इंटरनेट की खोज और बदल गई दुनिया

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इंटरनेट से जुड़कर आज विश्व एक गांव का रूप ले लिया है। पल-पल में बदलती दुनिया की हर एक हलचल की जानकारी सेकेंड्स में मिल जाती हैं। वर्ष 1969 की खोज इंटरनेट मात्र 48 वर्षों में दुनिया को बदल के रख दिय। देखा जाय तो इंटरनेट हमारी ज़िन्दगी जीने के अंदाज़ को ही बदल डाला है। इसके बिना ज़िन्दगी की कल्पना करना मुश्किल है। आज हम ऑफिस हो या घर ज्यादा वक्त इसी के साथ बिताते हैं। इसने राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्र के विस्तार में एक विकसित दुनिया बसा ली है। सूचना के आदान-प्रदान में इसकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
खोज भी कम दिलचस्प नहीं
इंटरनेट की खोज भी कम दिलचस्प नहीं है। वर्ष 1969, दिन बुधवार, तारीख थी 29। रात के करीब 10.30 बजे अमेरिका के यूएलसीए प्रोग्रामर चार्ली क्लीन ने अपने प्रोग्राम स्थल से कैलिफ़ोर्निया स्थित सेंटर में “आई”और “ओ” दो शब्द को इलेक्ट्रॉनिक मैसेज के रूम में भेजा। इस मैसेज को भेजने के साथ ही सेंटर पर लगे सारे सिस्टम बंद हो गए। भले ही सिस्टम बंद हो गए लेकिन उसके बाद पूरी दुनिया ही बदल गई। इस इलेक्ट्रोनिक मैसेज के साथ ही इंटरनेट की खोज हो गई। लेकिन उस समय इसे अरपानेट (एडवासंड रिर्सच प्रोजेक्ट्स एजेंसी नेटर्वक)की संज्ञा दी गई।
भारत में इंटरनेट सेवा की शुरूआत 15 अगस्त 1995 से
जहां तक भारत का सवाल है, यहां पर इंटरनेट सेवा की शुरूआत 15 अगस्त 1995 में हुई। उस समय विदेश संचार निगम लिमिटेड ने अपनी टेलीफोन लाइन को दुनिया के कंप्यूटर्स से भारतीय कंप्यूटर्स को जोड़के एक नये युग का श्री गणेश किया। आम लोगों के लिए इंटरनेट विदेश संचार गेटवे सर्विस के साथ ही आरंभ हुआ। सरकार ने निजी कंपनियों को इंटरनेट सेवा क्षेत्र में आने की अनुमति वर्ष 1998 में प्रदान की। इसी साल गूगल के आने के बाद इंटरनेट की दुनिया एक ऐसी स्वरूप धारण कर ली, जो अब आविष्कार और आवश्यकता दोनों की जननी है।

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