हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती

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    hallmark
    http://www.mygoldguide.in/gold-hallmarking-why-and-how

    हमारे संवाददाता की ज्वैलर से बातचीत पर आधारित

    • सोना बहुमूल्य धातु होने के साथ-साथ आभूषण के रूप में अपने देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि निवेश के रूप में सोना का सबसे ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है। अपने देश में आयातित सामानों की लिस्ट में यह प्रमुख है। एक प्रकार से देश की अर्थव्यवस्था पर इसका अच्छा खासा असर रहता है।  लेकिन सोना कितना सोना है, इस बात में भी दम है। सोना खरीदने के समय काफी सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर, इसकी शुद्धता पर खास गौर करना चाहिए। सोने की शुद्धता को ध्यान में रखते हुए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने हॉलमार्क के रूप में एक निशान तय किया। यह निशान इस बात का प्रमाण है, जो यह बताता है कि सोना में कितनी शुद्धता है और कितनी मिलावट। क्योंकि ग्राहकों के लिए सोने की पहचान खुद करना काफी मुश्किल भरा काम है, लेकिन हॉलमार्क लगी ज्वैलरी खरीद कर वह सभी शंकाओं से मुक्त हो सकते हैं। यह वर्ष 2000 से शुरू होता है, इसलिए वर्ष 2000 के लिए ए और इसी तरह 2002 के लिए बी। इससे आगे भी यही क्रम चलता है। सोने की शुद्धता को हमेशा कैरेट के हिसाब से मापा जाता है। कैरेट इस बात की पहचान है कि सोना कितना शुद्ध है।
    • बदलता वक्त
    • वक्त बेशक बदल गया है और इसी के साथ ज्वैलरी पहनने के तौर-तरीके भी बदल गए है, लेकिन नहीं बदला है तो सोने के प्रति मोह। जी-हां, सोना आज तीस हज़ार के पार पहुंच गया है, लेकिन सोने के कद्रदानों की आज भी कमी नहीं है। जहां कुछ लोगों के लिए सोना खरीदने की कोई न कोई वजह होती है मसलन शादी-ब्याह वगैरह, तो वहीं कुछ लोग शौकिया तौर पर या फिर निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदते रहते हैं। मतलब है कि सोना आपके सौंदर्य में वृद्धि के साथ-साथ, भविष्य में निवेश के लिए भी अच्छा साधन है। यानि एक पंथ और दो काज।
    • गहरा झटका
    • लेकिन इस एक पंथ और दो काज में अक्सर उस समय आपको गहरा झटका लगता है, जब आप किसी कारणवश अपने सोने को बेचने जाते हैं तो आपको पता चलता है कि आपके सोने का वह मूल्य आपको नहीं मिल रहा, जिस कीमत में आपने सोने को खरीदा था। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आपके सोने में मिलावट बताई जाती है। और तो और आपने बड़े ही मनोयोग से अपने जमा किए हुए पैसे से अपने लिए सोने की एक टॉप्स ली और दूसरे दिन आपको अपने पड़ोसी से इस बात की जानकारी मिलती है कि उनके रिश्तेदार कल ही सोने का आभूषण आपसे 2, 000 रुपए कम रेट पर लेकर आयी। लग गयी न आपको 2,000 रुपए की चपत। असल में सोना है ही ऐसी चीज़, इसमें न तो  मिलावट का पता चलता है और न इसके  सही रेट का। क्योंकि सोना खरीदते वक्त आपको न चाहते हुए भी दुकानदार की बातों पर भरोसा करने के अलावा आपके पास कोई चारा नहीं होता। सोने की इसी शुद्धता को लेकर उठ रहें कई सवालों को ध्यान में रखते हुए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने हॉलमार्क के रूप में एक निशान तय किया। यह निशान इस बात का प्रमाण है, जो यह बताता है कि सोना में कितनी शुद्धता है और कितनी मिलावट। क्योंकि ग्राहकों के लिए सोने की पहचान खुद करना काफी मुश्किल भरा काम है, लेकिन हॉलमार्क लगी ज्वैलरी खरीद कर वह सभी शंकाओं से मुक्त हो सकते हैं। यह वर्ष 2000 से शुरू होता है, इसलिए वर्ष 2000 के लिए ए और इसी तरह 2002 के लिए बी। इससे आगे भी यही क्रम चलता है। सोने की शुद्धता को हमेशा कैरेट के हिसाब से मापा जाता है। कैरेट इस बात की पहचान है कि सोना कितना शुद्ध है।
