई बड़ी आवासीय योजनाएं आकार ले रही है।
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर

बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की शहर को बेहतर सिटी के रूप में विकसित करने की मंशा से बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, इंश्योरेंस, टेलीकॉम, आईटी, रिटेल सभी सेक्टर एक समान गति से आगे बढ़ रहे हैं । शहर में बढ़ते मॉल कल्चर ने लोगों की लाइफ स्टाइल पूरी तरह से बदल दी है। विभिन्न क्षेत्रों की कई नामी कंपनियों के आउटलेट यहां खुले चुके हैं । एयरपोर्ट, क्रिकेट स्टेडियम, पांच सितारा होटल शहर में मौजूद है। रियल एस्टेट के बड़े खिलाड़ी मैदान संभाल चुके है, क्योंकि उन्हें इंदौर में अपार संभावनाएं दिखाई पड़ रही है। शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। लोकसभा चुनाव में २०.५८ लाख मतदाताओं के साथ इंदौर मतदाताओं के लिहाज से प्रदेश का सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र बनकर उभरा। जिले की आबादी ३२ से ३५ लाख के मध्य पहुंच गई है। रोजगार की तलाश में अन्य इलाकों से यहां लोगों के आने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। बढ़ती जनसंख्या के दबाव ने शहर में आवास की समस्या को जन्म दे दिया है।

आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित

शहर के बाहरी इलाकों को आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। लोग डेवलपर के साथ मिलकर अपने पुराने भवनों के स्थान पर मल्टीस्टोरेज बिल्डिंगों का निर्माण कर रहे हैं । यह चलन अब जोर पकड़ता जा रहा है। कहा जा सकता है कि रेजीडेंशियल और कॉमर्शियल लिहाज से शहर को पुनः बसाने की कवायद चल रही है। प्रतिदिन नित नए अपार्टमेंट्स की नींव रखी जा रही हैं । प्रोजेक्ट्स मौजूदा दौर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। इनमें प्लाट, डूप्लेक्स, बंगले, फ्लैट आदि शामिल हैं। फायर सेफ्टी सिक्योरिटी, मेडिकल, पार्क, क्लब हाउस, लैंड स्केप, ईको फ्रैंडली, वाटर हार्वेस्टिंग आदि खूबियां हैं। एनर्जी सेविंग के लिए भी इनोवेटिव वर्क किया जा रहा है। इन प्रोजेक्ट में ओपन स्पेस बेस्ट किचन साइज, माड्यूलर किचन, गार्डनिंग, बैटरी लिफ्ट आदि को विशेष तौर पर जोड़ा गया है। बिल्डर मोहन शर्मा बताते है कि (सुविधाओं से संपन्न इन अपार्टमेंट्स के फ्लैट निर्माण कार्य पूरा होने के पहले ही बुक हो रहे है। लोगों की डिमांड औऱ पसंद को देखते हुए अपार्टमेंट में स्विमिंग पुल, गार्डन, प्लेग्राउंड, जिम सब कुछ मुहैया कराया जा रहा है। परिवहन व्यवस्था, सड़कों का निर्माण, वॉटर रिचार्जिंग, वर्षा जल निकासी हेतु स्ट्राम वॉटर, सफाई व्यवस्था, पेयजल वितरण, सीवरेज व ड्रेनेज लाइन की व्यवस्था, उद्यानों का निर्माण व विकास, प्रकाश व्यव्स्था आदि सभी बेहतर होने की वजह से आज शहर के हर कोने में भवनों का निर्माण प्रगति पर है।) वहीं नगर पालिका निगम इंदौर की वर्तमान सीमाओं में वृद्धि करते हुए, उसमें २९ अतिरिक्त गावों को हाल ही में सम्मिलित किया गया है। बायपास से लगे गांव कनाड़िया, बिचौली हप्सी, बिचौली मर्दाना आदि नगर निगम सीमा में शामिल हुए है। लिहाजा इन गावों का विकास भी अब इंदौर विकास योजना २०२१ के मद्देनजर ही होगा। कुछ दिनों में ये गांव शहर के साथ कदमताल करते नजर आएंगे। यहां कॉलोनियां काटने और आवासीय योजना लाने के लिए बड़े बिल्डर और रियल एस्टेट कंपनियां अपने प्रोजेक्ट लाने की तैयारी में है। कंपनियों की आमद से जमीनों के भाव में भी अचानक वृद्धि हो गई है। शहर के आसपास एक नया शहर बन रहा है।

