प्रॉपर्टी लेने में बरतें विशेष सावधानी

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महंगाई के इस युग में घर खरीदना इतना आसान नहीं रह गया है। बढ़ती महंगाई ने एक अदद आशियाने के सपने को साकार करना मुश्किल कर दिया है। दिन प्रति दिन फ्लैट की कीमत बढ़ती ही जा रही है। ऐसी स्थिति में आप यदि बेहतर पैसा भी कमा रहे हैं तो भी आपको बैंक से लोन लेने की जरूरत पड़ सकती है। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घर खरीदने से पहले अपने इकोनॉमी स्थिति के साथ होम लोन फाइनेंसर की तलाश भी बड़ी सुझबुझ से करनी होती है। अगर आपको कोई मकान पसंद आ गया है और उसकी कीमत भी वाजिब लग रही है, तो आपकी अगली तलाश होम लोन फाइनेंसर की होगी। यह लाखों रुपये का मामला है और आने वाले कई सालों तक आपको एक निश्चित रकम इस मद में बचानी होगी, तो एक सही फाइनेंसर ढूंढना बेहद जरूरी हो जाता है।

फाइनेंसर का चुनाव और जांच-पड़ताल

इस मामले में ध्यान रखें कि लोन सेंक्शन होने के बाद भी पूरी लोन अवधि के दौरान आपको अपने फाइनेंसर के साथ संपर्क बनाए रखना होगा, इसलिए आपके फाइनेंसर की कस्टमर केयर पॉलिसी अच्छी होनी चाहिए। कस्टमर रिलेशंस मेंटेन करने पर कंपनी का ध्यान होगा तो आपके कई मुश्किलें बेहद आसानी से दूर हो जाएंगी, वरना शिकायतों का अंबार लग सकता है। कस्टमर के प्रति फाइनेंस कंपनी या बैंक का रवैया जानने के लिए उसके पुराने ग्राहकों से संपर्क कर सकते हैं। अगर आपके किसी दोस्त या परिचित ने भी उस कंपनी से लोन लिया है तो इस बारे में उससे जानकारी लेना न भूलें। कंपनी का पुराना रेकॉर्ड भी चेक करें कि उसने ब्याज दरों में कमी का कितना फायदा अपने ग्राहकों को दिया है और वह कंपनी ब्याज दरें सबसे पहले बढ़ाने वालों में से तो नहीं है। इन तहकीकातों को करने से आप एक सही फाइनेंसर का चुनाव कर सकेंगे। आपको कितना लोन चाहिए, यह तय करने से पहले अपनी आर्थिक क्षमताओं का आकलन कर लीजिए। अपनी इनकम और देनदारियों पर एक निगाह डालने के बाद आप यह अनुमान आसानी से लगा सकेंगे कि आप होम लोन की किस्तों के लिए अधिकतम कितनी रकम बचा सकते हैं। अपने पास मौजूद रकम का अनुमान लगाने के लिए आप अपनी इनकम, सेविंग्स, इनवेस्टमेंट्स, पेंशन फंड, इंश्योरेंस और अन्य होल्डिंग्स पर गौर करना न भूलें। इससे पता चलेगा कि आप अपने नए मकान पर कितनी रकम खर्च कर सकते हैं।

औकात के मुताबिक ही लें होम लोन

होम लोन के रूप में इतनी बड़ी रकम का सिर पर मत लीजिए, जिसे आप चुका न सकें। इससे आपको डिफॉल्टर घोषित करने का डर पैदा हो सकता है। मकान की कीमत की सारी रकम लोन के रूप में नहीं लेनी चाहिए। आमतौर पर यह संभव भी नहीं होता। ऐसे में होम लोन लेने से पहले डाउन पेमेंट के लिए कुछ रकम का इंतजाम करना जरूरी होता है। यह रकम जितनी ज्यादा होगी, आपको उतना ही कम होम लोन लेना पड़ेगा। नतीजतन, आपके सिर पर कम से कम ईएमआई का बोझ चढ़ेगा। यह भी ध्यान रखें कि आपको सिर्फ होम लोन इंटरेस्ट के रूप में खर्च नहीं करना है, बल्कि मकान लेने के बाद आपको उसकी मेंटेनेंस, टैक्स, होम इंश्योरेंस, लोन इंश्योरेंस जैसे मदों में भी खर्च करना पड़ेगा।

