घर में परिवर्तन किए बिना भी हो जाता है वास्तुदोष

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वास्तु गुरू  कुलदीप सलूजा

सामान्यत: होते भी छोटे-छोटे वास्तुदोषों से होने वाली थोड़ी बहुत परेशानियों को आदमी सह लेता है। ज्यादा होने पर ही वास्तु परामर्श के लिए किसी से संपर्क करता है। जैसे कि हम अधिक बीमार पडऩे पर ही डॉक्टर से संपर्क करते हैं। यह बात ठीक थी कि संजय जी ने अपने मकान में कोई परिवर्तन नहीं किया था, परंतु एक महत्वपूर्ण परिवर्तन उनके घर के सामने वाली सड़क के दूसरी ओर ऐसा हो चुका था। जिसके कारण उनके घर में एक महत्वपूर्ण वास्तुदोष उत्पन्न हो गया था।

जब मैं वास्तु परामर्श के लिए किसी के घर जाता हूं तो कई बार उस घर के बुजुर्ग यह कहते हैं कि हम यहां इतने वर्षों से रह रहे हैं। इसी घर में हमने जीवन में कई उपलब्धियां हासिल की है, अच्छे तरीके से सामाजिक एवं पारिवारिक दायित्व निभाए हैं, नाम कमाया, इज्जत पाई और सबसे खास बात यह कि हमने जब से मकान बनाया है, उसके बाद आज तक हमने इस मकान की एक ईंट इधर से उधर नहीं की है। तो यह बताएं कि अब हमारे घर में वास्तुदोष कहां से आ गया? ऐसे ही लगभग तीन वर्ष पूर्व कानपुर के नवीन नगर में रहने वालें श्री संजय खन्ना ने मुझसे वास्तु परार्मश के लिए संपर्क किया। संजय जी पिछले कई वर्षों से आर्थिक और मानसिक कष्ट से परेशान थे। जब मैं संजय जी के घर का वास्तु निरीक्षण करने गया, तब वहां उनकी माता जी मुझसे कहने लगी कि ”बेटा हम यहां 20 वर्ष से रह रहे हैं, यह मकान संजय के स्वगीर्य पिता ने बनवाया था। मकान बनाने के बाद लगभग 14-15 वर्षों तक तो हमारे परिवार का जीवन बड़ा सरल रहा, परंतु पिछले 5-6 सालों से आर्थिक समस्याओं के साथ-साथ रोज़मर्रा  के जीवन में परेशानियां तो ज़रूर आ रही है, परंतु एक बात है कि जब से हमने यह मकान बनाया है तब से हमने इस मकान में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया है, जैसा मकान शुरू में था आज भी वैसा ही, तो बेटा बताओ बिना किसी बदलाव के इस घर में वास्तुदोष कहां से आ सकता है? वास्तु निरीक्षण में मैंने पाया कि मकान विदिशा प्लॉट पर बना है, प्लॉट की उत्तर दिशा बढ़ी हुई है, मकान के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दोनों दिशाओं में सड़क है। घर की बनावाट में कई छोटे-छोटे वास्तुदोष नज़र आए जैसे ईशान कोण वाले भाग का फर्श थोड़ा ऊंचा उठा हुआ था, प्लॉट के उत्तर दिशा वाले भाग में दरवाजे तीरछे लगे थे, ऐसे ही घर में ओर भी कुछ दोष भी थे। परंतु ऐसे नहीं थे जिससे किसी को बहुत परेशान होकर वास्तु परामर्श लेने की आवश्यकता पड़े और सबसे बड़ी बात तो यह कि यह दोष तो मकान बनाते समय से ही थे, जहां 14-15 सालों तक इस परिवार का समय अच्छा बीता भी था। सामान्यत: होते भी छोटे-छोटेे वास्तुदोषों से होने वाली थोड़ी बहुत परेशानियों को आदमी सह लेता है। ज्यादा होने पर ही वास्तु परामर्श के लिए किसी से संपर्क करता है। जैसे कि हम अधिक बीमार पडऩे पर ही डॉक्टर से संपर्क करते हैं। यह बात ठीक थी कि संजय जी ने अपने मकान में कोई परिवर्तन नहीं किया था, परंतु एक महत्वपूर्ण परिवर्तन उनके घर के सामने वाली सड़क के दूसरी ओर ऐसा हो चुका था। जिसके कारण उनके घर में एक महत्वपूर्ण वास्तुदोष उत्पन्न हो गया था। हुआ यों कि इनके घर के सामने सड़क की दूसरी तरफ एक बड़ा सा बगीचा था। उस बगीचे को लगभग 8 साल पहले किसी कॉलोनाईजर ने खरीदकर वहां कॉलोनी का निर्माण किया। उस कॉलोनी के निर्माण के दौरान कॉलोनी की एक सड़क ऐसे स्थान पर बनी जो कि मकान के उत्तर वायव्य वाले भाग पर मार्ग प्रहार करने लगी। इस एक महत्वपूर्ण वास्तुदोष के साथ घर के अन्य छोटे-छोटे वास्तुदाषों जो पहले से ही इस घर में थे उन्होंने मिलकर परिवार की रोज़मर्रा जि़न्दगी में उलझने पैदा कर जीवन की सरलता को खत्म कर दिया था। अब देखिए यहां भवन की एक ईंट भी हिलाए बिना ही मकान की वास्तुनुकुलता कैसे बिगड़ गई कि वहां महत्वपूर्ण वास्तुदोष उत्पन्न हो गया। जिस कारण परिवार की वर्षों से चली आ रही सरलता खत्म हो गई।

