गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस

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    बिनय कुमार और एस राधा चौहान

    सार्वजनिक खरीदारी सरकार की गतिविधियों का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। सार्वजनिक खरीदारी में सुधार लाना वर्तमान सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है। गवर्नेमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम – gem.gov.in) सरकार का एक बहुत साहसिक कदम है, जिसका उद्देश्य उन तरीकों में बदलाव लाना है, जिनमें सरकारी मंत्रालयों और विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और केन्द्र सरकार के अन्य शीर्ष स्वायत्त निकायों द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीदारी की जाती है।
    पृष्ठभूमि
    गवर्नेमेंट ई-मार्केटप्लेस की उत्पत्ति प्रधानमंत्री द्वारा गठित सचिवों के दो समूहों की सिफारिशों के आधार पर की गयी है। सचिवों ने महानिदेशालय आपूर्ति एवं निपटान (डीजीएस एंड डी) में सुधार लाने के अलावा सरकार/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा खरीदी जाने वाली या बेचीं वाली विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए एक समर्पित ई-बाजार की स्थापना की सिफारिश की थी। इसके बाद वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के अपने बजट भाषण में विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं में सहायता प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी मंच की स्थापना करने की योजना बनाई थी।

    डीजीएसएंडडी ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तकनीकी राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग की तकनीकी मदद से उत्पादों और सेवाओं, दोनों की खरीदारी के लिए जीईएम पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल का शुभारंभ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री द्वारा 9 अगस्त, 2016 को किया गया था। जीईएम पर खरीदारी को सरकारी नियमों में आवश्यक परिवर्तन द्वारा सामान्य वित्तीय नियमावली के द्वारा अधिकृत किया गया है। वर्तमान में जीईएम के पीओसी पोर्टल पर 150 उत्पाद श्रेणियों में 7400 उत्पादों और परिवहन सेवाएं किराए पर लेने की सुविधा उपलब्ध हैं। जीईएम के माध्यम से 140 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन के मामले पहले से ही प्रोसेस किए जा चुके हैं। जीईएम पूरी तरह से कागज रहित, कैशलेस और प्रणाली संचालित ई-मार्केटप्लेस है जो न्यूनतम मानव इंटरफेस के साथ आम उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की खरीदारी में सक्षम बनाता है।
    जीईएम पारदर्शिता
    जीईएम विक्रेता पंजीकरण, खरीद आदि करने और भुगतान प्रोसेसिंग में मानव इंटरफेस को समाप्त करता है। एक खुला मंच होने के कारण जीईएम सरकार के साथ व्यापार की इच्छा रखने वाले वास्तविक आपूर्तिकर्ताओं के लिए कोई प्रवेश बाधा पैदा नहीं करता है। हर कदम पर खरीदार उसके संगठन के प्रमुख, भुगतान प्राधिकारियों के साथ-साथ विक्रेताओं को ई-मेल अधिसूचनाएं भेजी जाती हैं। पीएफएमएस और स्टेट बैंक ऑफ मल्टी ऑप्शन प्रणाली के साथ एकीकरण के माध्यम से जीईएम पर ऑनलाइन, कैशलेस और समयबद्ध भुगतान किया जाता है। रेलवे, रक्षा, प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य सरकारों को भुगतान प्रणाली के लिए वेब सेवाओं के एकीकरण का विस्तार किया जा रहा है। विक्रेताओं को निर्बाध प्रक्रियाओं और ऑनलाइन समयबद्ध भुगतान होने से उनमंस आत्मविश्वास पैदा हुआ है। इस कार्य की जिम्मेदारी व्यय विभाग को सौंपी गयी है। इससे विक्रेताओं की समय पर भुगतान प्राप्त करने के लिए अधिकारियों को मनाने में आने वाली ‘प्रशासनिक’ लागत कम हुई है।

