शारदा यूनिवर्सिटी का द्वितीय दीक्षांत समारोह

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दिल्ली-एनसीआर की विश्वस्तरीय शारदा यूनिवर्सिटी में  द्वितीय दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक, श्री श्री रवि शंकर  ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की एवं दीक्षांत भाषण दिया। इस अवसर पर गणमान्य लोगों की भारी मौजूदगी में शारदा युनिवर्सिटी के चांसलर पी.के.गुप्ता ने 2014-15 एवं 2015-16 बैचों के 3621 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की। दीक्षांत समारोह का शुभारंभ लैंप लाईटिंग और छात्र-छात्रों के सुमधुर कुलगीत गीत की प्रस्तुति से हुई। इस भव्य समारोह में दो चांसलर पदक भी प्रदान किए गए। चांसलर पदक दोनों बैचों के उन छात्रों को दिया गया जिन्होंने यूनिवर्सिटी में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। साथ ही, इस अवसर पर युनिवर्सिटी के 11 स्कूलों के टॉपरों को भी चांसलर,  पी. के. गुप्ता ने गोल्ड मेडल प्रदान किए।

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सफल छात्रों को डिग्रियां प्रदान करने के साथ ही शारदा यूनिवर्सिटी ने मुख्य अतिथि श्री श्री रवि शंकर को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि भी प्रदान की। साथ ही, शारदा यूनिवर्सिटी ने गेस्ट ऑफ ऑनर, डॉ वेदप्रकाश मिश्रा जो चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के विख्यात शिक्षाविद हैं को डॉक्टर ऑफ साईंस की मानद उपाधि से नवाजा।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि  शारदा यूनिवर्सिटी द्वारा मुझे डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि प्रदान करने और इस प्रकार इस विश्वविद्यालय जो सही मायने में एक ग्लोबल विश्वद्यालय है, का एलुमनी बनने पर मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। भारत ने ही दुनिया को 0 एवं 1 दिया है जो बड़े-बड़े वैज्ञानिक शोधों का आधार है इस प्रकार भारत का योगदान अतूलनीय है। मैं छात्रों को यह कहना चाहता हूं कि उन्हें अपनी डिग्री पूरी हो जाने के बाद भी सीखना नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि सीखना एक जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है। मैं इस संदेश का प्रसार भी करना चाहता हूं कि शिक्षा एवं दीक्षा दोनो ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। मैं इन सभी नौजवानों को एक सलाह देना चाहता हूं कि वे बड़े सपने देखें एवं असफलताओं से हतोत्साहित ना हों। आपको हमेशा यह याद रखना चाहिए कि आपने इस दुनिया में कुछ ना कुछ अद्भुत और अद्वितीय करने के लिए जन्म लिया है।

इस अवसर  शारदा यूनिवर्सिटी के चांसलर पी. के. गुप्ता ने कहा  कि  मुझे खुशी है कि हम यहां छात्रों की कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए एकत्रित हुए हैं। मझे गर्व कि है कि आज विश्व स्तर पर 56 देशों से छात्र एवं पूर्व छात्र इस दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए एकत्रित हुए हैं। वह दिन दूर नहीं है शारदा विश्वविद्यालय दुनिया के शीर्षस्थ विश्वविद्यालयों में शुमार होगा।” उन्होंने शारदा विश्वविद्यालय की तुलना नालंदा विश्वविद्यालय से भी की जो दुनिया का सबसे पुराना विश्वविद्यालय था। उन्होंने आगे कहा, “शारदा युनिवर्सिटी में हम छात्रों को विश्वस्तरीय उत्कृष्ठ शिक्षा प्रदान करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर जोड़ने की प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं। इसी विचारधारा के अनुरूप हमने कॉफी टेबल बुक– लीडिंग बियोंड बाउंडरीज- 20 इयर्स ऑफ इनक्रेडिबल जर्नी लांच की है।”

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