संयोग से घर के दक्षिण पश्चिम वाले इस भाग पर निर्माण कार्य न होने के कारण यह भाग खुला हुआ था। इस कारण दोष दूर करने में ज्यादा परेशानी नहीं आई। मैंने संशोधित नक्शे में दिखाए गए अनुसार एक दीवार खड़ी करके घर के उस प्लॉट को दो भागों में बांट दिया। एक जहां पहले से घर था, दूसरा जहां खाली प्लॉट था। इससे कॉलोनी का अशुभ मार्ग प्रहार घर के अलग हुए प्लॉट वाले भाग पर यही मार्ग प्रहार उत्तर ईशान का श मार्ग प्रहार हो गया। अलग हुए इस भाग पर मैंने खन्ना परिवार की इच्छा पर 20 कमरों का दो मंजि़ला हॉस्टल बनवा दिया। जो की पूर्णत: वास्तुनुकुल बना है। पुराने भाग में भी जो छोटे-छोटे वास्तु दोष थे, उन्हें भी ठीक कर घर को अधिक वास्तुनुकुल कर दिया। हॉस्टल की अच्छी आमदनी और जुड़ जाने से आज यह परिवार सुखद एवं सरल जि़न्दगी व्यतीत कर रहा है। ऐसे कई परिवर्तन घर के अंदर व बाहर हो जाते हैं। उन परिवर्तनों में जिनमें हमारी कोई भूमिका नहीं होती। यह परिवर्तन वास्तुनुकुल भी हो सकते हैं और वास्तु विपरित भी। वास्तुनुकुल परिवर्तन होने पर आदमी अपनी

उपलब्ध्यिों को ईश्वर की कृपा मान कर भाग्य को सराहता है और प्रसन्न रहता है। परंतु वास्तु विपरित परिवर्तन होने पर जब उसके रोज़मर्रा के जीवन में परेशानियां आने लगती है। तो वह उनसे निजात पाने के उपाए ढूंढता है और उनमें से एक उपाय होता है घर का वास्तुदोष दूर कर सुखद जीवन व्यतीत करना। घर के अंदर या बाहर स्वत: उत्पन्न होने वाले कुछ परिवर्तनों के उदाहरण आपके समक्ष प्रस्तुत है –

1     जब घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाए गए छोटे पौधे जब 15-20 वर्षो के बाद बड़े वृक्ष बन जाते हैं। तब बड़े वृक्ष दोपहर बाद की हानिकारक सूर्य की किरणों को घर में आने से रोकते हुए वास्तुनुकुल होते है। लेकिन यदि यही वृक्ष उत्तर या पूर्व दिशा में बड़े हो जाते हैं तो सूर्य की प्रात:कालिन सकारात्मक ऊर्जा को रोकते हुए उस घर में वास्तुदोष उत्पन्न कर देते हैं।

1 यदि किसी घर के सामने उत्तर या पूर्व दिशा में स्थिति सड़क को हर दो तीन वर्षों में दुरूस्त करने के दौरान एक के बाद एक गिट्टी और डामर की परत सड़क पर चढ़ती जाती है। तो इससे घर की उत्तर या पूर्व दिशा ऊंची होने जाने से वास्तुदोष पैदा हो जाता है और यदि यही ऊंचाई दक्षिण या पश्चिम दिशा में आ जाए तो यह ऊंचाई वास्तुनुकुल होकर घर के लिए शुभ हो जाती है।

1 इसी प्रकार घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में कोई बड़ी नाली, चैम्बर, कुआं, बोरिंग, भूमिगत पानी की टंकी इत्यादि बन जाने से, घर के दांये-बांये बड़े-बड़े मकान बनने पर, घर की किसी भी दिशा में पुल बन जाने से, मार्ग प्रहार हो जाने से वास्तुदोष पैदा हो जाते हैं।

1 इस प्रकार घर के दरवाजे के आगे बिजली या टेलिफोन का खंबा या बड़े पेड़ के उग आने से द्वार वेध हो जाने से भी वास्तुदोष उत्पन्न हो जाता है। ऐसे कई परिवर्तन होते हैं जो हम नहीं करते है परंतु घर के आसपास घटित हो जाते है, जिसके कारण वास्तुनुकुल घर में बिना किसी परिवर्तन के ही वास्तुदोष आ जाता है।

ध्यान रहे वास्तुशास्त्र एक विज्ञान है। वास्तुदोष होने पर उनका निराकरण केवल वैज्ञानिक तरीके से ही करना चाहिए। यदि वास्तुनुकुल घर में स्वत: कोई वास्तुदोष उत्पन्न हो गया है तो सुखद, सरल एवं समृद्धिपूर्ण जीवन के लिए आवश्यक है कि दोष को देखते हुए घर की बनावट में परिवर्तन कर घर को वास्तुनुकुल बनाएं।

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