रियल एस्‍टेट और आवास के लिए परिवर्तनकारी बजट

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बड़ी और लोकलुभावन घोषणाओं से परे इस वर्ष का बजट काफी संतुलित, सकारात्‍मक और प्रगतिशील बजट है। इसका लक्ष्‍य मंदी की मार झेल रहे रियल स्‍टेट तथा आवास क्षेत्र को पुनर्जीवित करना और इसे सतत विकास की राह पर लाना है।

रियल एस्‍टेट तथा आवास क्षेत्र को प्रोत्‍साहित करने की मोदी सरकार के सुधारवादी दृष्टिकोण के अनुरूप बजट ने इन क्षेत्रों को अनेक पहलुओं विशेषकर रियायती और कम लागत के आवास को काफी प्रोत्‍साहित किया है ताकि सभी के लिए आवास कार्यक्रम के उद्देश्‍य को प्राप्‍त किया जा सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमकेवाई) को बजट में काफी अधिक आवंटन हुआ है। इसका आवंटन 39 प्रतिशत बढ़ाकर कुल 29 हजार करोड़ रूपये कर दिया गया है। सरकार के गरीब समर्थक दृष्टिकोण को ध्‍यान में रखते हुए ग्रामीण आवास के लिए आवंटन में 44 फीसदी की वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दो करोड़ शहरी तथा एक करोड़ ग्रामीण मकान बनाने का लक्ष्‍य है और इस लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए 23 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष के आवंटन से आठ हजार करोड़ रुपये अधिक है। दो हजार करोड़ रूपये के अतिरिक्‍त पुनर्वित का प्रावधान राष्‍ट्रीय आवास बैंक के लिए किया गया है ताकि आवास स्‍टॉक को बढ़ावा मिले।

आवास क्षेत्र पर इस क्षेत्र का सबसे बड़ा परिवर्तनकारी कदम रियायती मकानों को बुनियादी ढांचे का दर्जा देना है। यह सही है कि आवास की सबसे अधिक कमी रियायती और कम लागत की श्रेणी में है। सरकार यह अच्‍छी तरह महसूस करती है कि रियल एस्‍टेट क्षेत्र में जारी मंदी विशेषकर आवासीय रियल एस्‍टेट में मंदी क्षेत्र द्वारा तरलता की समस्‍या झेलने के कारण है। रियायती मकानों को बुनियादी ढांचाके समकक्ष रखने के सरकार के प्रयास से सस्‍ते, घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय वितत्‍ के लिए दरवाजे खुलेंगे। विदेश निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के उन्‍मूलन से न केवल कारोबारी सहजता को बढ़ावा देनेमें मदद मिलेगी बल्कि प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह को भी प्रोत्‍साहन मिलेगा। वित्‍त वर्ष 2016-17 की पहली छमाही में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह 1.45 लाख करोड़ पर पहुंच गया। यह 2015-16 में 1.07 लाख करोड़ रूपये था। इन सबसे आवास आपूर्ति को प्रोत्‍साहन मिलेगा। बुनियादी ढांचा रियल एस्‍टेट तथा समग्र अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाता है इसलिए बुनियादी ढांचेके लिए 3.96 लाख करोड़ रूपये का रिकॉर्ड प्रावधानकिया गया है जोकि पिछले वर्षसे 25 प्रतिशत अधिक है इसके साथ ही राजमार्ग के लिए बजटीय समर्थन बढ़ाकर 64 हजार करोड़ कर दिया गया है।

