रियल एस्टेट सेक्टर के हब के रूप में विकसित हो रहा उज्जैन

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उज्जैन में प्राचीन मंदिरों के सामने मॉल कल्चर धीरेधीरे अपनी पैठ बना रहा है। मल्टीप्लेक्स की चकाचौंध में लोगों की जीवनशैली घुल मिल गई है। व्यवसाय और रहने के लिए शहर लोगों की पसंद बनता जा रहा है। बाबा महाकाल के दर्शन प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही बनी रहती है। १२ वर्ष में लगने वाले कुंभ के मेले में बड़ी संख्या में लोग यहां आते है। विकास की अपार संभावनाएं होने के कारण शहर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
निवेश का नया केंद्र
मध्यप्रदेश के प्रमुख नगरों में आज उज्जैन कि गिनती होती है। मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के किनारे बसा यह शहर प्रमुखता धार्मिक नगरी है लेकिन समय के साथ इसके स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है और आधुनिकता अपने पैर पसार रही है। शहर आज प्रदेश में निवेश के केंद्र के रूप में उभर रहा है। १२ वर्ष में लगने वाले कुंभ के मेले में बड़ी संख्या में लोग यहां आते है। विकास की अपार संभावनाएं होने के कारण शहर तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले की जनसंख्या वर्ष २०११ में हुई जनगणना तक लगभग बीस लाख थी, जिसमें फिलहाल काफी वृद्धि हो चुकी है। वर्तमान में रियल एस्टेट की नामी कंपनियों ने उज्जैन की तरफ रूख किया है। कॉमर्शियल और रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट आकार ले रहे है। दोनों की डिमांड तेजी से देखी जा रही है।

