टैक्स प्लानिंग और टैक्स सेविंग कैसे करें……?

0
72
various-dimensions-tax-planning-tax-saving
Google Image

लोग टैक्स बचाने के लिए तभी सोचते हैं, जब उनके ऊपर टैक्स कटौती की तलवार लटक रही होती है। हर कोई टैक्स बचाने के लिए नई तरकीब ढूंढऩे लगता है।टैक्स कटौती से कैसे बचा जाए, इसके लिए सही जानकारी और सही प्लानिंग का होना जरूरी है। आयकर अधिनियम की कौन सी धारा में किस प्रकार के टैक्स बचत का प्रावधान है और उसमें निवेश करने पर वर्तमान वित्तीय वर्ष में छूट का क्या प्रावधान है। इसके बारे में टैक्स प्लानिंग से जुड़े विभिन्न आयाम को समझें। देखने में आता है कि लोग टैक्स बचाने के लिए तभी सोचते हैं, जब उनके उपर टैक्स कटौती की तलवार लटक रही होती है। हर कोई टैक्स बचाने के लिए नई तरकीब ढूंढ़ रहा है। टैक्स कटौती से कैसे बचा जाए इसके लिए सही जानकारी और सही प्लानिंग का होना बेहद जरूरी है। आयकर अधिनियम की कौन सी धारा में किस प्रकार के टैक्स बचत का प्रावधान है और उसमें निवेश करने पर छूट का क्या प्रावधान है। आइए जानते हैं।

छूट का प्रावधान

सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत कर्मचारी सही प्लानिंग के अभाव में अच्छे जगह निवेश नहीं कर पाते हैं। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव में आवश्यक्ता से अधिक टैक्स चुकाते हैं। टैक्स से बचने के लिए निवेश के ढ़ेर सारे विकल्प मार्केट में उपलब्ध हैं, पर उसमें यह देखना बहुत ही जरूरी है कि कौन सा निवेश आपको टैक्स में बचत के साथ ही अच्छा रिर्टन भी देता है।
टैक्स बचाने के लिए निवेश करने से पहले निम्न बातों पर गौर करें।
1. तरलता
2. जोखिम और रिटर्न
3. महंगाई से सुरक्षा

निवेश के विकल्प

धारा 80-सी- आयकर अधिनियम के की धारा 80सी के तहत व्यक्तिगत करदाता 1 लाख तक की छूट प्राप्त कर सकता है। इस धारा के अंतर्गत पी.एफ तथा पी.पी.एफ कर्मचारी के द्वारा भविष्य निधि में जमा किया गया धन शामिल होता है। जीवन बीमा में अपने, जीवन साथी और बच्चों के नाम किया गया जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमियम के भुगतान की कटौती भी इस सेक्शन में शामिल होता है। यूलिप यानि यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान भी कर बचाने में कारगर साबित होते है।

होम लोन पर टैक्स सेविंग

होम लोन पर भी इनकम टैक्स की इस धारा से रिवेट मिलता है। साल भर में हाउसिंग लोन की किस्त में चुकाए गए मूलधन को भी इनकम टैक्स की इस धारा में कटौती के मद में रखा गया है। आपने जितना मूलधन चुकाया है, वह आपकी आय से घटा दिया जाता है। टैक्स रिवेट के लिए आपको नियोक्त्ता को अपने निवेश का सबूत देना पड़ता है। इसके बाद ही आपको इसका लाभ मिलता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर बांड

इंफ्रास्ट्रक्चर बांड पर 80-सी से टैक्स रिवेट पा सकते है। सरकार समय-समय पर सरकारी कंपनी का बांड मार्केट में बेचती है। इस बांड में निवेश पर भी इनकम टैक्स में छुट मिलती है। सरकार अपनी योजनाओं में जनता से बांड के रूप में पैसा लेती है और आरबीआई द्वारा जारी इन बांड्स पर टैक्स की छूट दी जाती है।

धारा 80-सीसीसी

इनकम टैक्स की धारा 80-सीसीसी के तहत पेंशन स्कीम में किया गया निवेश को शामिल किया जाता है। इसके तहत आप 1 लाख रूपये का निवेश कर सकते हैं।
धारा 80-डी
मेडिक्लेम पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान इस धारा के कारण आयकर से छूट का प्रावधान है। इसमें 15,000 हजार रूपये तक का छूट मिलता है। मेडिक्लेम पॉलिसी की शर्त आपके और यदि आप शादी-शुदा हैं, तो आपके बगो के साथ भी लागू होता है।
धारा 80-डीडी
इस धारा के तहत विक्लांग व्यक्त्ति के इलाज में हुए खर्च पर इनकम टैक्स रिवेट हासिल की जाती है। यह छूट लेने के लिए प्रमाणपत्र देना पड़ता है।
धारा 80-ई

उच्च शिक्षा के लिए वित्तिय सहायता प्राप्त लोन के उपर चुकाए गए ब्याज पर इस धारा के तहत टैक्स रिवेट का लाभ मिलता है।
धारा 24-बी
इस धारा के तहत हरेक वर्ष 1.5 लाख तक कर छूट का प्रावधान है। इसके लिए बैंक से वर्ष भर में किए हुए भुगतान का प्रमाण पत्र हासिल करना होता है।

धारा 10-(13ए)
इस धारा के तहत मकान किराये में छूट शामिल है। महानगर और छोटे शहर में किराये के मकान में रहने बाले लोग को टैक्स में रियायत दी जाती है। छूट लेने के लिए मकान मालिक से प्राप्त रसीद जमा करानी होती है।

LEAVE A REPLY