सस्ते घरों के लिए नीमराना उभरता हुआ स्थान

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निवेश के लिहाज से नीमराना बेहतरीन विकल्प है। गुडग़ांव से 84 किलोमीटर जबकि जयपुर से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस शहर में निवेश और उसके जरिये बेहतरीन रिटर्न की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। नीमराना में परियोजनाओं के विविधता भरे विकल्प देखे जा सकते हैं। एल्डिको, जेनेक्स्ट, वीपीए, अनंतराज के अलावा सफायर इंफ्राटेक और उत्कृष्ट ग्रुप जैसे बिल्डर्स यहां अपनी परियोजनाओं के साथ मौजूद हैं। साथ ही खास बात यह है कि यहां सिर्फ आवासीय ही नहीं बल्कि व्यावसायिक परियोजनाओं में भी निवेश किया जा सकता है।

रियल्टी सेक्टर की इन्वेस्टमेंट में कनेक्टिवटी ने हमेशा से अहम भूमिका निभाई है। बात नोएडा या गुडग़ांव की हो फिर मानेसर की, अच्छी पहुंच का फायदा हर शहर हर क्षेत्र को मिला है। अब कुछ ऐसा ही असर एनसीआर के अंतर्गत आने वाले नीमराना में दिखाई देता है। वैसे नीमराना की डिमांड बढऩे की पीछे, कनेक्टिविटी के साथ एक बड़ी वजह इस हिस्से में इंडस्ट्रियल विकास की संभावनाएं भी हैं। संभव है कि आपको भी इस संबन्ध में जानकारी हो कि देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई को दिल्ली से जोडऩे के लिए दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। जापान की वित्तीय और तकनीकी सहायता से तैयार होने वाली यह परियोजना 1483 किलोमीटार लंबी होगी। यही नहीं दिल्ली-एनसीआर से होते हुए हरियाणा फिर राजस्थान के रास्ते गुजरात होते हुए महाराष्ट्र तक पहुंचनी वाले इसे मार्ग पर नौ मेगा इंडस्ट्रियल जोन का प्रस्ताव रखा गया है।

क्या है प्रोजेक्ट की खासियत

खास बात यह भी है कि इस परियोजना में 200 से 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के 9 मेगा इंडस्ट्रियल ज़ोन के अलावा, हाई स्पीड फ्रेट लाइन, तीन पोर्ट और 6 एयरपोर्ट के साथ 6 लेन का एक्सप्रेस वे तो शामिल है ही साथ ही इसी के किनारे 4,000 मेगा वॉट का पॉवर प्लांट भी बनाया जाना है। इन सुविधाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में निवेश के लिहाज से यह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आकर्षण का केंद्र रहेगा। इनोवेटिव बिल्ड एस्टेट के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित बंसल कहते हैं कि यदि हम इस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को समग्र रूप में देखें तो निवेश के लिहाज से नीमराना बेहतरीन विकल्प है। गुडग़ांव से 84 किलोमीटर जबकि जयपुर से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस शहर में निवेश और उसके जरिये बेहतरीन रिटर्न की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। जानकार कहते हैं कि नीमराना में परियोजनाओं के विविधता भरे विकल्प देखे जा सकते हैं। एल्डिको, जेनेक्स्ट, वीपीए, अनंतराज के अलावा सफायर इंफ्राटेक जैसे बिल्डर्स यहां अपनी परियोजनाओं के साथ मौजूद हैं। साथ ही खास बात यह है कि यहां सिर्फ आवासीय ही नहीं बल्कि व्यावसायिक परियोजनाओं में भी निवेश किया जा सकता है। नीमराना में आवासीय परियोजना पर काम करने वाले ग्रैंड सफायर इंफ्राटेक के निदेशक पुनीत अग्रवाल का कहना है कि उनकी कंपनी ने बेहरोड में राष्ट्रीय राजमार्ग-8 के किनारे से भी एक ऐसी टॉउनशिप लॉन्च की है, जिसे इंटीग्रेटेड टॉउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें पर्यावरण और इकोलॉजिकल के संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्रॉपर्टी संसार के जानकार रजत महाजन के अनुसार पिछले कुछ समय में नीमराना तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में उद्योगों के आने से यहां आवासीय मांग में इजाफा हुआ है। साथ ही ऑर्गेनाइज्ड रिटेलिंग की डिमांड में भी इजाफा हुआ है।

