घर का फंडा और टैक्स

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C  Kumar 

अगर आप अपना घर खरीदना चाहते हैं तो आपके पास इसके लिये दो तरीके हैं या तो अपनी बचत का इस्तेमाल करें या फिर ऋण लें। हममें से अधिकांश लोगों में इतनी सामर्थ्य नहीं होती है कि हम बिना ऋण लिये स्वयं का घर खरीद पायें। लेकिन अगर आप उन लोगों में से हैं जिनके पास खुद का घर खरीदने के लिये पर्याप्त पैसा है तब भी ऋण लेना ही बेहतर माना जाता है। ऐसा क्यों है, यह हम बता रहे हैं आपको।

प्रॉपर्टी का सामान्य और शुरुआती नियम

प्रॉपर्टी का सामान्य और शुरुआती नियम यह है कि 1,50,000 से अधिक का कर्ज लेने वालों को इस पर कर देना पड़ता है। इसके अलावा सैक्शन 80 सी के अंतर्गत पूंजी पुन:भुगतान पर 1,00,000 रु तक छूट मिलती है। अब अगर कोई घर खरीदने के लिये खुद के पैसे का उपयोग करता है तो उसे ये सब लाभ नहीं मिलेंगे। हमारे देश में उन लोगों को कोई कर लाभ नहीं मिलता जो बिना ऋण लिये घर खरीदना चाहते हैं। आपको ये बात कुछ गलत लग सकती है लेकिन यही कानून है।

कितना ऋण लेना चाहिये?

अब आगे बढ़ते हैं। आपको कितना ऋण लेना चाहिये? अगर आप कर्ज लेते हैं तो आपको अपने पैसे पर मिलने वाले लाभ से कहीं ज़्यादा ऊंची ब्याज दर देनी पड़ती है। तो क्या आपको अपना ही पैसा घर खरीदने पर लगाना चाहिये? आप ऐसा कर सकते हैं लेकिन इस स्थिति में आप कर पर मिलने वालों लाभों को खो देंगे। इसलिए आप को ऊंची ब्याज दर के कारण होने वाले नुक्सान के सामने करों से होने वाले लाभों को ध्यान में रखना होगा। ज़ाहिर है आपके पास एक बीच का रास्ता भी है। इसका जवाब निश्चित रूप से विभिन्न मापदंडों पर निर्भर करेगा कि ऋण लेने पर ब्याज दरें क्या होंगी और आपके पैसे पर अतिरिक्त कमाई क्या होगी।

ऋण लेने का सबसे बङ़ा फायदा कर में छूट के रुप में मिलता है। ये निवेशकों के हित में है। अपने फंड का उपयोग करने पर ये लाभ छूट जाते हैं।

यह भी ध्यान में रखें कि ब्याज पर 1,50,000 रुपये की अधिकतम सीमा आपकी अपनी संपत्ति के मामले में ही है। किराये की संपत्ति होने पर ब्याज छूट पर कोई अधिकतम सीमा नहीं है। इन सब बातों से ज़ाहिर है कि आपके लिये ऋण लेना ही लाभप्रद होगा। स्वयं के धन का उपयोग करने का कोई सवाल ही नहीं बनता।

टैक्स

आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं और बेचना चाहते हैं, तो पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेन टैक्स) को मत भूल जाइएगा। पूंजीगत कर व अन्य करों से निपटने के कई रास्ते हैं। अल्पकालिक पूंजी अभिलाभ अगर आप खरीदी के तीन साल से पहले कोई संपत्ति बेच रहे हैं तो उस पर अल्पकालिक पूंजी अभिलाभ लगेगा और उस साल की आमदनी में जुड़ जाएगा।

दीर्घकालीन पूंजी लाभ-अगर आपने कोई प्रॉपर्टी तीन साल या उससे ज्यादा अवधि के लिए अपने पास रखी है तो यह प्रॉपर्टी दीर्घकालीन पूंजी लाभ के विकल्प में आएगी। इस पर कर दर सूचीकरण के बाद 20 प्रतिशत लागू होगी। लंबी अवधि के पूंजी अभिलाभ पर कर छूटें उपलब्ध हैं।

कर बचाने का तरीके

-बिक्री से दो साल के भीतर आप दूसरा घर खरीदते हैं तो आपको कर में छूट मिल जाएगी। उसी रकम के बराबर की राशि नई प्रॉपर्टी में निवेश की जाती है तो पूंजी अभिलाभ कर से छूट मिल जाती है। शेष राशि बचती है तो उस पर दीर्घकालीन पूंजी लाभ (लांग टर्म कैपिटल गेन) कर लगेगा।

-रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन या नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी पूंजीगत लाभ बॉन्ड में निवेश पूंजी अभिलाभ (कैपिटल गेन) की तारीख से छह माह के भीतर करें।

– अगर आप प्लॉट में निवेश कर रहे हैं तो मूल प्रॉपर्टी की बिक्री के दो साल के भीतर इसमें निवेश करें। खरीदे प्लॉट पर आपको मकान बनाने का एक और साल मिलेगा, लेकिन निर्माण कार्य बिक्री के तीन साल के भीतर पूरा हो जाना चाहिए।

– अगर आप कोई अपार्टमेंट खरीदना चाहते हैं तो मूल संपत्ति की बिक्री के दो साल के भीतर यह निवेश करना होगा।

– जो भी लाभ हो, उसे पूंजी अभिलाभ (कैपिटल गेन) के बैंक खाते में रिटर्न दाखिल करने की तारीख के भीतर जमा करें। संचयित ब्याज के साथ यह राशि बिक्री की तारीख के दो साल के भीतर निवेश करनी होगी।

महत्वपूर्ण बातें

-अधिकतम छूट बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ पर निर्भर रहता है।

-नया मकान पुराने मकान की बिक्री की तारीख से दो साल की अवधि के भीतर खरीदना होगा। एक बार नया मकान खरीदने के बाद आपको यह कम से कम तीन साल तक अपने पास रखना चाहिए। अन्यथा पहले पूंजीगत लाभ कर में मिल रही छूट खत्म हो जाएगी और कर लगेगा। आपको ब्याज व पेनाल्टी भी चुकाने होंगे।

-ब्याज पर 1,50,000 रुपये की अधिकतम सीमा आपकी अपनी संपत्ति के मामले में ही है। किराये की संपत्ति होने पर ब्याज छूट पर कोई अधिकतम सीमा नहीं है। इन सब बातों से ज़ाहिर है कि आपके लिये ऋण लेना ही लाभप्रद होगा। स्वयं के धन का उपयोग करने का कोई सवाल ही नहीं बनता।

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