प्री-फैब टेक्नोलॉजी से बिल्डिंग्स बनाना आसान

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prefab Building
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 यदि हम परम्परागत घर को देखें और आज के घर में तो बदलाब आया है पर जितना आना चाहिए उतना नहीं। परम्परागत तौर पर घर निर्माण से घर बनाने का दाम बढ़ता जा रहा है। जहां एक ओर ऐसे घर बनाने में समय भी अधिक लगता है, वहीं पर डेवलपर्स को पैसे भी अधिक खर्च करने होते हैं। समय की बरबादी के साथ पैसे ज्यादा खर्च से बचने का बेहतर माध्यम बन सकता है प्री-फैब टेक्नोलॉजी।

रियल्टी क्षेत्र में घर का पजेशन सही समय पर न मिलने की शिकायत आम बात है। कमोबेश हर शहर में इस समस्या से डेवलपर्स और निवेशक जूझते देखे जाते हैं। समय पर पजेशन मिलने से एक ओर डेवलपर्स के विश्वसनियता में वृद्धि होती है, वहीं दूसरी ओर निवेश या ग्राहक को किराए देने से आज़ादी। यदि खरीददार ने निवेश किया है तो उसे जल्दी से किराया मिलने लगता है। डेवलपर्स यदि अपने प्रोजेक्ट को समय पर पूरा कर लेता है तो उसे दूसरे प्रोजेक्ट को लॉन्च करने में सहूलियत और पैसे भी मिल जाते हैं। हमारे देश में अर्फोडेबल घर की मांग सबसे ज्यादा है। आम लोग 15 से 25 लाख के घर को अर्फोडेबल घर की श्रेणी में मानते हैं। पर बढ़ते रॉ-मैटिरीयल के दाम और कम होते श्रमिक ने इस सपने के ऊपर पानी फेर दिया है। यदि हम परम्परागत घर को देखें और आज के घर में तो बदलाब आया है पर जितना आना चाहिए उतना नहीं। परम्परागत तौर पर घर निर्माण से घर बनाने का दाम बढ़ता जा रहा है। जहां एक ओर ऐसे घर बनाने में समय भी अधिक लगता है, वहीं पर डेवलपर्स को पैसे भी अधिक खर्च करने होते है। समय की बरबादी के साथ पैसे ज्यादा खर्च होने से डेवलपर्स को पैसे की कमी से जूझना पड़ता है। इससे बचने के लिए अब मार्केट में कई प्रकार के टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होने लगा है। इसी टेक्नोलॉजी के श्रेणी में प्रीफैब टेक्नोलॉजी निर्माण की दुनिया को रफ्तार दे रही है।

क्या है प्री-फैब टेक्नोलॉजी
प्रीफैब टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल कर घर में यूज होने वाले अवयव को फैक्ट्री में तैयार किया जाएगा। समान्य रूप से उपयोग में आने वाले प्रीफैब सामग्री स्टील फ्रेम, छत में लगने वाले टाइल्स, दरवाजें, खिड़कियां और वेंटिलेटर कारखाने में बनाए जाते हैं। आज जो भी बड़े प्रोजेक्ट बन रहे हैं, उनके कॉस्ट फैक्टरी में किए जाते हैं और उसको लाकर साइट पर एसेम्बल किया जाता है। टेक्नोलॉजी के विकास के साथ आज बिना कंक्रीट और सीमेंट का उपयोग किए बिना स्टील के फ्रेम के सहारे कई तले बिल्डिंग खड़ी की जा रही हैं और अंदर का निर्माण प्रीफैब टेक्नोलॉजी का उपयोग कर के पूरा किया जाता है।
मज़बूत बुनियाद
डेवलपर्स भी प्रीफैब टेक्नोलॉजी का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। दीवार, रूफ स्लेब प्रीफैब तकनीक का इस्तेमाल कर घर में लगाया जा रहा है। इस तकनीक के सहारे किचिन और बाथरूम पहले से ही तैयार कर लगाया जा रहा है। दिल्ली और एनसीआर में इस तकनीक का खूब उपयोग किया जा रहा है। प्रीफैब तकनीक के उपयोग आने से एक ओर कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में कमी आती है, वहीं समय का भी काफी बचत हो रही है। परंपरागत तरीके से निर्माण और प्रीफैब तकनीक के इस्तेमाल करने से 15 से 20 प्रतिशत का बचत हो रही है। इस तकनीक से मज़बूत घर भी बन रहे वह भी कम लेबर लागत पर। इस तकनीक से प्लबिंग, प्लास्टर और बिजली के वायरिंग कॉस्टिंग के समय में ही लगा देने से कंस्ट्रक्सन कॉस्ट में बहुत कमी आ गयी है। इमारतों में प्रीफैब तकनीक के इस्तेमाल से बहुत बड़ा फायदा यह है कि आप जब चाहे अपने मकान को नया लुक दे सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि अधिकांश ब्लॉक स्वतंत्र होते हैं और उसे आप मनचाहे ढंग से बदल सकते हैं। इस तकनीक के सहारे डिज़ाइन किए इन घरों में बिना किसी नुकसान किए हुए बदलाब लाया जा सकता है।

बेहतर संभावना
ऐसा नहीं है कि यह हमारे देश में हालिया ही आया है। ऑफिस और कॉमर्शियल बिल्डिंग में इसका उपयोग काफी पहले से किया जा रहा है। इस तकनीक के उपयोग करने से बिल्डिंग परम्परागत तौर से निर्माण किए हुए बिल्डिंग से 8 या 9 गुना हल्का होता है। इससे भूकंप या प्रकृति आपदा में जान-माल का कम से कम नुकसान होता है। सुरक्षा की दृष्टिï के साथ इस तरह का घर बनाना बजट के लिए भी फायदेमंद है। कम खर्च में आप अपने सपने का आशियाना बना सकते हैं। इस तरह के बने हुए मकान में अग्नि और पानी से भी नुकसान नहीं के बराबर होता है। रियल एस्टेट से जुड़े हुए विशेषज्ञों का कहना है कि पहले यह सिर्फ कॉमर्शियल बिल्डिंग में ही इसका उपयोग किया जाता था, पर अब आम लोग भी अपने घर के निर्माण में इसका उपयोग करने लगे हैं। आने वाले समय में यह बहुत ही ज्यादा पॉपुलर होने की संभावना है।

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