औद्योगिक हब
इंदौर व्यवसायिक क्षेत्र में प्रदेश का प्रमुख वितरण केन्द्र और व्यापार मंडी है। यह एक औद्योगिक शहर है। यहाँ लगभग चार-पांच हजार से अधिक छोटे-बडे उद्योग हैं। मध्यप्रदेश को सर्वाधिक राजस्व यहीं से मिलता है। पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में पांच सौ से अधिक उद्योग हैं और इनमें से कई अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के उद्योग हैं। पीथमपुर में प्रमुख उद्योग व्यावसायिक वाहन बनाने वाले व उनसे सम्बन्धित हैं। यह क्षेत्र आने वाले समय में ऑटो कंपोनेंट हब के रूप में तेजी से उभर सकता है। इंदौर औऱ आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में वॉल्वो-आयशर, मान, फोर्स, जॉन डेयर, महिंद्रा आदि टू व्हीलर के लिए करीब डेढ़ सौ ऑटो कंपनियां जॉब वर्क कराती हैं। इन कंपनियों का संयुक्त कारोबार करीब चार से पांच हजार करोड़ रूपए वार्षिक होगा। यहाँ मालवा क्षेत्र के किसान अपने उत्पादन को बेचने और औद्योगिक वर्ग से मिलने आते है। यहाँ के आस पास की जमीन कृषि-उत्पादन के लिये उत्तम है और इंदौर मध्य-भारत का गेहूँ, मूंगफली और सोयाबीन का प्रमुख उत्पादक है। यह शहर, आस-पास के शहरों के लिए प्रमुख खरीददारी का केन्द्र भी है। औद्योगिक महत्व के कारण कई कॉरपोरेट हाउस ने अपने ऑफिस शहर में खोल रखे है।

आईटी हब
वहीं इंदौर के आईटी हब बनने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे खंडवा रोड स्थित क्रिस्टल आईटी पार्क में कंपनियों के आने का सिलसिला जारी है। आईटी सेक्टर की एक अन्य कंपनी ईबॉटएस्पे भी जल्द आईटी पार्क पहुंच सकती है। औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (एकेवीएन) के अनुसार कंपनी को पार्क में 23 हजार वर्ग मीटर का स्थान आवंटित किया जा सकता है। इतना स्थान आवंटित करने से वर्तमान पार्क का खाली स्थान पूरी तरह से भर जाएगा। हाल ही में डायसपार्क व यश टेक्नोलॉजी को आईटी पार्क में 50-50 हजार वर्ग फीट स्थान का आवंटन किया गया है। एकेवीएन द्वारा अब आईटी पार्क फेज-2 योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। क्रिस्टल आईटी पार्क कैंपस में खाली जमीन पर इस नए पार्क को आकार दिया जाएगा। पार्क के पीछे 1.75 एकड़ जमीन पर दस मंजिला भवन का निर्माण होना प्रस्तावित है। उद्योग से जुड़े लगभग सभी विभागों के एक स्थान पर होने से उद्योगपतियों को काफी सहुलियत होगी। पार्क के समीप के क्षेत्रों में आवासीय तथा व्यावसायिक प्रॉपर्टी का विस्तार भी हो रहा है।