हैं कई विकल्प उपलब्ध

व्यावसायिक संपत्तियों में निवेश की इच्छा रखने वाले उत्कृष्ट ग्रुप के प्रोजेक्ट द एट्रियम नीमराना को बेहतरीन विकल्प के तौर पर देख सकते हैं। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में स्टूडियो अपार्टमेंट भी तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा इस परियोजना में एक फूड कोर्ट, तीन स्क्रीन का मल्टीप्लेक्स इन्डोर गेम्स की व्यवस्था भी की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के बारे में ग्रुप के निदेशक कमलजीत सिंह कहते हैं कि नीमराना का यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि नीमराना में बसे लोगों को फिलहाल खरीददारी और मनोरंजन की अच्छी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। साथ ही इस परियोजना में हमने एक जगह पर कॉमर्शियल स्पेस व मनोरंजन के साधन के साथ स्टूडियो अपार्टमेंट का विकल्प भी मुहैया करा दिया है। साल 2017 तक बनकर तैयार होने वाली इस परियोजना में निवेश के विकल्प तलाशे जा सकते हैं। खास बात यह है कि इस परियोजना में हर आधुनिक सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। स्टेन्फोर्ड डेवलपर्स के डायरेक्टर मार्केटिंग आदर्श राणा कहते हैं कि भिवाड़ी की ही तरह नीमराना में भी फिलहाल रियल्टी विकास आरंभिक चरणों में है। ऐसे में इस जगह पर किया गया निवेश लाभ का सौदा बन सकता है। वैसे भी एनसीआर के अन्य शहरों की तुलना में इस तरफ लो-कॉस्ट हाउसिंग के अनेक विकल्प मौजूद हैं, जिसका लाभ न सिर्फ एंड यूजर्स बल्कि निवेशक भी उठा सकते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचान बना रहे इस क्षेत्र में निवेश लाभ का सौदा हो सकता है। एनसीआर के विभिन्न शहरों जैसे गुडग़ांव व नोएडा की ही बात करें तो यहां भी उद्योगों और मल्टीनेशनल कंपनियों के आने से रियल्टी गतिविधियों में तेजी आई। मौजूदा समय में भिवाड़ी और नीमराना भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

