टॉयलेट का निर्माण वास्तु सम्मत करें…..

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कुलदीप सलूजा, वास्तु गुरु

वास्तुशास्त्र के अनुसार टॉयलेट में कमोड की बैठक इस प्रकार रखनी चाहिए कि बैठने वाले का मुंह उत्तर की ओर पीठ दक्षिण दिशा की ओर हो, किन्तु वर्षों के मेरे अनुभव के आधार पर मैंने पाया है कि कमोड पर पूर्व दिशा की ओर मुंह और पश्चिम की ओर पीठ करके बैठने से कोई हानि नहीं होती, जबकि इसके विपरीत पश्चिम दिशा की ओर मुंह और पूर्व दिशा की ओर पीठ करके बैठना ना तो शुभ होता है और ना ही वास्तु सम्मत होता है। टॉयलेट का निकलने वाला गंदा पानी उत्तर या पूर्व दिशा से निकलना शुभ होता है। प्रयास करना चाहिए कि यह गंदा पानी ईशान कोण से ना निकले। कभी भी घर के टॉयलेट, बाथरूम, किचिन इत्यादि के पानी की निकासी दक्षिण या पश्चिम दिशा से बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। नहाने के लिए बॉथरूम बनाने का सबसे अच्छा स्थान उत्तर या पूर्व दिशा होती है। जरूरत पडऩे पर बाकी दिशाओं में भी बनाए जा सकते हैं, जहां पानी के नल व शॉवर उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं। बाथरूम में गीजर आग्नेय कोण में ही लगाएँ। बाथरूम के पानी की निकासी भी उत्तर या पूर्व दिशा की ओर से होना चाहिए। बाथरूम में तेल, साबुन, शैम्पू, टॉवेल, झाडू़, ब्रश इत्यादि रखने के लिए आलमारी बाथरूम की दक्षिण या पश्चिम दिशा में बनानी चाहिए। आजकल आधुनिक घरों में हर बेडरूम के साथ एक से अधिक टॉयलेट एवं बाथरूम बनाने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। भवन बनाते समय ध्यान रहे कि मुख्य द्वार के सामने या दाँए-बाँए टॉयलेट का दरवाजा खुलना अशुभ होता है और इससे नकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में फैलती है। टॉयलेट में कमोड के ऊपर लटकता बीम या टाँड नहीं होनी चाहिए। बाथरूम में एक दर्पण अवश्य लगाना चाहिए।

आजकल टॉयलेट- बाथरूम सजाने का फैशन

आजकल टॉयलेट, बाथरूम बहुत ज्यादा सजाने का फैशन चल रहा है। फेंगशुई के अनुसार टॉयलेट ज्यादा सजाने से मकान में एकत्रित सकारात्मक ऊर्जा फ्लश हो जाती है। इसलिए टॉयलेट बाथरूम को ज्यादा सजाना वास्तु सम्मत नहीं है। यूं तो वास्तुशास्त्र एवं फेंगशुई दोनों के ही प्राचीन ग्रन्थों में घर के अंदर टॉयलेट को निषेध किया गया है। इसके विपरीत बाथरूम को घर के अंदर होना बहुत शुभ माना गया है। केवल उत्तर और पूर्व दिशा में, परन्तु आज की जीवन-शैली में छोटे से मकान में भी तीन-तीन चार-चार टॉयलेट बाथरूम होते हैं। ऐसे में टॉयलेट, बाथरूम बनाते समय कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें।

कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें

-उत्तर और पूर्व दिशा में प्लेटफॉर्म बनाकर भारतीय शैली का कमोड़ ना लगाएं। इससे उत्तर और पूर्व दिशा ऊंची हो जाती है जो कि महत्वपूर्ण वास्तुदोष होता है। इन दिशाओं में वेस्टर्न स्टाइल के कमोड लगाना चाहिए, जिससे बाथरूम के फर्श का लेवल घर के फर्श के लेवल से ऊंचा नहीं होता।
-दक्षिण और पश्चिम दिशा में प्लेटफॉर्म बनाकर भारतीय शैली का कमोड लगा सकते हैं, परन्तु प्रयास करें कि, यह प्लेटफॉर्म बहुत ऊंचा ना बने।
-उत्तर व पूर्व दिशा स्थित टॉयलेट बाथरूम के फर्श का लेवल घर के फर्श से थोड़ा नीचा रख सकते हैं ताकि बाथरूम से पानी घर के कमरों में ना आए, जबकि दक्षिण व पश्चिम दिशा में बने टॉयलेट बाथरूम के फर्श का लेवल घर के फर्श के लेवल के बराबर ही रखे और पानी बाहर ना इसके लिए बाथरूम के दरवाजे पर पत्थर का राईजर लगा दें।
-सामान्यत: सभी वास्तुविद् नैऋत्य कोण में टॉयलेट-बाथरूम को वास्तु सम्मत ना मानते हुए उसका विरोध करते हैं। व्यावहारिक अनुभव में आया है कि नैऋत्य कोण में भी टॉयलेट, बाथरूम बनाया जा सकता है, परन्तु यहां टॉयलेट, बाथरूम बनाते समय एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि, टॉयलेट, बाथरूम के फर्श लेवल बाकी घर के फर्श के लेवल से एक सूत भी नीचा नहीं होना चाहिए और न ही इस कोण में भवन के अंदर या बाहर पानी की निकासी के लिए कोई चेम्बर नहीं बनाना चाहिए।

