हाउसिंग फॉर ऑल-2022 के बढ़ते कदम

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मोदी सरकार हाउसिंग फॉर ऑल-2022 के कॉन्सेप्ट को अमली जामा पहनाने के लिए लैंड बैंक की तैयारी जोर-शोर से शुरू कर दी है। इस रणनीति को जानकार मिशन-2019 के रूप देख रहे हैं। पीएमओ की ओर सभी सरकारी विभागों को गैर-उपयोगी जमीन (खासतौर पर विकसित सरकारी कॉलोनियों की अनुपयोगी जमीन) की पहचान करने को कहा गया है। इस प्रक्रिया से सरकार के पास अच्छी खासी ज़मीन उपलब्ध हो जाएगी। लैंड बैंक के माध्यम से जहां सरकार अफोर्डेबल हाऊसिंग कॉन्सेप्ट से सभी के लिए घर के सपने को साकार कर सकती है, वहीं जमीन की कमी के चलते हाऊसिंग प्रॉजेक्ट्स की योजना बनाने में मुश्किलें को भी दूर किया जा सकता है। पीएमओ ऑफिस राज्य सरकार से कहा है कि वे इन जमीनों की उपलब्धता को लेकर प्रस्ताव भेजें। इस योजना के बारे में सूत्र ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय ने विकसित सरकारी कॉलोनियों में जमीनों का चुनाव शुरू कर दिया है। इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं और मंजूरी में किसी तरह की समस्या आड़े नहीं आएगी। अब तक केंद्र सरकार ने 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 90,000 करोड़ रुपये के हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी है। पीएमओ ऑफिस विकास कार्यों की मॉनिटरिंग कर रही है। इसे लेकर कुछ राज्य दूसरे राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अच्छा प्रदर्शन कर रहे राज्यों के पास लाभार्थियों की लिस्ट है और उनके पास जमीन की उपलब्धता की कोई कमी नहीं है। ऐसे में सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी कॉलोनियों की पहचान करें जहां नए घर का निर्माण किया जा सके।

आपको बता दें कि सरकार ने 16.42 लाख किफायती हाउस के निर्माण को मंजूरी दी है, इनमें सबसे अधिक 2.27 तमिलनाडु के लिए हैं। इसके अलावा 1.94 लाख की संख्या के साथ आंध्र प्रदेश दूसरे और 1.81 लाख मकानों के साथ मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है। गौरतलब है कि बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनावों के समय हाउसिंग फॉर ऑल-2022 स्कीम के तहत सबको घर देने का वादा किया था। लेकिन सरकार केरल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में इस स्कीम कमजोर प्रगति से चिंतित है।

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