जब लेना हो बालकनी का मजा

0
176

सीमा झा (इंटीरियर एक्सपर्ट)

बेतहाशा बढ़ती मंहगाई व जनसंख्या नें आवासीय समस्या को पहले के मुकाबले कई गुणा मंहगा कर दिया है। परिणाम स्परूप बढ़ते लोग और रहने के लिए कम पड़ते जा रहे स्पेस। लेकिन रोटी, कपड़ा और मकान की ज़रूरत तो सभी को होती है और हम सभी इस जरूरत को पूरा करने के लिए तत्पर रहते हैं। हां इतना ज़रूर है कि बदलते वक्त के साथ-साथ इन जरूरतों में व्यापक रूप से फेर-बदल देखने को मिल रहे हैं। इन्हीं फेर-बदल का एक रूप घर एक हिस्सा बालकनी भी है।

आजकल के अर्पाटमेंट कल्चर ने घर की परिभाषा की बदल कर रख दी है और छत व आंगन की धूप को समेट कर बालकनी में बिखेर दिया है। इसलिए लोगों की जरूरतो व सुविधाओं को देखते हुए बहुमंजिला इमारतों में बालकनी कॉन्सेप्ट खुब देखा जा रहा है ताकि आप जाड़े की कुनकुनी धूप से लेकर, गर्मी की सुहानी शाम व बरसात की नन्हीं बूंदो का मजा उठा सकें। इसमें भी आजकल एक की बजाय दो बालकनी का कॉन्सेप्ट ट्रेंड में आ गया है यानी एक आगे की तरफ से और एक घर के पीछे के साइड से। ताकि एक बालकनी का उपयोग आप बतौर आंगन की तरह घरेलू कार्य के लिए कर सकें और दूसरी बालकनी में आप अपने फैमली या अपने दोस्तों के संग बैठकर चाय या बातचीत का लुत्फ उठा सकें। लेकिन बालकनी में बैठने का मजा तभी आता है, जब आपकी बालकनी साफ-सुथरी और करीने से सजाया गया हो। और यदि आपको इसमें कोई परेशानी आ रही है, तो हम बताने जा रहे हैं इसका समाधान।

–  आगे वाले बालकनी में स्पेश के हिसाब से आप चेयर और टेबल ऐरेंजमेंट करें। अपनी पसंद के हिसाब से आप प्लास्टिक,वुडेन,स्टील या फिर केन के चेयर का चुनाव कर सकती हैं। ताकि आप यहां पर आकर चाय की चुस्की व पकौड़े का मजा ले सकें। यदि बॉलकनी ज्यादा बड़ी है तो चेयर की जगह केन वाले सोफे भी रख सकते हैं।

-बालकनी में गमलें फर्श पर रखने के बजाय बालकनी में बाहर की तरफ से लगे रॉड वाले गमले के  स्टैंड लगवाएं ताकि बालकनी में पर्याप्त स्पेश हो आप बालकनी में रखें फर्नीचरों से न टकराएं।

-यदि आप बालकनी में बैठकर अपने पड़ोसियों की नजर से बचना चाहती हैं तो इसके लिए स्टाइलिस चिक बांस लगवाएं। इसे आप अपनी सुविधानुसार कवरअप कर सकती हैं। चिक बांस का प्रयोग आप गर्मी की धुप या फिर सर्द भरी रातों से सुरक्षा पाने के लिए भी कर सकती हैं।

-बालकनी में ग्लास के डोर लगवाएं, ताकि बालकनी में लगे पौधें और धूप का नजारा कमरे में बैठकर भी लिया जा सके और यह देखने में भी काफी कूल लगते हैं।

-बालकनी का प्रयोग आप अपनी सेहत बनाने के लिए भी कर सकते हैं। यदि आपके पास मॉर्निग वॉक या फिर पार्क में जाने के लिए टाइम नहीं है तो फिर आप बालकनी में चटाई या फिर दरी बिछाकर योग  कर सकते हैं। यदि आप बॉडी बनाने के शौकिन हैं तो फिर साइड में एकाध मशीन भी रख सकते हैं।

-घर की तरह ही बालकनी को सजाने के लिए फेंगशुई की भी कई चीजों का इस्तेमाल कर सकती हैं, जैसे विंड चाइम, गणपति, लाफिंग बुद्वा, टेराकोटा, मैटेलिक या क्रिस्टल की मूर्तियां आदि।

-घर तथा बालकनी की सजावट में रंगबिरंगी पत्तियों वाले पौधों का चलन भी बढ़ गया है। बालकनी में कुछ गमले में पौधे लगाकर वातावरण को अच्छा बनाया जा सकता है ।

-बालकनी में लगाएं जाने फूलों में लेंटाना, यूफोरबिया, फेंटास और बिगोनिया आदि खास हैं। बालकनी के कॉर्नर वाले स्पेश में आप क्रोटनस, पाम,फर्न,रबर प्लांट,मिरंटा,एगेलोनिया आदि पौधों को भी रख सकते हैं। लटकने वाले पौधों को लटकती टोकरियों में लगाकर बालकनी में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगा सकते हैं। ऐसे पौधों में जेबरीना, पिलोनिया,सेक्सीफ्रेमा, क्लेरिफाइटम और पेपरोकिया आदि खास है।

-बालकनी के पीछे वाले हिस्से को घरेलू कार्य के लिए यूज करना ज्यादा बेहतर होगा। यहां पर आप कपड़े धोने की मशीन और सुखाने के लिए स्टैंड व कपड़ों की प्रेसिंग के लिए आयरन बोर्ड भी रख सकती हैं। जूतों की रैक, अखबारों की रद्वी, गैस सिंलडर जैसे समान भी यहां पर रखें जा सकते हैं। चूंकि महानगर कल्चर से आंगन जैसे शब्द बिल्कुल ही गायब हो गए हैं इसलिए बालकनी के पिछले हिस्से को आप बतौर आंगन भी यूज कर सकती हैं।

-बालकनी के इस हिस्से को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए आप यहां पर छोटी-मोटी चीजें जैसे नल,एक छोटा सा सेल्फ और ट्यूबलाइट लगवाना न भूलें। साथ ही यहां रखे समानों की सुरक्षा के लिए कुछ हिस्सों में शेड डलवा लें।

-यदि आपके घर की बालकनी सीधे प्रवेश द्वार की तरफ से पड़ता है तो फिर यहां पर ज्यादा समानों की भरमार न लगाएं।

-समय-समय पर इस जगह की साफ-सफाई करते रहें ताकि बेकार पड़े समान का ढ़ेर ना लग जाएं।

LEAVE A REPLY