भ्रामक धारणा

एक भ्रामक धारणा यह भी है कि सीढिय़ों के नीचे टॉयलेट नहीं बनाना चाहिए। प्राचीन ग्रन्थों में तो इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, परन्तु वर्षों के वास्तु परामर्श के दौरान अनुभव में आया है कि सीढ़ी के नीचे टॉयलेट, बाथरूम होने से कोई वास्तुदोष उत्पन्न नहीं होता है। मैंने ऐसे कई परिवार सुखी एवं समृद्धशाली परिवार देखे हैं, जिनके यहाँ वर्षों से सीढ़ी के नीचे टॉयलेट, बाथरूम हैं। मेरे यहां भी पिछले 50 वर्षों से एक टॉयलेट, बाथरूम सीढी के नीचे बना हुआ है।
बाथरूम का परिवार पर प्रभाव
घर चाहे छोटा हो या बड़ा, साधारण हो या महल हो, परन्तु बाथरूम किसी भी भवन की पहली आवश्यकता होती है। घर में किसी अन्य कमरे ड्राईंगरूम, लिविंग रूम, स्टडी रूम इत्यादि के बिना तो एक बार काम चल भी सकता है, परन्तु बाथरूम के बिना बिल्कुल भी नहीं। आजकल तो बाथरूम की साज-सज्जा पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा है। इसलिए बाथरूम से सम्बन्धित भवन सामग्री बनाने वाले निर्माता भी एक से एक सुदंर अधिक से अधिक सुविधाजनक टाईल्स, टोटी, शॉवर इत्यादि बना रहे हैं। वास्तुशास्त्र में घर पर बाथरूम का प्रभाव किस प्रकार पड़ता है। उसकी स्थिति का वर्णन विस्तृत रूप से किया गया है जो इस प्रकार है।
-यदि घर के अगले भाग के दांये हाथ की खिड़की वाले भाग में ही बाथरूम हो, अर्थात यही खिड़की बाथरूम की खिड़की हो तो ऐसा आदमी आध्यात्मिक क्षेत्र में बहुत तरक्की करता है। यदि इस खिड़की के साईड में पूजाघर बाथरूम के दरवाजे की सीध में हो तो इस घर के पिता को प्रभु का आशीर्वाद रहता है। यदि यह खिड़की घर की अन्य खिड़कियों से छोटी हो और साथ ही यह खिड़की हमेशा बंद रखी जाती है तो यह दर्शाता है कि इस घर का जन्म लेने वाला बेटा बहुत ज्यादा तरक्की नहीं कर पाएगा, गरीब ही बना रहेगा और इस घर का मुखिया भी पूरी जिंदगी अग्नि परीक्षा से ही गुजरता रहेगा, अर्थात कठिनाईयों से ही जुझता रहेगा।
-यदि घर के अगले भाग के बांये हाथ की खिड़की बाथरूम की हो तो यहां रहने वालों के जीवन की शुरूआत में घर की मालकिन को बहुत मेहनत और परिश्रम करना पड़ा और कुछ वर्षो बाद जाकर यह स्थिति निर्मित होती है कि वह दूसरों को भी दान आदि करने की स्थिति में आ जाती है। उसकी मानसिकता दूसरों की मदद एवं दानपुण्य करने की रहती है। वह ज्ञानवान होती है। इसकी एक बेटी को शादी में या शादी को सेटल होने में बहुत समय लगता है।
-किचिन और बाथरूम एक साथ हो तो वहां रहने वालों का जीवन काफी कठिन होता है और उनका स्वास्थ्य भी खराब रहता है और व्यापार में लाभ भी बहुत कम होता है। -जिन घरों में रसोईघर या बाथरूम एक लाईन में बने होते हैं तो ऐसे घर के मुखिया का भाई गरीब होता है और उसे शादी के बाद सेटल होने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है और घर की कन्या नाखुश और अशांत रहती है।
-यदि घर के हॉल के अंदर गंदे पानी की निकासी, चेम्बर हो या हॉल बहुत छोटा हो, हॉल एक पूंछ जैसा हो, या किसी बाथरूम से सीधे जुड़ा हो तो ऐसा आदमी जोड़-तोड़ वाला होता है और मोक्ष प्राप्त करने का प्रयास करता है और उस घर के एक व्यक्ति को शादी में बाधा आती है और जमीन-जायदाद के काम से अच्छा पैसा कमाता है, परन्तु हमेशा उसको मानसिक अशांति रहती है। वह हमेशा दूसरो के उपकार में रहता है और उसे जीवन में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
-यदि पूजा घर एकदम बाथरूम के सामने हो या एकदम उसके पास हो तो ऐसा व्यक्ति भौतिक सुखों से दूर होकर आध्यात्म में रुचि रखता है तथा नाम और सम्मान प्राप्त करता है।
-यदि दम्पत्ति का बेडरूम आगे से बड़ा एवं पीछे से छोटा हो, या उसके साथ बाथरूम जुड़ा हुआ हो या बेडरूम में जाने का रास्ता बहुत संकरे गलियारे से हो तो उस घर के मुखिया को तरक्की में विघ्न बाधाओं का सामना करना पड़ता है और उसकी खुशियों में कमी रहती है। यदि बेडरूम के साथ कोई नल लगा हो या कोई गलियारा बेडरूम के सामने पड़ता हो तो मुखिया की पत्नी किसी की कठपुतली होगी, परन्तु होगी धार्मिक प्रवृत्ति की।
-यदि स्टोर रूम किसी गलियारे में हो, संकरी जगह हो और वहाँ बाथरूम हो तो उस घर का मुखिया जिंदगी भर उदास रहता है और मोहमाया से परे होता है। निश्चित ही वह मेहनत करके खूब धन कमाता है, परन्तु हमेशा अशांत और नाखुश रहता है।
-कई घरों के बड़े बेडरूम के अंदर टॉयलेट, बाथरूम से अलग कमरे में वॉश-बेसिन होता है। ऐसे घरों की महिलाएँ चंचल होती हैं और उस घर के पुरुष शीघ्र समाप्त होने वाली खुशियों को पाने की लालसा रखते हैं। ऐसे घरों के लोग सात्विक प्रवृत्ति के नहीं होते हैं और अधर्मी होते हैं।

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