संपत्ति उपभोक्‍ताओं की दृष्टि से 2017-18 के बजट को ऐतिहासिक बजट कहा जा सकता है। बजट में संपन्‍न लोगों पर अधिक कर लगाये गये हैं और ईमानदार करदाताओं को आयकर की बड़ी राहत देकर पुरस्‍कृत किया गया है। 2.5 लाख से अधिक की वार्षिक आय पर टैक्‍स को आधा कर दिया गया है। इसके अतिरिक्‍त आयकर की सीमा बढ़ाकर तीन लाख रूपये कर दी गई है। बजट प्रावधानों से उच्‍च आय वाले लोगों द्वारा सटोरिया खरीदारी को हतोत्‍साहित किया गया है और वास्‍तविक रियायती मकान खरीदने वाले लोगों को प्रोत्‍साहित किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सरकार ने पहले ही नौ लाख रूपये तक के आवास ऋण पर ब्‍याज में चार प्रतिशत की कमी की गई है और बारह लाखरूपये तक के आवास ऋण पर ब्‍याज दर तीन प्रतिशत घटाने की घोषणा की गई है। अधिक से अधिक लोगों को रियायती आवास योजना के अंतर्गत लाने के लिए सरकार ने इस बजट में घर के आकार (30 वर्ग मीटर या 300 वर्ग फीट- 60 वर्गमीटर या 600 वर्ग फीट) के पात्रता मानकों को बिल्‍टअप एरिया से बदलकर कारपेट एरिया कर दिया गया है। अब 800 वर्ग फीट के मकान रियायती आवास श्रेणी के दायरे में आएंगे। सरकार ने मकानों की बिक्री पर कर राहत भी दी है। यह राहत संपत्ति की बिक्री पर पूंजी लाभ में कमी करके, आधार वर्ष 1981से 2000 करके तथा परिसंपत्तियों के उचित मूल्‍य को बढ़ाकर दी गई है। सरकार ने और राहत देते हुए आधार वर्ष में परिवर्तन करके दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ के लिए मकान अपने पास रखने की अवधि तीन वर्ष से दो वर्ष कर दी है।

रियल एस्‍टेट, आवास तथा बुनियादी क्षेत्र में रोजगार सृजन होता है। सरकार ने इन क्षेत्रों को प्रोत्‍साहित करके इस आलोचना को खारिज करने की कोशिश की है कि सरकार रोजगारमुखी विकास की राह पर नहीं चल रही है। छोटे प्रतिष्‍ठानों के लिए कर लाभ का उद्देश्‍य रोजगार सृजन करना है। मनरेगा के लिए आवंटन रिकॉर्ड 48 हजार करोड़ रूपये बढानेके प्रस्‍ताव से ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। कौशल विकास के लिए आवंटन में 38 फीसदी की वृद्धि करने से केंद्र के 2022 तक दस हजार करोड़ रोजगार सृजन करने की महत्‍वाकांक्षी योजना को प्रोत्‍साहन मिलेगा।

बजट का फोकस लोगों की वहन योग्‍यता बढ़ाने की सरकार की नीति के अनुरूप है। यह कहा जा सकता है कि यूपीए सरकार के दौरान मकानों की कीमतें साधारण लोगों की पहुंच से बाहर चली गई थी, लेकिन जब से एनडीए सरकार सत्‍ता में आई है उसका ध्‍यान संपत्ति के मूल्‍यों के कृत्रिम उछाल पर नियंत्रण रखना है और लोगों के लिए रियायती मकान उपलब्‍ध कराना है। बजट में बैंकों की तरलता में सुधार के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। आवास ऋण के लिए कर छूट और प्रोत्‍साहन दिया गया है। डिजिटलीकरण को प्रोत्‍साहित करने तथा तीन लाख रूपये से अधिक के नकद लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने से कम लागत की बैंक जमाओं को बढावा मिलेगा और इस तरह कोष लागत में कमी आयेगी। वास्‍तव में आवास को बढ़ावा देने संबंधी नीतिगत उपायों से मांग आपूर्ति की खाई में कमी आयेगी और मकान रियायती दर पर मिलेंगे। यह बजट वृहद आर्थिक स्थिरता के मोर्चे पर भी अच्‍छा बजट है फिर भी निजी निवेश चक्र को बढ़ावा देनेके लिए उपभोक्‍ता खर्च में तत्‍काल प्रोत्‍साहन देनेकी कमी है। यद्यपि बजट में बुनियादी ढांचेके लिए विवाद समाधान व्‍यवस्‍था को संस्‍थागत बनाया गया है ताकि परियोजनाओं मे तेजी आये लेकिन एकल खिड़की मंजूरी के महत्‍वपूर्ण विषय का समाधान नहीं किया गया है। बजट समग्र रूप से उद्योग जगत की आशा के अनुरूप है। यह मोदी सरकार के रियल एस्‍टेट सुधार संकल्‍प को दोहराने वाला बजट है ताकि इसे जनता के लिए वहन योग्‍य बनाया जा सके और साथ ही साथ इसे निवेशकों के लिए आकर्षक संपत्ति वर्ग के रूप में विकसित किया जा सके।

(लेखक दिल्‍ली स्थित वरिष्‍ठ पत्रकार हैं और रियल एस्‍टेट तथा बुनियादी ढांचा संबंधी विषयों पर प्रमुख दैनिकों में नियमित रूप से लिखते हैं। लेख में व्‍यक्‍त विचार लेखक के अपने विचार हैं।)
BY-Vinod Bahal

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