ज्यादातर गौमुखी प्लॉट शुभ नहीं होते हैं…!

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कुलदीप सलूजा, वास्तुगुरु

हमारे देश के जनसामान्य की मान्यता है कि गौमुखी प्लॉट घर के लिए और शेरमुखी प्लॉट दुकान के लिए बहुत शुभ होते है परन्तु यह धारणा पूर्णत: गलत है। केवल ईशान कोण बढऩे से यदि किसी प्लॉट का आकार गौमुखी या शेरमुखी हो जाता है तो वह अत्यंत शुभ होता है। जब कोई प्लॉट एक दिशा में छोटा होकर गौमुखी हो जाता है तो दूसरी दिशा में बढ़कर शेरमुखी हो जाता है। यह शुभ बढ़ाव उत्तर या पूर्व ईशान किसी एक दिशा में ही होना चाहिए। ईशान कोण के अलावा पूर्व या दक्षिण आग्नेय, दक्षिण या पश्चिम नैत्य, पश्चिम या उत्तर वायव्य किसी भी दिशा में प्लॉट के बढऩे से प्लॉट गौमुखी या शेरमुखी हो जाता है तो यह बढऩा अशुभ ही होता है।

शुभ गौमुखी प्लॉट केवल दक्षिण या पश्चिम मुखी ही हो सकता है। ऐसा प्लॉट जो उत्तर या पूर्व दिशा में गौमुखी हो कभी भी शुभ हो ही नहीं सकता। विभिन्न दिशाओं के गौमुखी प्लॉट पर भवन बनाकर उसमें रहने वालों पर इसका शुभ-अशुभ प्रभाव इस प्रकार पड़ेा।

-उत्तर ईशान में उत्तर के साथ मिलकर बढ़ाव होता है तो अत्यधिक ऐश्वर्य प्राप्त होगा। ज्यादा आमदनी स्थिर और अस्थिर जायदाद की वृद्धि होगी।

-पूर्व ईशान में पूर्व के साथ मिलकर कोने में बढ़ाव होता है तो उस स्थल का स्वामी प्रसिद्धि पाता है तथा उसकी संतान, वंश और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।

-पूर्व आग्नेय में पूर्व के साथ मिलकर बढ़ाव होता है तो संतान की प्राप्ति नहीं होती है और अर होती भी है तो बहुत कम और परिवार में कलह होती है।

-दक्षिण के साथ मिलकर दक्षिण आग्नेय में बढ़ाव हो तो पारिवारिक झगड़े, बीमारियां, मानसिक व्यथा, अशांति और धन का नाश होगा।

-दक्षिण के साथ मिलकर दक्षिण नैत्य में बढ़ाव हो तो मालिक  प्राण-भय और अकाल मृत्यु के भय से पीड़ित होगा।

-पश्चिम के साथ मिलकर नैत्य में बढ़ाव हो तो धन भारी मात्रा में नष्ट होता है। इसके अतिरिक्त प्लॉट का मालिक दुस्सांति और कुकर्मों के लिए बहुत पैसा खर्च करेगा, व्यसनों का दास बनेगा, जिद्दी बनेगा और समय स्फूर्ति के अभाव में अधिक धन व्यर्थ करेगा।

-अगर पश्चिम वायव्य का बढ़ाव पश्चिम के साथ मिलकर होता है तो प्लॉट का स्वामी रसिक मिजाज, सरकारी विभागों से संबन्धित कार्यों में बाधाएं, अपमान, अनेक चिंताओं, धन-नष्ट, पुत्र-नष्ट औैर गरीबी से पीड़ित होगा।

-उत्तर के साथ मिलकर अगर उत्तर वायव्य में बढ़ाव होता है तो गरीबी होगी, सुख का अभाव रहेगा, संतान का नाश, अपमान अशांति, और दु:ख से पीड़ा होगी।

-कई प्लॉट इस प्रकार के होते हैं कि उनमें दो दिशाओं में बढ़ाव होने के कारण प्लॉट गौमुखी मुखी/शेरमुखी हो जाता है। ऐसी स्थिति में उन घरों में निवास करने वालों पर दोनों दिशाओं के लिए बताए गए उपरोक्त शुभ-अशुभ का प्रभाव मिश्रित रूप से पड़ेगा।

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