विदिशा प्लॉट

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वास्तु गुरु-कुलदीप सलुजा

विदिशा प्लॉट में उत्तर दिशा ईशान कोण, पूर्व दिशा आग्नेय कोण, दक्षिण दिशा नैऋत्य कोण और पश्चिम दिशा वायव्य कोण की तरह परिणाम देने लगती है। विदिशा प्लॉट में पूर्व दिशा में भूमिगत पानी का स्रौत होने पर वहां रहने वाले परिवार के बीच आपसी कलह, अन्य लोगों से विवाद इत्यादि आग्नेय कोण के वास्तुदोषों के कुप्रभाव देखे हैं। इसी प्रकार दक्षिण नैऋत्य कोण में भूमिगत पानी का स्रौत होने पर उस घर की स्त्रियों को गंभीर मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से ग्रस्त देखा और पश्चिम नैऋय में होने पर पुरूषों को कष्ट में देखा। विदिशा प्लॉट उत्तर दिशा को ईशान कोण मानतें हुए वास्तु सिद्धांतों के अनुसार भवन निर्माण करें। विदिशा प्लॉट में भी घर बनाते समय उत्तर-पूर्व और ईशान में ज्यादा जगह छोडऩी पड़ती है। मुख्य द्वार, बोरिंग, भूमिगत पानी का टैंक, सैप्टिक टैंक, कुंआ इत्यादि चित्र में निदर्शित स्थानों पर करना चाहिए। विदिशा प्लॉट पर घर का निर्माण प्लॉट के अनुसार करना चाहिए, न कि दिशा के अनुसार। विभिन्न दिशाओं में स्थित विदिशा प्लॉट पर भी चित्र में बताए अनुसार वास्तु अनुरूप घर बनाया जा सकता है।

जिस प्लॉट में दिशाएं मध्य में न होकर कोने में होती हैं, वह विदिशा प्लॉट कहलाता है। विदिशा प्लॉट में चारों दिशाएं पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण प्लॉट के कोनों में रहती हैं और चारों  कोण ईशान, आग्नेय, वायव्य और नैऋत्य, दिशाओं के मध्य में रहते हैं। पुराने समय में जितने भी भवन बनते थे उनकी दिशाएं मध्य में होती थी। यहां तक की गांव के लोग भी धु्रव तारे को सीध में रखकर घर बनाते थे। जिससे चारों दिशाएं अपने आप घर में मध्य में आ जाती थी। शायद इसी कारण भारतीय वास्तुशास्त्र के किसी भी प्राचीन ग्रंथ में विदिशा प्लॉट के बारे में कोई वर्णन मेरे पढऩे में नहीं आया है। आजकल दिशाओं का ध्यान न रखते हुए भवन निर्माण किए जा रहे है जिनमें कई बार दिशाएं घर के मध्य में न होकर इधर-उधर खिसकी हुई होती है। ऐसे प्लॉट पर भवन निर्माण करना वास्तु विपरित तो नहीं है किंतु ऐसे प्लॉट पर किस तरह वास्तुनुकुल निर्माण किया जाए इसके बारे में सही जानकारी कहीं नहीं मिलती। विदिशा प्लॉट पर भवन निर्माण के बारे में दक्षिण भारत के कुछ वास्तुशास्त्रियों ने जानकारी अपनी किताबों में दी है लेकिन मेरे विचार से उनमें कुछ त्रुटियां है क्योंकि, जब वास्तु विषय पर मेरा व्यवहारिक ज्ञान कम था, उस दौरान मैंने विदिशा प्लॉट पर जो भवन निर्माण करवाएं या वास्तुदोष दूर करवाए तो वहां मुझे सकारात्मक परिणाम नहीं मिले और बाद में उन्हें मुझे ठीक करवाना पड़ा। विदिशा प्लॉट में भी घर बनाते समय उत्तर-पूर्व और ईशान में ज्यादा जगह छोडऩी पड़ती है। मुख्य द्वार, बोरिंग, भूमिगत पानी का टैंक, सैप्टिक टैंक, कुंआ इत्यादि चित्र में निदर्शित स्थानों पर करना चाहिए। विदिशा प्लॉट पर घर का निर्माण प्लॉट के अनुसार करना चाहिए, न कि दिशा के अनुसार। विभिन्न दिशाओं में स्थित विदिशा प्लॉट पर भी चित्र में बताए अनुसार वास्तु अनुरूप घर बनाया जा सकता है।