लोन अवधि पर भी रखें ध्यान

आपको होम लोन कितने समय में वापस करना है, मतलब- लोन टेन्योर कितना रहेगा, इसका फैसला भी सोच-समझकर करना चाहिए। कुछ लोग लोन को जल्दी से जल्दी वापस कर देना चाहते हैं, जिससे उन पर भार कम हो सके। दरअसल, उन्हें डर होता है कि ब्याज दरें उनकी पहुंच से बाहर जाने पर वे लोन नहीं चुका सकेंगे और तब उन्हें डिफॉल्टर घोषित किया जा सकता है। ऐसे लोग कम अवधि के लोन लेना पसंद करते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें ज्यादा ईएमआई देनी पड़ती है और वे जितने समय तक लोन चुकाते हैं, इसके लिए उन्हें हर महीने मोटी रकम बचानी पड़ती है। जो लोग हर महीने मोटी रकम ईएमआई के लिए नहीं बचा सकते, उनके लिए लंबी अवधि का होम लोन लेना सही रहता है। ज्यादा अवधि में लोन वापसी के लिए ईएमआई की रकम कम होती है, जो काफी पॉकेट फ्रेंडली नजर आती है। हालांकि इस स्थिति में होम लोन इंटरेस्ट के रूप में कुछ ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है। आपके लिए कितनी अवधि का लोन सही रहेगा, इसका फैसला लेने के लिए इस बात पर गौर करें कि आप ब्याज दरों में कितना उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, आप हर महीने कितनी रकम बचा सकते हैं और आपकी अन्य देनदारियां कितनी हैं, आमतौर पर यह देखा गया है कि ज्यादातर लोग आठ-दस सालों में होम लोन चुकाना पसंद करते हैं। अगर आप इससे ज्यादा समय के लिए लोन लेते हैं, तो ऐसी कंपनी के पास जाएं, जो प्री पेमेंट पेनल्टी बहुत कम या नहीं लेती। इससे आपको ज्यादा लोन मिल सकेगा और ईएमआई का बोझ भी कम पड़ेगा।

कागजात है महत्वपूर्ण

होम लोन के लिए अप्लाई करने से पहले तमाम जरुरी कागजात अपने पास सुरक्षित रख लेने चाहिए। किसी कागज की कमी या अधूरी जानकारी आपकी लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट होने का कारण बन सकती है। ज्यादा बैंक या फाइनेंस कंपनी कागजात के रूप में एज प्रूफ फोटो, आईडीए फॉर्म 16, तीन महीने की सैलरी स्लिप, सैलरी अकाउंट की छह महीने की बैंक स्टेटमेंट, रेजिडेंशल एड्रेस पूफ्र आदि मांगते हैं। सेल्फ एंप्लॉयड लोगों से इनकम टैक्स रिटर्न, ऑडिटर रिपोर्ट, बैलेंस शीट, दो सालों का लॉस-प्रॉफिट अकाउंट आदि मांगे जाते हैं।

स्कीम का चुनाव

होम लोन कंपनी आपके सामने कई तरह के विकल्प रखेगी जैसे- फिक्स्ड, फ्लोटिंग, स्टेप अप, स्टेप डाउन और हाइब्रिड लोन। माना जाता है कि फ्लोटिंग रेट के मुकाबले फिक्स्ड लोन ज्यादा महंगे रहते हैं। लेकिन फ्लोटिंग होम लोन के मामले में आप ब्याज दरों का पूर्वानुमान नहीं लगा सकते। ये कभी ज्यादा होंगी तो कभी घटेंगी भी। हाइब्रिड लोन इन दोनों के बीच की कड़ी है। इसमें लोन की कुछ रकम फिक्स्ड रेट से और कुछ फ्लोटिंग रेट से वापस की जाती है।

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