निवेश का बेहतर विकल्प-सिप

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सिस्टैमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान निवेश के लिए काफी बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि एक औैसत निवेशक भी कम पैसा जमाकर, लंबी अवधि में बेहतर फायदा उठा सकता है। यह पूंजी निवेश करने का वह तरीका है, जहां पर मार्केट की दशा से बगैर प्रभावित होते हुए आपको पहले से ही निश्चित राशि हर महीने जमा करनी होती है। इसमें निवेशक के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस निवेश में रुपये की औसत कीमत देखी जाती है। मतलब जब बाजार नीचे जाता है तो शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य कम होने के कारण इस योजना की ज्यादा इकाइयां खरीदी जा सकती हैं।

निवेश की दुनिया में सिप का जलवा चल पड़ा है। सिप यानि सिस्मैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के अन्तर्गत निवेश करना लंबी अवधि के लिए फायदा का सौदा साबित हो सकता है। इसमे समय के अनुसार निवेश को एक सही दिशा मिल जाता है। इस प्लान का उद्देश्य है कि बेहतर भविष्य के साथ अन्य निवेशक से ज्यादा फायदा मिलना। सिप में निवेशक अन्य एक समय निवेशक से बेहतर रिटर्न रेट भी मिलता है। सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि यह प्लान है क्या? इस प्लान में निवेशक कुछ खास रकम को लगातार समय के लिए नियमित इंटरवल के साथ निवेश करते हैं। यह निवेश योजना नियमित बचत योजना जैसे पुनर्रावर्ती जमा योजना के समान होता है। स्ढ्ढक्क नियमित रूप से निवेश के सिद्धांत पर काम करता है। यह आपके आवर्ती जमा की तरह है जिसमें आप हर महीने कुछ छोटी राशि डालते हैं। सिप आपको एक बार में ज्यादा पैसा निवेश करने की जगह म्यूचुअल फंड में कम अवधि का (मासिक या त्रैमासिक) निवेश करने की आजादी देता है। यह आपको एक म्युचुअल फंड में एकसाथ 5,000 रूपये के निवेश की बजाय 500 रूपये के 10 बंटे हुये निवेश की सुविधा देता है । सिप एक प्रकार से मोटी रकम को कई हिस्सों में बांटकर निवेश करने की सरल प्रक्रिया है। इससे आप अपनी अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को प्रभावित किए बिना म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। SIP को बेहतर रूप से समझने के लिये Rupee cost averaging और धन के जुड़ते रहने की शक्ति (power of compounding) को समझना ज़रूरी है। यह एक औसत आदमी को निवेश करके ज्यादा फायदा पहुंचाने की प्रक्रिया है। इसमें एक औसत आदमी की पहुंच के भीतर म्यूचुअल फंड के सहारे निवेश किया जा सकता है। यह उन लोगों को भी निवेश करने योग्य बनाता है, जो एक बार में बड़ा निवेश करने के बजाय 500 या 1,000 रूपये नियमित रूप से निवेश कर सकते हैं। संभव है कि इसके माध्यम से छोटी-छोटी बचत करना शायद पहली बार में आकर्षक न लगे लेकिन यह निवेशकों को बचत की आदत डालता है और बढ़ते वर्षों में यह बेहतर रिटर्न देता है।