रेजिडेंशियल टॉउनशिप

इस लोकेशन पर रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर काम करने वालों में ग्रैंड सफायर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड भी एक है। पुनीत अग्रवाल और आलोक एस रस्तोगी द्वारा मैनेज की जाने वाली यह कंपनी इस क्षेत्र में 133 एकड़ से भी ज्यादा के क्षेत्रफल में टॉउनशिप का मॉडल प्रस्तुत कर चुका है। मॉडर्न टाउनशिप की रूपरेखा पर बनने वाली इस टॉउनशिप में सभी आधुनिक सुविधाओं का समावेश देखने को मिलेगा। इस क्षेत्र और प्रोजेक्ट के बारे में आलोक एस रस्तोगी का कहना है कि मौजूदा वक्त तकनीकी के इस्तेमाल से विकास करते हुए आगे बढऩे का है। इसीलिए भविष्य को अपने जेहन में रखते हुए हम बेहरोड में राष्ट्रीय राजमार्ग-8 के किनारे से भी एक ऐसी टॉउनशिप लाए हैं, जिसे राजस्थान सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। यही नहीं इंटीग्रेटेड टॉउनशिप के के रूप में बनने वाली इस नगरी में बसने वालों के लिए हर तरह की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। साथ ही पर्यावरण और इकोलॉजिकल संतुलन का इस प्रोजेक्ट में खास ध्यान रखने की योजना भी बनाई गई है। उनका यह भी कहना है कि इस लोकेशन पर टॉउनशिप की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि ये पूरा क्षेत्र 5000 एकड़ के क्षेत्र में फैले उद्योगों से घिरा हुआ है। यही नहीं यहां फिलहाल कोई प्रीमियम श्रेणी की रेजिडेंशियल टॉउनशिप भी नहीं है। ऐसे में ग्रांड सफायर की यह परियोजना नवीनतम तकनीक के जरिये तैयार होगी जिसमें हर तरह की सुविधा और जरूरत का ध्यान रखा जाएगा। यही नहीं मॉडर्न लाइफ स्टाइल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तो इसे तैयार किया ही जाएगा। साथ ही कार्बन इमिशन कम से कम हो और वेस्ट रीसाइकिलिंग को बढ़ाने का पूरा प्रबंध भी इस टाउनशिप में देखने को मिलेगा। कह सकते हैं कि ग्रांड सफायर की यह टॉउनशिप इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में काम करने के लिए आने वालों के सपनों के आशियाने जैसी होगी। ऐसे में इनवेस्टमेंट के अच्छे रिटर्न, या फिर अपने खुद के इस्तेमाल के लिहाज से भी आप इस लोकेशन को निवेश के विकल्प के तौर पर देख सकते हैं।

नीमराना एक ऐतिहासिक सिटी

नीमराना (वास्तविक उच्चारण नीमराणा) भारत के राजस्थान प्रदेश के अलवर जिले का एक प्राचीन ऐतिहासिक शहर है, जो बेहरोर तहसील में दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर दिल्ली से 122 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह 1947 तक चौहानों द्वारा शासित 14 वीं सदी के पहाड़ी किले का स्थल है। नीमराना का स्वामित्व मात्र 16 साल की उम्र के कुट्टू के पास है, जो इसके अंतिम शासक है और उन्होंने प्रीवी पर्स के उन्मूलन के बाद किले के रखरखाव में असमर्थ होने के कारण इसे नीमराना होटल्स नामक एक समूह को बेच दिया, जिसे इसने एक हेरिटेज (विरासत) होटल में बदल दिया। नीमराना से कुछ दूरी पर अलवर जि़ले में एक दूसरा किला केसरोली है, जो सबसे पुराने विरासत स्थलों में से एक है। इतिहासकार इसे महाभारत काल का मत्स्य जनपद बताते हैं। केसरोली में कोई विराटनगर के बौद्ध विहार के सबसे पुराने आप अवशेष देख सकते हैं, जहां पांडवों ने भेष बदलकर अपने निर्वासन के अंतिम वर्ष बिताये थे, जहां के पांडुपोल में हनुमान की लेटी हुई प्रतिमा, पुराने जलाशयों के अलावा संत शासक भतृहरि और तलवृक्ष की समाधियां हैं। यह किला दुर्लभ, काले हार्नस्टोन ब्रेकिया पत्थरों पर स्थित है और इसके प्राचीर से हरे-भरे खेतों के आकर्षक दृश्य दिखते हैं, जो 50-65 मीटर ऊंचा है। केसरोली किले का मूल पीछे की ओर छठी सदी में खोजा जा सकता है। यह भगवान कृष्ण के वंशज यादवों द्वारा निर्मित होने के कारण प्रसिद्ध है, जो 14 वीं सदी के मध्य में इस्लाम धर्म में परिवर्तित हो गये और उन्हें खानजादा कहा जाने लगा। यह विभिन्न लोगों के कब्ज़े में रहा, जैसे पहले मुगलों ने इस पर विजय हासिल की और 1975 में राजपूतों के हाथों में आने के पहले यह जाटों के कब्ज़े में रहा, जब अलवर राजघराने की स्थापना हुई।

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