डायमंड पार्क से बढ़े जमीनों के दाम
शहर के पास रंगवासा-राऊ में डायमंड पार्ख बनना है। ११८ हेक्टेयर क्षेत्र में पार्क का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। पार्क के दोनों तरफ १२ किलोमीटर के क्षेत्रफल को बिजनेस हब के रूप में विकसित करने की योजना प्रदेश सरकार की है। स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) का दर्जा भी पार्क को मिलेगा। रहवासी कॉलोनी का निर्माण के अलावा हेलीपेड पार्क में बनवाया जाएगा, जिससे यहां अपना प्लांट स्थापित करने वाली कंपनियों को देशी व विदेशी अधिकारियों के आने के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं पार्क के कारण रंगवासा-राऊ की जमीनों की कीमत में तेजी की चमक है। शहर के बिल्डर्स डायमंड पार्क के नाम का उपयोग अपने प्रोजेक्ट की सेल बढ़ाने के लिए कर रहे है। पार्क के आसपास कई नए आवासीय प्रोजेक्ट भी कतार में है।
रियल एस्टेट के लिए नया डेस्टीनेशन सुपर कॉरिडोर
कुछ दिनों पहले ही एयरपोर्ट के पास सुपर कॉरिडोर पर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी इंफोसिस के प्रस्तावित परिसर निर्माण की आधारशिला रखी गई है। इंदौर के लोगों के साथ ही प्रदेश के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। बताया जाता है कि कंपनी में लगभग १३ हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इंफोसिस का यह परिसर लगभग १३० एकड़ क्षेत्र में बनने वाला है। पहला चरण २०१७ तक पूरा होने की संभावना जताई गई है। वहीं आईटी क्षेत्र की एक और बड़ी कंपनी टीसीएस को सुपर कॉरिडोर पर ही करीब १०० एकड़ जमीन दी गई है। कंपनी कैंपस का भूमिपूजन कर चुकी है। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। आईटी सेक्टर की दो-दो बड़ी कंपनियों की आमद ने इलाकें की सूरत बदल दी है। प्रॉपर्टी के दाम न केवल कई गुना ऊपर पहुंच चुके है, बल्कि कई अन्य कंपनियां शहर में जगह तलाश रही है। रियल एस्टेट के बड़े खिलाड़ी इसके इर्द-गिर्द अपने प्रोजेक्ट ला रहे है। सुपर कॉरिडोर रियल एस्टेट के लिए एक नया डेस्टीनेशन बन गया है। यहां मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट, रेजीडेंशियल प्लॉट-हाउस, विला, डुप्लेक्स, बंगले हर प्रकार का निर्माण हो रहा है। यहां १ बीएचके फ्लैट १८०० रुपए प्रति वर्ग फीट की कीमत में उपलब्ध कराए जा रहे है। शहर में डीएलएफ (गार्डन सिटी), ओमेक्स, पार्श्वनाथ, सहारा, सिलवर स्प्रिंग आदि बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों के प्रोजेक्ट चल रहे है। विजयनगर, निपानिया (बॉम्बे हॉस्पिटल के पास), एनएच-३ तलावली चांदा, कनाड़िया रोड, बंगाली चौराहा, बायपास, पिपलिया कुमार, बिचौली मर्दाना, सांवेर रोड, राऊ-पीथमपुर रोड, उज्जैन रोड, महालक्ष्मी नगर नव विसकित हो रहे क्षेत्र है। सर्वाधिक आवासीय योजनाएं इन्हें इलाकों में चल रही है।
एजुकेशन हब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी स्मारक चिकित्सा महाविद्यालय, श्री गोविंदराम सेक्सरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, होलकर विज्ञान महाविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) आदि सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कई नामी कोचिंग क्लासेस शहर में मौजूद है। यूनिवर्सिटी का नया मेडिकल कॉलेज खुलना प्रस्तावित है। प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं की उपस्थिति ने इंदौर को एजुकेशन हब के रूप में एक नई पहचान दी है।

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