हरियाली से दुनिया सारी

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हरे-भरे पेड़ पौधे घर-आंगन की शोभा होते हैं। यह मानो बेज़ान से स्थान में भी नई जान ला देते हैं, लेकिन यह तभी अच्छे लगते हैं, जब इन पर पूरी हरियाली छायी हो और हरियाली के लिए ज़रूरी है कि इसकी समुचित देखभाल हो। वरना सही  देखभाल के अभाव में पेड़-पौधे अपनी हरियाली खोने में देरी नहीं करता है। अत: पेड़-पौधे सदाबहार बने रहे, इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना होगा।

पेड़-पौधा का देखभाल

वातावरण को स्वच्छ बनाने और हरियाली कायम करने में पेड़-पौधा का अमूल्य योगदान है। इसे नेचुरल रूप में बने रहने के लिए देखभाल की आवश्यकता होती है। इसे रौशनी, पानी, मिट्टी व खाद की मुख्य आवश्यकता होती है। इनमें से किसी की भी कमी या अधिकता नुकसानदेह साबित हो सकती है। इसकी समुचित मात्रा ही हरा-भरा रखने में मदद करती है। पौधों को भी पानी की आवश्यकता उतनी ही होती है जितनी मनुष्य को। लेकिन पौधों को पानी की आवश्यकता बहुत सी बातों पर निर्भर करती हैं, मसलन पौधे का प्रकार व उसकी प्रकृति और मौसम आदि। पौधों को पानी देते समय बहुत सी बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए क्योंकि कम पानी से पौधों को जहां सुखने का डर रहता है, वहीं अधिक पानी से पौधों को गलने का डर बना रहता है। पौधों में पानी जब मर्जी हो तब न डालें बल्कि इसमें पानी डालने का सही समय सुबह और शाम होता है। मोटे पत्ते व साइज में बड़े पत्ते वाले पेड़-पौधे को पानी की आवश्यकता ज्यादा होती है, जबकि छोटे पत्ते तथा नरम पत्तों को पानी की आवश्यकता कम होती है।

फ्लावरी वाले पेड़-पौधों को पानी की आवश्यकता अधिक होती है, जबकि कैक्टी यानि कांटेनुमा वाले पौधों को पानी की आवश्यकता कम होती है। गर्मी के दिनों में पौधों को पानी की आवश्यकता अधिक होती है और अन्य मौसम में अपेक्षाकृत कम कम होती है। सर्दियों में रोज पानी देने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि इस मौसम में पौधों में नमी कई दिन तक बरकरार रहते हैं। छोटे गमले में लगे पौधों को पानी की ज़रूरत अधिक होती है, जबकि बड़े साइज के गमले में लगे पौधों को कम होती हैं।

लताएं और प्रतान वाले पौधों को पानी की ज्यादा ज़रूरत होती है, क्योंकि यह आम तौर पर सीधे धूप के संपर्क में रहते हैं। बड़े पौधे कम पानी में भी बढ़ते रहते हैं, जबकि छोटे को पानी की आवश्यकता अधिक होती है ताकि वह अपनी जड़ को अच्छी तरह से मज़बूती प्रदान कर सके। मिट्टी की प्रकृति के अनुसार भी पौधों को पानी दिया जाता है। सैंडी लोअम मिट्टी हल्की होती है। इसमें पानी को सोखने या रोकने की क्षमता कम होती है। ऐसे में खाद डाल कर मिट्टी की होल्डिंग क्षमता बढ़ाई जाती है। इसी तरह से काली मिट्टी भारी मिट्टी की श्रेणी में आती है और इस प्रकार की मिट्टी में पानी जड़ तक नहीं पहुंच पाता है। इस प्रकार की मिट्टी की क्षमता को बरकरार रखने के लिए रेत आदि डाला जाता है, ताकि पानी जड़ तक पहुंच पाएं।

रौशनी

पेड़-पौधे के सही विकास के लिए सूर्य की रौशनी की ज़रूरत होती है। किसी पौधे को रौशनी की ज़रूरत अधिक होती है तो किसी को कम। फ्लावरी वाले पौधों को रौशनी की ज़रूरत अधिक होती है, लेकिन इन डोर प्लांट को रौशनी की ज़रूरत कम होती है। कई पौधे ऐसे होते हैं, जिन्हें गर्मी की तेज़ रौशनी से बचा कर रखना होता है, तो कई पौधे सही रौशनी नहीं मिलने से मुरझा से जाते हैं। अत: हमें पौधे की विशेषता और उनके श्रेणी को देखते हुए रौशनी का चयन करना चाहिए।

पेड़-पौधों में प्रयोग किए जाने वाले पोषक तत्व

पौधों को सही पोषक तत्व मिलेगा तभी उसकी ग्रोथ अच्छी होगी। इसके लिए हमें मिट्टी की उवर्रा शक्ति को बढ़ानी होगी। एमपीके का एक मिश्रण आता है। इसका उपयोग किया जा सकता है। मिट्टी उर्वरा शक्ति को कायम करने के लिए महीने में एक बार माइक्रो न्यूट्रेन के सॉल्यूशन का छिड़काव किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल आप आवश्कतानुसार कर सकते हैं और इसका स्प्रे भी किया जा सकता है। यह पौधे के सभी पोषक तत्वों को पूरा करते हैं। पौधों के लिए वर्मी कम्पोस्ट यानि केंचुए की खाद सबसे बेहतर माना जाता है। इसे पौधों की जड़ो में उपयोग किया जाता है। इसमें किसी तरह की गंध भी नहीं आती है।

 बीमारी से बचाव

पौधों की साज-संभाल के लिए और हमेशा हरे-भरे व लहराते रहें, इसके लिए ज़रूरी है कि पौधें को हरेक तरह की बीमारी से बचा कर रख जाए। बीमारी से बचाव के लिए नीम ऑयल का छिड़काव करना चाहिए। यह पौधों को हरेक तरह बीमारी जैसे की फंगल व बैक्टिरल आदि से रक्षा करता है। नीम ऑयल को पेड़ की पत्तियों पर छिड़काव करने से पौधों में कोई बीमारी नहीं लगती है। नीम केक का यूज पौधों की जड़ों में किया जाता है। लहसन और हल्दी के पेस्ट को पानी में घोल बना का भी पौधें के पत्तें पर छिड़काव हर तरह के पौधों में किया जा सकता है। अगर राख उपलब्ध हो, तो उसका भी पत्ते पर छिड़काव किया जा सकता है। इससे पत्ते में कीड़े नहीं लगते हैं तथा ये बीमारी को आने नहीं देती है। कटाई-छटाई- बरसात के बाद पौधों की कटाई छटाई करना चाहिए, क्योंकि इस समय पेड़-पौधों में अतिरिक्त पत्ते और टहनियां निकल आती हैं। पीले पत्ते तथा सड़े हुए पत्ते को पेड़ से निकाल देना चाहिए। बारिश के मौसम को छोड़कर अन्य मौसम में पेड़ के पत्तों को भी पानी से स्प्रे कर देना चाहिए ताकि वह देखने में सुंदर लगे।

(हार्टिकल्चर सांइटिस्ट प्रज्ञा रंजन से सीमा झा की बातचीत पर आधारित)

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