तमिलनाडु का विजय हजारे ट्रॉफी का चौका

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विवेक कुमार सिंह 

भारत में खेले जा रहे घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट विजय हजारे एकदिवसीय ट्रॉफी पर चौथी बार तमिलनाडु की टीम ने कब्जा जमा लिया है। इसे पहले तमिलनाडु की टीम ने 2008, 2009 और 2010 में लगातार तीन बार खिताब पर कब्जा जमाया था। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले गए फाइनल मुकाबले में तमिलनाडु की टीम ने पश्चिम बंगाल के सामने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। तमिलनाडु की शुरुआत बेहद खराब रही और 50 रनों के भीतर ही अपने चार बहुमूल्य बल्लेबाजों को खो दिया। लेकिन बाबा इंद्रजीत और विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने टीम को संभालने की कोशिश की और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। इन दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण 85 रनों की साझेदारी निभाई। बंगाल की तरफ से मोहम्मद शमी और अशोक डिंडा की घातक गेंदबाजी के सामने और कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं सका और पूरी टीम 47.2 ओवर में 217 रनों पर सिमट गई। जवाब में 217 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बंगाल की टीम की शुरुआत भी बेहद खराब रही। पश्चिम बंगाल के ऊपर के दो बल्लेबाज 4 रन के भीतर ही पवेलियन लौट गए। हालांकि भारत की राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे हैं मनोज तिवारी और सुदीप चटर्जी ने टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन तमिलनाडु के गेंदबाजों के एकजुट प्रदर्शन ने इस साझेदारी को टिकने नहीं दिया और दोनों को जल्द पवेलियन भेज दिया। इसके बाद लगातार अंतराल में विकेटों के गिरने का सिलसिला जारी रहा और पूरी टीम 180 रन पर ऑल आउट हो गई।  इसके साथ ही तमिलनाडु की टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी पर चौथी बार कब्जा जमाया। तमिलनाडु की तरफ से सबसे अधिक 112 रनों की पारी खेलने वाले बल्लेबाज दिनेश कार्तिक को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

 

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