    जीईएम बढ़ाता है क्षमता

    जीईएम पर सीधी खरीददारी मिनटों में की जा सकती है, क्योंकि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और उचित मूल्यों का पता लगाने के लिए ऑनलाइन उपकरणों के साथ पूरी तरह एकीकृत है। अधिक कीमत की खरीदारी के लिए बोली/ रिवर्स नीलामी (आरए) सुविधा सरकारी क्षेत्र में प्रचलित ई-खरीदारी प्रणालियों की तुलना में बहुत अधिक पारदर्शी और कुशल है। किसी बोली या आरए के सृजन के लिए खरीदार को अपने तकनीकी निर्देश तैयार करने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्हें जीईएम पर पहले ही मानकीकृत कर दिया गया है। बोली/ आरए को मिनटों में तैयार किया जा सकता है और इऩ्हें न्यूनतम 7 दिनों की अवधि में अंतिम रूप दिया जा सकता है। सभी पात्र आपूर्तिकर्ताओं को ई-मेल और एसएमएस के माध्यम से अधिसूचित किया जाता है। जीईएम पर ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद नए आपूर्तिकर्ताओं को भी अधिसूचित किया जाता है और उन्हें प्रणाली द्वारा ‘पात्र’ आपूर्तिकर्ता के रूप में माना जाता है। इसलिए जीईएम बोली/ आरए प्रतियोगिता, निष्पक्षता और गति तथा दक्षता सुनिश्चित करके उचित मूल्य का पता लगाने में मदद करता है। दरों की तर्कसंगतता की शीर्ष ई-कॉमर्स पोर्टल पर बाजार मूल्यों के साथ ऑनलाइन तुलना करके पुष्टि की जा सकती है। बहुत जल्द ही जीईएम अन्य सार्वजनिक खरीदारी पोर्टलों से जानकारी हासिल करना शुरू कर देगा जिससे यह सुनिश्चित हो जाएगा कि किसी अन्य सरकारी एजेंसी ने उसी या किसी अलग विक्रेता से वही वस्तु कम मूल्य में तो नहीं खरीदी है। मूल्यों की तर्कसंगतता वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) और भारतीय सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स / इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज गेटवे (आईसीईजीएटीई) के एकीकरण के माध्यम से और मजबूत हो जाएगी। जिससे खरीददार को किसी फैक्ट्री गेट पर मौजूद किसी वस्तु के मूल्य या उसे देश में आयात करने पर आने वाले मूल्य का पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे जीईएम सरकारी संगठनों के लिए योजना बनाने और खरीदारी करने के लिए एक बहुत सशक्त औजार बन जाएगा।
    बहुत सुरक्षित है जीईएम
    जीईएम पूरी तरह से एक सुरक्षित मंच है और इसके सभी दस्तावेजों पर खरीददारों और विक्रेताओं द्वारा विभिन्न चरणों में ई-हस्तक्षार किए जाते हैं। आपूर्तिकर्ताओं के पूर्ववृत्तों का एमसीए 21, आधार और पैन डेटाबेस के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन होता है। इसके अलावा सेबी पैनलबद्ध क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का भी आपूर्ति कर्ताओं की तीसरे पक्ष का मूल्यांकन कराने के लिए उपयोग किया जाता है। इससे जीईएम पर व्यापार करने के इच्छुक आपूर्ति कर्ताओं की सत्यत्ता के बारे में तत्परता और मजबूत होगी। जीईएम पर अधिक मूल्य की बोलियों / आरए के लिए ई-बैंक गारंटी भी शुरू की जा रही है। जीईएम मौजूदा प्रणाली की तुलना में कहीं बेहतर प्रणाली है। मौजूदा प्रणाली में आपूर्ति कर्ताओं के अच्छे आचरण की गारंटी के लिए वित्तीय साधनों (भारी खरीदारी के लिए निविदाओं के मामले में बयाना जमा राशि) पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है। मौजूदा प्रणाली में उन आपूर्तिकर्ताओं के पूर्ववृत्त की कम मूल्य की खरीदारी (1 लाख रुपये तक) के लिए जांच नहीं की जाती, जिनका सरकारी संगठनों में भारी संचय मूल्य है। चाहे खरीदारी की कीमत कितनी भी कम या ज्यादा हो जीईएम सभी वेंडरों का शत-प्रतिशत ऑनलाइन सत्यापन करता है।

    मेक इन इंडिया की सहायता
    जीईएम तरजीही बाजार पहुंच (पीएमए) अनुवर्ती पर मौजूद वस्तुओं और लघु उद्योगों (एसएसआई) द्वारा विनिर्मित वस्तुओं का चयन कर लेता है। इससे सरकारी खरीददार मेक इन इंडिया और लघु उद्योग द्वारा निर्मित वस्तुओं की आसानी से खरीदारी करने में समर्थ हो जाते हैं। आसानी से सुलभ एमआईएस, प्रशासकों और नीति निर्माताओं को पीएमए और एसएसआई आउटसोर्सिंग पर सरकारी नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने में समर्थ बनाता है। जीईएम की शुरूआत के बाद यह पता चला है कि अनेक जाने-माने कंप्यूटर निर्माताओं ने जीईएम पर पीएमए अनुरूप उत्पाद रखे हैं।
    सरकार की बचत
    निविदा/दर अनुबंध और सीधी खरीदारी दरों की तुलना में जीईएम पोर्टल के उपयोग में पारदर्शिता, दक्षता और सरलता के कारण जीईएम पर मूल्यों में काफी कमी हुई है। जीईएम पर औसत मूल्य कम से कम 15-20 प्रतिशत कम हैं और कुछ मामलों में यह मूल्य 56 प्रतिशत तक कम पाए गए हैं। निर्देशों के मानकीकरण और जीईएम वस्तुओं के मानकीकरण के द्वारा मूल्यों में और कमी आने से मांग एकत्रीकरण और अधिक बढ़ने का अनुमान है। सामान्य उपयोग की अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं के लिए मांग एकत्रीकरण के परिणामस्वरूप 40,000 करोड़ रुपये की सालाना वार्षिक बचत होने का अनुमान है। तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने पर जीईएम श्रेष्ठ वैश्विक प्रथाओं के साथ निश्चित रूप से एक राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीदारी पोर्टल के रूप में उभरेगा। अधिकांश ओईसीडी देश, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, सिंगापुर आदि में एक ही एनपीपीपी है जिसके परिणामस्वरूप इऩ देशों में घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक खरीदारी में अरबों डॉलर की वार्षिक बचत होती है।

    ( बिनय कुमार एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और वर्तमान में महानिदेशक (आपूर्ति एवं निपटान) के पद पर कार्यरत हैं।)
    (एस.राधा चौहान एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और वर्तमान में अध्यक्ष एवं सीईओ राष्ट्रीय ई-शासन डिवीजन के पद पर कार्यरत हैं।)

     

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