वाटर गार्डन दें आपके घर को अलग अंदाज़

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water indoor garden
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आम गार्डन से हटकर वॉटर गार्डन बरबस अपनी ओर लोगों की निगाहें खींच लेते हैं। पानी में लगे हुए तैरते और स्थिर पेड़-पौधे हर किसी को अपना मुरीद बना लेते हैं। वॉटर गार्डनिंग के लिए आप छोटे से लेकर बड़े पौधें का भी चुनाव कर सकते हैं। गर्मी में खासकर इस तरह के गार्डन घर बैठे शीतलता का एहसास देते हैं।

फूल, पौधें भला किसे अच्छे नहीं लगते हैं। यहीं वज़ह है, लोग बाग, फूल -पौधे को किसी भी रूप में अपने घरों में लगाना चाहते हैं, फिर चाहे वह इंडोर प्लांट के रूप में हो, हैगिंग गार्डन के रूप में हो, टैरिस गार्डन के रूप में या फिर रूफ गार्डन के तौर पर। लेकिन यदि आप गार्डन के वाकई में मुरीद हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं गार्डन के ही एक और अलग रूप के बारे में। खासकर यदि फ्लैट कल्चर में रहते हैं तो यह गार्डन का तरीका आपके घर को एक अलग ही लुक देगा। गार्डन का यह रूप वॉटर गार्डन के रूप में जाना जाता है। हालांकि भारतीय परिवेश को देखते हुए यह कोई गार्डन का अनोखा अंदाज़ नहीं है, बल्कि बौद्ध धर्म उदय के ज़माने से ही इस तरह के गार्डन प्रचलित हैं। उस वक्त गार्डन का यह रूप छोटे-बड़े तालाबों में दिखने को मिलते थे , जो कि अब घटते तालाबों व सिमटती जगहों को देखते हुए फ्लैट्स में कंटेनर वॉटर गार्डन में तब्दील हो गए हैं।

वॉटर गार्डन की कहानी, एक्सपर्ट की जुबानी

आइए जानते हैं, वॉटर गार्डन के बारे में और भी बहुत कुछ। जिसके बारे बताने जा रही हैं हार्टीकल्चर विशेषज्ञ डॉ प्रज्ञा रंजन। वॉटर गार्डनिंग में मुख्य रूप से तीन प्रकार के पौधें लगाए जाते हैं। इन पौधों को उनकी विशेषता के अनुसार तीन भागों में विभाजित किए गए हैं।

सबमर्ज प्लांट- ये प्लांट वहां लगाएं जाते हैं, जहां पानी की गहराई 15-20 इंच हो, वहां ये पौधे आसानी से बढ़ते हैं। यानि की यह पौधें पानी में पूरी तरह से डूबे रहते हैं। इसे ऑक्सीजेनेरेट्स प्लांट भी कहा जाता है, क्योंकि यह पानी की सफाई करने के साथ-साथ पानी में ऑक्सीजन की भी सप्लाई करता है। इस प्रकार के पौधें के उदाहरण हैं, अनचेरिस, फनवर्ट, फेदर ग्रास और ब्लड ग्रास, वाल्ड क्लीरे और फनवोर्ट।

इर्मजेन्ट प्लांट-इस प्रकार के प्लांट का तीन-चौथाई हिस्सा पानी की सतह में डूबा रहता है। जैसे एरोहेड, वॉटर ब्लू बेलस व कॉर्कस्क्रू

फ्लोटिंग प्लांट-ये प्लांट पूरी तरह से पानी में तैरते रहते हैं जैसे वेलवेट लीफ, वाटर हयासिन्थ व वाटर लेटस्सु। अत्यधिक गहरे पानी में लगाए जाने वाले पौधे में कमल, वाटर लिली, मखाना और विक्टोरिया आदि हैं और इसे छोटे से कंटेनर में नहीं उगाया जा सकता है। लेकिन यदि पानी का लेवल बीस इंच तक है तो उसमें स्मॉल वॉटर लिली उगाए जा सकते हैं। कमल जैसे पौधें के लिए कंटेनर वॉटर सही नहीं होते हैं। इसके लिए  दो से तीन फीट पानी की आवश्यकता होती है।

वॉटर गार्डनिंग के लिए तैयारी

1-सबसे पहले एक कंटेनर लिया जाता है, जिसमें ड्रेनेज या होल न हो।

2-अब कंटेनर में किसी भी किनारे पर ईंट या स्टैंड रखा जाता है जिस पर कि छोटे जलीय पौधें को रखा जा सके।