विदिशा प्लॉट का वास्तु अनुसार आठ भागों में विभाजन

दोस्तो! मुझे विदिशा प्लॉट पर देश-विदेश में कई जगह पर वास्तु पर्रामश देने का मौका मिला है। मैंने विदिशा ओर खिसकी हुई थी। मुझे लगता है उस वास्तुविद् द्वारा कम्पास देखने में किसी प्रकार की चूक हो गई। क्योंकि, कम्पास देखने में लगभग दो डिग्री की ही चूक हुई थी। क्योंकि, जब मैं उस बंद पड़ी इंडस्ट्री का वास्तु परामर्श देने गया तब मैंने पाया कि यदि उस इंडस्ट्री के प्लॉट को विदिशा प्लॉट ना माने तो निर्माण पूर्णत: वास्तुनुकुल करवाया गया है। विदिशा प्लॉट में यह समस्या तब आती है, जब उत्तर दिशा पश्चिम दिशा की ओर खिसकी हुई हो और इसके विपरित यदि उत्तर दिशा पूर्व दिशा की ओर खिसकी हो तो ऐसी स्थिति में कोई चिंता की बात नहीं क्योंकि, ऐसी स्थिति में प्लॉट का सामान्य प्लॉट मानकर वास्तु किया जाता सकता है। मुझे भी कई  वर्षों  के वास्तु परामर्श के दौरान केवल एक बार कानपुर में 22 डिग्री पर और एक बार लुधियाना में 24 डिग्री पर स्थित विदिशा प्लॉट का वास्तु करने का मौका मिला है। 24 से ज्यादा डिग्री पर स्थित विदिशा प्लॉट पर कार्य करने के मौके तो काफी मिले है। विदिशा प्लॉट में भी घर बनाते समय उत्तर-पूर्व और ईशान में ज्यादा जगह छोडऩी पड़ती है। मुख्य द्वार, बोरिंग, भूमिगत पानी का टैंक, सैप्टिक टैंक, कुंआ इत्यादि चित्र में निदर्शित स्थानों पर करना चाहिए। विदिशा प्लॉट पर घर का निर्माण प्लॉट के अनुसार करना चाहिए, न कि दिशा के अनुसार। विभिन्न दिशाओं में स्थित विदिशा प्लॉट पर भी चित्र में बताए अनुसार वास्तु अनुरूप घर बनाया जा सकता है।

 

विशेष

मैं उन पाठकों से क्षमा चाहता हूं जिन्होंने वास्तु विषय पर मेरे द्वारा लिखी पूर्व में प्रकाशित पुस्तकें एवं लेख पढ़े है क्योंकि, उनमें मैंने विदिशा प्लॉट पर पूर्व दिशा में भी भूमिगत पानी का स्रौत बनाने की सलाह दी है। तब वास्तु विषय पर मेरा अध्ययन ज्यादा और व्यवहारिक अनुभव में कमी थी। कई वर्षों के वास्तु निरीक्षण एवं शोध के बाद मैंने पाया है कि विदिशा प्लॉट में उत्तर दिशा ईशान कोण, पूर्व दिशा आग्नेय कोण, दक्षिण दिशा नैऋत्य कोण और पश्चिम दिशा वायव्य कोण की तरह परिणाम देने लगती है। वास्तु निरीक्षण के दौरान मैंने कई जगह पाया है कि विदिशा प्लॉट में पूर्व दिशा में भूमिगत पानी का स्रौत होने पर वहां रहने वाले परिवार के बीच आपसी कलह, अन्य लोगों से विवाद इत्यादि आग्नेय कोण के वास्तुदोषों के कुप्रभाव देखे हैं। इसी प्रकार दक्षिण नैऋत्य कोण में भूमिगत पानी का स्रौत होने पर उस घर की स्त्रियों को गंभीर मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से ग्रस्त देखा और पश्चिम नैऋय में होने पर पुरूषों को कष्ट में देखा। कई वर्षों  तक विदिशा प्लॉट पर सफलतापूर्वक काम करने के बाद मैं आपको विश्वास पूर्वक सलाह दंूगा कि आप उत्तर दिशा को ईशान कोण मानते हुए वास्तु सिद्धांतों के अनुसार भवन निर्माण करें। विदिशा प्लॉट पर ऐसे निर्माण करके रहने वाली निश्चित सुखद एवं सरल जीवन व्यतीत करेंगें।

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