उदाहरण के लिए यदि आप इा योजना में प्रत्येक महीने 1000 रुपये का निवेश करते हैं तो 9 प्रतिशत की दर से 10 वर्षों आपका धन 6.69 लाख रुपये और 30 साल में 17.38 लाख रुपये और 40 साल में 44.20 लाख रुपये तक हो सकता है। सिप गलत समय और गलत जगह पर निवेश करने की आशंका से भी आपको बचाता है। हालांकि इसका असली फायदा निचले स्तर पर निवेश करने से मिलता है। सिप के प्लान में अपने धन कोष को सुरक्षित बनाये रखने के लिए लगातार निवेश करें,अपने निवेशों पर ध्यान केन्द्रित रखें और अपने निवेश के तरीके में अनुशासन बनाये रखें। हर महीने कुछ राशि अलग निकालने से आपकी मासिक आमदनी पर अधिक अन्तर नहीं पड़ेगा। आपके लिये भी बड़े निवेश हेतु इक_ा पैसा निकालने से बेहतर होगा कि हर महीने कुछ रूपये बचाये जायें। रूपये के जुड़ते रहने की शक्ति के बारे में जानकारों का कहना है कि एक व्यक्ति को हमेशा जल्दी निवेश शुरू करना चाहिये। जल्दी निवश्ेा शुरु करने से चक्रवृद्धि ब्याज मिलने का लाभ होता है। इस बात को एक उदाहरण से समझाया जा सकता है। मान लीजिए कि जहां राकेश 30 साल की उम्र से 1,000 रूपये हर साल बचाना शुरू करता है, वहीं भुपेश 35 साल की उम्र में इतना ही धन बचाता है। जब 60 साल की उम्र में दोनों अपना निवेश किया हुआ पैसा प्राप्त करते हैं तो राकेश का फंड 12.23 लाख होता है और भुपेश का केवल 7.89 लाख। इस उदाहरण में हम 8 प्रतिशत की दर से रिटर्न मिलना मान सकते हैं। यहां साफ है कि शुरू में 50,000 रूपये निवेश का फर्क आखिरी फंड पर 4 लाख से ज्यादा का प्रभाव डालता है। यह रूपये के जुड़ते रहने की शक्ति (power of compounding) के कारण होता है। जितना लंबा समय आप निवेश करेंगे उतना ज्यादा आपको रिटर्न मिलेगा। इस बात को एक दूसरे उदाहरण से समझा जा सकता है। माना कि राकेश हर साल 10,000 निवेश करने की बजाय 35 वर्ष की उम्र से हर 5 साल बाद 50,000 निवेश करता है इस स्थिति में उसकी निवेश किया धन उतना ही रहेगा (जो कि 3 लाख है) लेकिन उसे 60 साल की उम्र में 10.43 लाख का फंड (कोष) मिलता है। इससे पता चलता है कि देर से निवेश करने में समान धन डालने पर भी व्यक्ति शुरू में मिलने वाले चक्रवृद्धि ब्याज के फायदे को खो देता है। रूपये की कीमत का औसत मुख्य रूप से शेयरों में निवेश के लिये उपयोगी है। जब आप एक फंड में लगातार अंतराल पर समान धन का निवेश करते हैं तो रूपये की कम कीमत के समय में आप शेयर की ज्यादा यूनिट खरीदते हैं। इस प्रकार समय के साथ आपकी प्रति शेयर या (प्रति यूनिट) औसत कीमत कम होती जाती है। यह रूपये की औसत लागत की नीति होती है जो एक लंबी अवधि के समझदार निवेश के लिये बनाई गयी है। यह सुविधा अस्थिर बाजार में निवेश के खतरे को कम करती है और बाजार के उतार चढाव भरे सफर में आपको सहज बनाये रखती है। सिप के सहारे जो लागे निवेश करते हैं वह मार्केट के उतार के समय को भी उतनी ही अच्छी तरह संभाल सकते हैं। जैसे वह बाजार के चढ़ाव के समय को। सिप के मार्फत आप के निवेश की औसत लागत कम होती है, तब भी जब आप बाजार के अप एंड डाउंस सभी प्रकार के दौर से गुजरते हैं। सिप निवेश का बहुत ही आसान तरीका है। आपको केवल पूरे भरे हुये नामांकन फॉर्म के साथ चेक जमा करना होगा, जिससे म्यूचुअल फंड में आपके द्वारा कही गयी तारीख पर चेक जमा हो जायेगा और अपके खाते में शेयर यूनिट आ जायेंगी। इसके निवेश में पैसा डालने या निकालने पर कोई टैक्स या शुल्क नही है। इसमें कैपिटल गेन पर लगने वाला टैक्स (जहां भी लागू होता है) निवेश करने के समय पर निर्भर होता है।

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