रिसेल मार्केट में प्रॉपर्टी की खरीददारी

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घर खरीदना है, कहां और किस प्रोजेक्ट में लें, इस बात को लेकर मन में अक्सर कई उलझनें पैदा हो जाती हैं।  ऐसे में आप रियल एस्टेट से जुड़े ब्रोकर, ऑन लाइन या मार्केट रिसर्च के द्वारा घर के बारे में जानकारी इक्ठ्ठा करते है। सर्च करने के बाद प्रॉपर्टी मार्केट में आपको कई ऑप्शन मिल जाते हैं, पर उनमें आपके लिए कौन सा सही है, यह तय करना थोड़ा मुश्किल होता है। हम आपको रिसेल मार्केट में प्रॉपर्टी की खरीददारी और उसे जुड़े फायदे की जानकारी दे रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर या किसी भी बड़े या छोटे शहरों में घर के लिए लंबा इंतज़ार उपभोक्ता को करना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए है कि कोई भी प्रोजेक्ट जो डेवलपर्स के द्वारा लॉन्च किया जाता है, उसे पूरा करने में तीन-चार साल का समय लग ही जाता है। कई कस्टमर ऐसे होते हैं, जो घर खरीदने के साथ उसमें रहना भी चाहते हैं। वह जहां रहना चाहते हैं, वहां की लोकेशन और बुनियादी सुविधा भी ठीक-ठाक हो, उनकी पहली प्राथमिकता होती है। यदि आप भी इस तरह के घर चाह रहे हैं, तो आपको लिए रिसेल मार्केट से घर खरीदना उपयुक्त होगा। रिसेल मार्केट से यदि आप घर खरीदते हैं तो आपको लंबा इंतज़ार भी नहीं करना पड़ता है और बुनियादी सुविधा की भी कमी नहीं झेलनी होती।  रिसेल हाउस खरीदने से पहले आपको इस मार्केट की जानकारी होना बहुत ही ज़रूरी है। हां, यह बात बिल्कुल सही है कि इस मार्केट से खरीददारी करने पर आपको रिस्क कम होता है।रिसेल मार्केट से घर की खरीददारी करने से पहले की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी।

रिसेल यूनिट

जो भी नए प्रोजेक्ट बन कर तैयार होते हैं, उसमें रिसेल यूनिट होती है। ये यूनिट ज्यादातर निवेशकों के द्वारा बुक किया हुआ होता है। जब प्रोजेक्ट बन कर तैयार हो जाता है तो निवेशक इन युनिटों को मुनाफा लेकर बेचते हैं। इस तरह के यूनिट पुराने भी नहीं होते हैं और इनकी तदाद कम भी नहीं होती। रिसेल प्रॉपर्टी मार्केट में दो तरह की प्रॉपर्टी मिलती है। पहला काफी दिनों से बना हुआ प्रॉपर्टी और दूसरा नए प्रोजेक्ट बन कर तैयार हुआ। बड़े प्रोजेक्ट में कई ऐसे निवेशक होते हैं, जो डेवलपर्स के साथ टाइअप किए होते हैं। लेकिन वह प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन अपने नाम पर नहीं कराते हैं। इस तरह की प्रॉपर्टी आसानी से और ठीक-ठाक मूल्य पर रिसेल में मिल जाती है।

रिसेल हाउस की मांग

रिसेल प्रॉपर्टी खरीदने का सबसे बड़ा कारण यह होता है कि आप जिस एरिया में घर चाह रहे हैं, उस एरिया में नए प्रोजेक्ट नहीं बन रहे हैं। महानगरों में जो भी नए प्रोजेक्ट बन रहे हैं, वह मुख्य स्थानों से काफी दूर होते हैं। ऐसे में प्राइम लोकेशन पर घर चाहने वालों के लिए रिसेल हाउस का एक बेहतर ऑप्शन होता है। आपको दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में रिसेल प्रॉपर्टी की संख्या बहुतायत है क्योंकि यहां पर जो भी नए प्रोजेक्ट लॉन्च होते है, उसमें कुछ यूनिट इन्वेस्टर्स के होते हैं, जो इसे प्राइस एप्रीसिएशन के अनुसार बेचते हैं।