    • करैट
    • इसकी शुरूआत हमेशा 24 करैट से होती है। लेकिन 24 कैरेट में ज्यादा लोच यानि नरम होने के कारण इससे आभूषण नहीं बनाए जा सकते हैं। इससे  बिस्कुट और छड़ ही बनाए जा सकते हैं। 24 करैट के सोने में 99.9 प्रतिशत शुद्व सोना होता है। इसके बाद आता है 22 कैरेट यानि की 91.66 प्रतिशत सोना और इसे पहचानने के लिए आभूषण पर 916 लिखा होता है। इसी तरह से जैसे-जैसे कैरट घटती जाती है, उसकी शुद्धता भी उसी प्रकार से घटती जाती है। आभूषण बनाने के लिए हमेशा 22 करैट सोने का ही प्रयोग किया जाता है। सोने को ठोस यानि मज़बूत बनाने के लिए इसमें केडीएम या फिर तांबे का प्रयोग किया जाता है। जिससे कि मनचाही डिज़ाइन उकेरी जा सके।
    • कीमत
    • ये तो हुई शुद्वता की बात। अब आते हैं इसकी कीमत पर। आमतौर पर सोने के गहने बनवाते समय इसकी कीमत दुकानदार अखबार में छपे कीमत से महज 400 रुपए ही कम लगाते हैं जबकि वास्तव में इसकी कीमत 2,000 रुपए कम बैठती है। कीमत के गणित को आप इस प्रकार से समझ सकती हैं। मान लीजिए कि 24 कैरेट यानि 24 ग्राम  सोने का मूल्य 24,000 रु. प्रति दस ग्राम है तो इस हिसाब से एक कैरट के सोने का मूल्य 2,400 हुआ तो उसी आधार पर 22 कैरट सोने का मूल्य प्रति दस ग्राम 22,000 रु.होगा।
    • सोनेे की ज्वैलरी खरीदते समय कुछ खास बातों को अवश्य ध्यान में रखें।
    • सोना खरीदने से पहले एक नज़र हमेशा इसके कंरट रेट पर डालें क्योंकि सोने का रेट हर दिन बदलता रहता है
    • अखबार के रेट का सोना हमेशा एक दिन पहले का होता है, अत: इस पर न जाएं।
    • आप निवेश के उद्देश्य से आभूषण ले रहें हैं तो या फिर डेली यूज के लिए, हमेशा हॉलमार्क के निशान वाली ज्वैलरी लें। इसमें  शुद्धता तो रहती ही है। साथ में यदि आप इसे कारणवश बेचना चाहते हैं तो इसमें पूरे पैसे मिलते हैं।
    • सोना खरीदते समय सस्ते के चक्कर में कभी न पड़े। ऐसे में ठगे जाने का पूरा अंदेशा रहता है। बल्कि रेट के बारे में खुद चौकस रहें।
    • ज्वैलर से बिल की पक्की रसीद लेना न भूलेें। ताकि किसी भी धोखाधड़ी होने पर क्लेम किया जा सके।
    • यदि जड़कन वाले आभूषण ले रहे हैं तो हमेशा जड़कन अलग से तुलवाएं। क्योंकि सोने के अपेक्षा ये काफी सस्ते होते हैं।
    • आभूषण बनवाते समय उसके मेकिंग चार्ज को इग्नोर न करें। आज कल वैसे सभी ज्वैलर 10 प्रतिशत के हिसाब से मेकिंग लेते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि आपको कम से कम मेकिंग देना पड़े ।
    • आभूषण लेते समय ये तीन चीज़ें देखना कभी न भूलें। हॉलमार्क निशान, हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो तथा बीआईएस लोगो।

    देखभाल

    1  सोने के ज्वैलरी की देखभाल बागवानी, sports, घरेलू काम करते समय सोने के गहने उतार दें, क्योंकि रसायनों के संपर्क में आकर ये खराब हो सकते हैं।

    1  गर्म पानी के टब और स्वीमिंग पूल में स्थित रसायन सोने के  रंग को  फीका कर सकता है।

    1   सीधी धूप और अचानक तापमान में हुए परिवर्तन से भी इसका रंग फीका पड़ सकता है।

    1   कम से कम साल में एक बार अपने ज्वैलर के पास अपने गहनों की सफाई, मरम्मत के लिए जाएं। इसकी टूट-फूट, ढीले हुए पत्थर की जांच तथा चमक बरकरार रखने के लिए इसकी पॉलिश भी ज़रूरी है।

    1  गोल्ड ज्वैलरी को आपस में उलझने व रगडऩे से बचने के लिए एक साथ ढेर में न रखें।

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