जिओ सिम और कहानी भारत की

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    JIO SIM
    Third Party Image

    मुकेश के झा

    जिओ सिम के आने से खलबली मची है। लॉचिंग एड में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर से हिंदी और अंग्रेज़ी पेपर गुलजार है। टेलीविज़न की दुनिया सुनहरे दौर से गुजर रही है। रह रह कर रेडियो पर जिओ का विज्ञापन सुर में गा रहा है। इसके रंग में पूरा का पूरा इंडिया रंग गया है। लेकिन विपक्षी पार्टियां रंग में भंग डालते हुए आरोप लगा रही है कि विज्ञापनों में बिना अनुमति के पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापी गई है। विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताते हुए ऐतराज जताया है। इस मामले में जनता ज्यादा ध्यान न देकर फायदे की हसीन दुनिया में है। जैसे गोया…इसे इस बात से कोई लेना-देना नहीं हो।
    जिओ के फ्री सिम से आपस में बातचीत करने का विश्व रिकॉर्ड बना है। भाईचारे और प्रेम की अविरल गंगा बह निकली है। फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट करने वालों की बाढ़ सी आ गई है। मार्क जुकरवर्ग की कंपनी दिल से कुलांचे भर रही है। राज्यों में होने वाले चुनाव की रणनीति मोबाइल पर ही तैयार हो गई है। चुनाव को लेकर चुनाव विश्लेषक की भूमिका में जनता वाइव्रेट मोड पर है।
    लेकिन कुछ जनता अपने मोबाइल हैंडसेट को लेकर परेशान भी है। लेकिन कुछ ही दिनों के बाद से विज्ञापन की धून और आवाज़ दोनों ही सुनाई देने लगी है, 2 जी फोन में भी 4 जी, 3 जी फोन में भी 4 जी, ये चमत्कार…जिओ वाई-फाई राउटर से होने लगा है।
    इस वाई-फाई का दाम भी कम हाई-फाई नहीं है। खैर..जिओ आने से हर मोबाइल वाले सेट पर कई आकर्षक ऑफर आ गए हैं, जो पहले की तुलना में काफी सस्ते हैं। जिसका आनंद हर एक जनता भरपूर रूप से उठा रही है। जनता को लगने लगा है कि अब सही मायने में इंडिया में मोबाइल क्रांति हुई है और ये क्रांति बिना जिओ शायद इतना जल्दी संभव नहीं था।

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