वसीयत में होता है संपत्ति के बारे में पूरी जानकारी

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वसीयत सबसे महत्वपूर्ण कानूनी कागजी दस्तावेज होता है। प्रॉपर्टी की दुनिया में इसका महत्व बहुत ज्यादा है। इसमें वसीयत करने वाला अपनी मौत के बाद जायदाद के बंटबारे के बारे में वर्णन किया होता है। इसमें पूरे चल और अचल संपत्ति के बारे में ब्यौरे लिखा होता है। संपत्ति के अधिकार को पुख्ता करने में इसका रोल महत्वपूर्ण होता है। वसीयत केवल संपत्ति का अधिकार प्रदान ही प्रदान नहीं करता है, बल्कि इससे कई तरह के टैक्स के फायदे भी उठाये जा सकते हैं। वसीयत के जरिये संपत्ति को ट्रांसफर करने के बाद एक अल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल की जा सकती है। यहां हम आपको वसीयत के बारे में कई महत्वपूर्ण बात बताने जा रहे हैं। वसीयत के बिना संपत्ति का अधिकार नहीं मिल पाता है। आपके दिमाग में एक प्रश्न बार-बार आता होगा कि मेरी प्रॉपर्टी को मेरे जाने के बाद क्या होगा। किसे इसे वाजिब हक के रूप में दिया जाय। इन सभी परेशानी को हल करने के लिए आप पहले जाने की वसीयत बनता कैसे है।
समझें वसीयत बनाने के सटीक स्टेप
स्टेप वन- आपका वसीयत एक सादे कागज पर साफ राइटिंग में लिखी या टाइप्ड होना चाहिए।
स्टेप टू-वसीयत बनाने के बाद आखिर में दो गवाहों के समक्ष हस्ताक्षर करें। गवाह भी अपना पूरा नाम और पता लिखकर हस्ताक्षर करें। एक बात का ज़रूर ध्यान रखें कि गवाह की उम्र वसीयत करने वाले से कम होनी चाहिए।
स्टेप थ्री- आप अपने वसीयत में लिखे कि मैं अपने होशोहवाश में, पूरी तरह से स्वस्थ मानसिक अवस्था में वसीयत कर रहा हूं। इसमें आप अपनी शैक्षणिक योग्यता का जिक्र जरूर करें।
स्टेप फोर-आप अपने वसीयत यह जरूर लिखें कि इस तारीख से पहले ( तारीख और समय का जिक्र जरूर करे) में लिखा जाना चाहिए कि इस तारीख के पहले की कोई भी वसीयत मान्य नहीं है। वसीयत का एक इग्जेक्यूटर (मरने पर संपत्ति बांटने वाला) होना चाहिए।
स्टेप फाइव-वसीयत के हर पृष्ठ पर संख्या डालकर हस्ताक्षर करें। अंत में पूरे पृष्ठ पेज संख्या लिखें। कहीं करेक्शन किया गया हो, तो वहां भी हस्ताक्षर जरूर करें।
स्टेप सिक्स-वसीयत कहां रखी गई है, इस बारे में इग्जेक्यूटर और वसीयत का लाभ पाने वालों को पता होना चाहिए। एक ऑप्शन अपने वकील के पास वसीयत की कॉपी रखने का भी हो सकता है।

इन बातों का भी रखें ख्याल
-इसकी भाषा भाषा सीधी और सरल होनी चाहिए।
-वसीयत पूरा हो जाने के बाद यदि आपको कुछ और याद आने लगा हो तो उसे अलग से लिखकर वसीयत में जोड़ा जा सकता है। इसे पूरक कहते हैं। यदि एक ही चीज़ कई लोगों को देनी है, तो उसकी कीमत न लिख कर उसका प्रतिशत लिखें।
– इस बात का भी गौर रखें कि यदि वसीयत लिखने में बहुत ज्यादा करेक्शन हो गए हों, तो इसकी नई कॉपी बनाना ही मुनासिब होगा। अगर वसीयत में किसी तरह के ट्रस्ट के बनाए जाने की बात हो, तो उस ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
– आप चाहें तो वसीयत की विडियोग्राफी भी करा सकते हैं। इसमें हर बात साफ-साफ बोलकर और डॉक्युमंट दिखाकर रिकॉर्डिंग की जानी चाहिए।

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