प्राइस फैक्टर

यह तय होता है कि रिसेल में प्रॉपर्टी खरीदने में आपके कीमत अधिक चुकानी होगी। हां, ऐसा हो सकता है कि आप जो प्रॉपर्टी लेने जा रहे हैं, उसका स्ट्रक्चर कुछ पुराना हो लेकिन इस तरह की प्रॉपर्टी में आपको एरिया थोड़ा ज्यादा मिल सकता है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बैंगलुरु में रिसेल प्रॉपर्टी की कीमत कंस्ट्रक्शन चल रहे प्रोजेक्ट के रेट पर भी मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि निवेशक भी थोड़ा-बहुत मुनाफा लेकर इसे बेचना चाहता है। ऐसा वह इसलिए करता है क्योंकि वह प्रोजेक्ट लॉन्च के समय ही प्रॉपर्टी में निवेश कर चुका होता है। उस समय वह उस प्रॉपर्टी की कीमत के अनुसाल अपनी लागत लगाता है। जब प्रोजेक्ट पजेशन के करीब आता है तो उसे निवेश पर अच्छा रिर्टन मिल रहा होता है। ऐसे समय में वह चल रहे मार्केट रेट से 5-10 प्रतिशत कम में भी बेचने में भी गुरेज नहीं करता। आज के दौर में रियल एस्टेट सेक्टर में ज़रूरत से ज्यादा सप्लाई और रिर्टन पाने की चाहत में ऐसे ढ़ेर सारे फ्लैट रिसेल में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत मार्केट की कीमत से कम भी हो सकती है। रिसेल प्रॉपर्टी को इन्वेस्टर्स ऐसे समय में बेचना चाहता है, जब उसे लगता है कि उसकी प्रॉपर्टी की सबसे अच्छी कीमत मिल रही है और इससे अधिक नहीं मिल सकती। ऐसे हालत में निवेशक कस्टमर को अपने प्रॉपर्टी की ओर आकर्षित करने के लिए मार्केट प्राइस से कम का ऑफर करता है। कई बार यह भी होता है कि रेडी टू पजेशन और रेडी टू मूव फ्लैट की कीमत का अंतर बहुत ही कम होता है।

ट्रांसफर चार्ज

यदि आप अंडर कंस्ट्रक्शन घर खरीदने जाते हैं तो आपको रिसेल से कम कीमत में घर तो मिलता है, पर आपको यह जानकारी होनी चाहिए कि उस प्रॉपर्टी पर ट्रांसफर चार्ज कितना लगेगा। ज्यादतर डेवलपर्स ट्रांसफर चार्ज के रुप में 100 रूपए से 500 रूपए स्क्वेयर फीट का चार्ज करते हैं। आप यदि 1000 स्क्वेयर फीट का घर खरीदते हैं और आप से यदि 500 रुपये प्रति स्क्वेयर फीट चार्ज वसूला जाता है तो 5 लाख रुपये अलग से भुगतान करना होगा। ऐसे में लॉन्च के समय यदि कम कीमत पर घर बुक भी कराते हैं, तो आपको कोई बहुत अधिक लाभ नहीं मिलता है। ऐसे में रिसेल प्रॉपर्टी जो अधिक कीमत पर मिल भी रही है, तो संभव है कि यह घाटे का सौदा नहीं भी हो।

खरीदने से पहले

छोटी-मोटी खरीददारी बिना जांच-पड़ताल की भी हो जाती है। हम या आप इसके लिए न तो कोई रिसर्च करते हैं और न ही बहुत सोच-विचार। पर जब घर की खरीददारी की बात आती है तो हर कोई काफी सोच-समझ कर फैसला लेता है। क्योंकि घर बार-बार खरीदने की वस्तु नहीं होती। आप रिसेल या अंडर कंस्ट्रक्शन ही क्यों न खरीद रहे हों, खरीदने से पहले लीगल पेपर, नक्शा और मालिकाना हक को अच्छी तरह से जांच कर संतुष्टï हो कर ही प्रॉपर्टी को खरीदने का निर्णय लें।  घर खरीदने में बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट का रोल बहुत ही अहम् होता है। इसको अच्छी तरह से पढ़ लें। यदि खुद से समझ में नहीं आ रहा है तो किसी वकिल से मिलें। इसके साथ आपने जो पेमेंट किया है, उसकी रशीद की जांच भी कर लें। आप जो प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं, उस पर पहले से कोई लेनदारी तो नहीं है। इस बात की भी जानकारी रखें। कोई भी रिसेल प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात को मुख्य रुप से जानकारी होनी चाहिए कि प्रॉपर्टी को किसी कारण बस तो नहीं बेचा जा रहा है। यदि प्रॉपर्टी का मालिकाना हक किसी निवेशेक के पास में है तो कोई समस्या नहीं है। रिसेल प्रॉपर्टी यदि किसी पहले से बने हुए सोसाइटी में खरीद रहे हैं, तो उस सोसाइटी के कायदे कानून जानना बहुत ही ज़रूरी है। सोसाइटी के नियम कानून उसके बाइलॉज पर बहुत कुछ निर्भर करता है। बाइलॉज के अनुसार ही प्रॉपर्टी को रिसेल किया जा सकता है। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उस हाउसिंग सोसाइटी के बाइलॉज को अच्छी तरह से पढ़ लें और समझ लें। आपको यदि लगे कि आप इस नियम कानून में एडजस्ट कर सकते हैं, तो ठीक है अन्यथा प्रॉपर्टी नहीं खरीदे। सोसाइटी का बाइलॉज उस सोसइटी की कोर वैल्यू का ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट किया जाता है। इस बाइलॉज में उस सोसाइटी से जुड़े हल पहलु को ध्यान रखा जाता है। प्रॉपर्टी के विषय में और अधिक जानकारी के लिए आप बैंक जा कर उस प्रॉपर्टी पर लोन की मांग कर सकते हैं। बैंक लोन देने से पहले प्रॉपर्टी की लीगल पेपर और प्रॉपर्टी का मालिकाना हक की जानकारी इक्ठ्ठा करता है। यदि बैंक सभी पहलुओं को सही पाता है, तभी लोन मुहैया करता है। ऐसा करने से आापको यह फायदा होगा की प्रॉपर्टी की सही जानकारी आपको मिल जाती है।

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