3-अब बड़े जलीय पौधों को कंटेनर के बेस में रखा जाता है और छोटे जलीय पौधों को ईंट या स्टेंड पर जिससे कि वो पूरी तरह से पानी में डूबे नहीं।

4-इसके बाद कंटेनर में पानी भर दिया जाता है तथा एक्स्ट्रा पत्तियों को काटकर हटा दिया जाता है ताकि पत्ते पानी में गले नहीं।

5-यदि आप इस कंटेनर को सजाना चाहते हैं तो कुछ सजावटी पत्थर लेकर कंटेनर में रखें और यह छोटे गमलों इस तरह से रखे जाते हैं कि आधे पानी से बाहर दिखाई दे, आप चाहे तो इसमें फाउंटन भी ऐड कर सकते हैं।

कंटेनर का चुनाव

कंटनेर वॉटर गार्डन के लिए वैसे वॉटरप्रुफ कंटेनर का चुनाव करना चाहिए, जिसमें कि चार गैलेन पानी समा सके। यह ध्यान रखना चाहिए कि कंटनेर आठ पाउंड पर गैलन के हिसाब से भरा हुआ होना चाहिए। इस हिसाब कंटेनर की होल्डिंग क्षमता अच्छी होनी चाहिए। आप अपनी च्वॉइस के हिसाब से किसी भी आकार कंटेनर जैसे राउंड, ओवल, स्क्वेयर या फिर रेक्टेंगल शेप में चुन सकते हैं। इसी तरह से कंटेनर की क्वॉलिटी का चुनाव आप अपने बजट और च्वॉइस को देखते हुए कर सकते हैं। यह कंटेनर कई प्रकार के हो सकते हैं। जैसे कि कंक्रीट, प्लास्टिक, फाइवर ग्लास, सिरेमिक, सिल्ड सीमेंट, चीनी मिट्टी के बरतन  या फिर अन्य कोई धातु के बरतन। वॉटर गार्डनिंग के लिए पुराने बाथ टब, कलई चढ़े हुए वॉटर टेंक आदि का भी यूज किया जा सकता है। वेस्ट बंगाल में जले हुए मिट्टी के बरतन का उपयोग वॉटर गार्डनिंग के लिए किया जाता है। इन कंटेनर्स का साइज आप के पास उपलब्ध जगह पर निर्भर करता है। एक कंटेनर में चार से पांच पौधें को रखने के लिए  उस कंटेनर को 16 इंच चौड़ा और 12 इंच गहरा होना चाहिए।

ध्यान रखने योग्य बातें:

पानी में पौधें लगाना या उगाना अपने आप में किसी रोमांच से कम नहीं है, लेकिन पौधे की सही परवरिश  के लिए ज़रूरी है, इसकी सही तरीके से देखभाल होना, तभी ये पौधे पूरी तरह से विकसित हो पाएंगे और अधिक दिनों तक टिके रहेंगे।

1-कंटेनर में पानी पूरी तरह से भरे हुए होने चाहिए।

2-आजकल स्वास्थ्य को देखते हुए पानी में क्लोरिन की मात्रा मिलाई जाने लगी है, जो कि पौधों के लिए नुकसानदेह है। पौधों को इसके दुष्प्रभाव से बचाने के लिए पहले कंटेनर में पानी भरकर एक से दो दिन तक के लिए छोड़ देना चाहिए, तब इसमें पौधे लगाने चाहिए।

3-कई शहरों में क्लोरिन से भी अधिक प्रभावशाली केमिकल क्लोरोमाइन पानी में मिलाया जाने लगा है। इस स्थिति में आप पानी में से इसके प्रभाव का खत्म करने वाला प्रॉडक्ट खरीद सकते हैं। यह प्रॉडक्ट आपको आसानी से गार्डन सेंटर और पाउंड सप्लाई डीलर के मिल जाएंगे।

4-वॉटर गार्डन वाले पानी में आप किसी भी तरह का न तो वॉटर सॉफ्टनर और न ही केमिकल यूज करें।

5-ऐसे पौधें को वहां पर रखें, जहां कम से कम छह घंटे धूप आते हों।

6-वॉटर गार्डन वाले कंटेनर को किसी वृक्ष के नीचे नहीं रखें अन्यथा पौधें की छाया और टूटे हुए पत्ते पौधें को नुकसान पंहुचा सकते हैं।

7-हर सीजन में नए पौधें खरीदें।

 

प्रस्तुति-सीमा झा

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