नॉलेज सिटी से बदलेगी तस्वीर
उज्जैन में ‘नॉलेज सिटी’ को विकसित किया जाना प्रस्तावित है। योजना में थोड़ा बदलाव किया गया है। किसी एक क्षेत्र में होने वाले इतने बड़े निवेश की संभावनाओं के कमजोर होने की वजह से यह परिवर्तन हुआ है।दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी)परियोजना के तहत नॉलेज सिटी को बनाया जाना है और इसके लिए पहले से ही एसपीवी का गठन किया जा चुका है। लगभग ‘1,200 एकड़ में नॉलेज सिटी को बनेगी। शिक्षा के क्षेत्र में इतने बड़े निवेश के साथ अब आधी जमीन को औद्योगिक विकास के लिए दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा, ‘अब इस परियोजना को ‘विक्रम उद्योग नगरी के नाम से जाना जाएगा। इसका नाम उज्जैन के मशहूर राजा विक्रमादित्य के नाम पर रखा गया है।’अधिकारी ने कहा, ‘डीएमआईसी ट्रस्ट ने परियोजना फंडिंग की अनुमति दे दी है। डीएमआईसी इस परियोजना में 59.50 करोड़ रुपये इक्विटी में निवेश करेगी जबकि इसमें कर्ज की मात्रा 327.80 करोड़ रुपये होगी। राज्य सरकार भी बतौर हिस्सेदार इस परियोजना के लिए जमीन में निवेश करेगी। परियोजना के लिए विक्रम उद्योगपुरी कंपनी लिमिटेड के नाम से एसपीवी का गठन पहले ही किया जा चुका है। यह परियोजना देवास-उज्जैन रोड के समीप नरवर गांव में विकसित की जाएगी। पहले की योजना के उलट अब यहां पर औद्योगिक विनिर्माण, रिहायशी और व्यावसायिक, सार्वजनिक और सरकारी भवन होंगे। साथ ही इसमें मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों को भी स्थापित किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, ‘परियोजना की अनुमानित लागत 808.60 करोड़ रुपये है और इसका परिचालन 2016-17 से शुरू हो जाएगा।’पहले की योजना के मुताबिक कुल 442 हेक्टेयर भूमि को नॉलेज सिटी के तौर पर विकसित किया जाना था। पूरी परियोजना को 40 लाख वर्गमीटर क्षेत्रफल में विकसित किया जाएगा और इसमें करीब 11,000 करोड़ रुपये से लेकर 13,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। अधिकारी ने कहा , ‘इससे 78,000 नौकरियों का सृजन होगा और इसमें 56,000 से अधिक लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा सालाना 16,000 छात्रों को पढऩे का मौका मिलेगा।’
वाई-फाई सिटी बनाने की तैयारी
उज्जैन शहर के विकास को लेकर विशेष तौर पर योजनाएं बनाई जा रही है। खासकर सिंहस्थ २०१६ के मद्देनजर कंपनियां यहां आने के लिए तैयार है। कुछ कंपनियों के प्रोजेक्ट भी शुरू हो चुके है वहीं कुछ को स्वीकृति का इंतजार है। देश की प्रमुख एक निजी टेलीकॉम कंपनी द्वारा शहर को वाई-फाई सिटी बनाने की तैयारी भी चल रही है। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है। शहर के प्रमुख ४८ स्थानो पर टॉवर लगाए जा रहे है। स्थानीय प्रशासन भी इसमें पूरा सहयोग कर रहा है।
पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण
उज्जैन एक धार्मिक नगरी है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में से बाबा महाकालेश्वर यहां विराजमान है। महाकालेश्वर मंदिर का मान्यता विभि्न्ना पुराणों में विस्तृत रूप से वर्णित है। महाकवि तुलसीदास से लेकर संस्कृत साहित्य के अनेक प्रसिद्ध कवियों ने इस मंदिर का वर्णन किया है। लोक मानस में महाकाल की परंपरा अनादि है। १२ साल में यहां कुंभ का मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से लोग शामिल होने आते है। उज्जैन भारत की कालगणना का केंद्र बिन्दु था और महाकाल उज्जैन क अधिपति देव माने जाते हैं। महाकाल दर्शन के लिए लोग देश-विदेश से आते है। इसके अलावा अनेक धार्मिक पौराणिक एवं एेतिहासिक स्थान हैं, जिनमें गोपाल मंदिर, चौबीस खंभा देवी, चौसठ योगिनियां, नगर कोट की रानी, हरसिद्धि माता मंदिर, गढ़कालिका, काल भैरव, विक्रांत भैरव, मंगलनाथ, सिद्धवट, बिना नींव की मस्जिद, गज लक्ष्मी मंदिर, बृहस्पति मंदिर, नवगृह शनि मंदिर, भर्तृहरि गुफा, पीरमछन्दर नाथ समाधि, कालिदा देह पैलेस, कोठी महल, घंटाघर, जंतर-मंतर महल, चिंतामन गणेश आदि प्रमुख है।
बढ़ रहा शहर
वर्तमान परिदृश्य में शहर दो भागों में विभाजित हो चुका है। एक पुराना और दूसरा नया शहर। खासतौर से इंदौर रोड, देवास रोड व आगर-मक्सी रिंग रोड के पास नया शहर बस रहा है। कई बड़े डेवलपर्स के रेजिडेंशियल अपार्टमेंट, प्लॉट, रॉ हाउस आदि प्रोजेक्ट यहां चल रहे है। कलरफुल, इटालियन, शो केस, मॉड्यूलर आदि किचन रूप की वैरायटी यहां लोगों को दी जा रही है। इन्हें लोग पसंद भी कर रह है। नवरात्रि ऑफर्स भी शुरू हो चुके है। डेवलपर्स द्वारा बुकिंग पर डिस्काउंट दिया जा रहा है। वहीं उज्जैन विकास प्राधिकरण की कई आवासीय योजनाएं चल रही है। इन योजनाओं में हर वर्ग के लोगों को ध्यान में रखते हुए आवासों का निर्माण हो रहा है। पहली बार आगर रोड पर यूडीए कॉलोनी विकसित करने जा रहा है। करीब १०० करोड़ में यह नई कॉलोनी बनेगी। मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखने के साथ-साथ मनोरंजन केंद्र और शॉपिंग सेंटर तक खोलो जाएंगे। अब तक यूडीए ने देवास व इंदौर रोड पर ही आवासीय कॉलोनियां बनाई है। सिहंस्थ के मद्देनजर शहर के लिए नई-नई परियोजनाएं तैयारी की जा रही है। इन परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार भी तत्परता दिखा रही है।
इंदौर से कनेक्टिविटी ने खोले संभावनाओं के द्वार
उज्जैन के हो रहे तेजी से विकास के पीछे प्रमुख वजह इसकी इंदौर शहर से कनेक्टिविटी का होना है। इंदौर को मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहा जाता है। डेवलपमेंट के कारण इंदौर आज लगातार फैल रहा है। हालात यह है कि गांव शहर में शामिल होने के लिए अग्रसर है। उज्जैन और इंदौर की सीमा के बीच महज ४५ किमी का अंतर है। दोनों शहरों को जोड़ने वाली सड़क फोरलेन है और अधिकतम एक घंटे में यह दूरी तय की जा सकती है। लिहाजा लोग व्यवसाय इंदौर में कर रहे है और रहने के लिए उज्जैन को अपना ठिकाना बना रहे है।

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