डिजाइनिंग से तरक्की

0
81
Capture-
rm-interior

घर हो या ऑफिस लुक काफी मायने रखते हैं। डिज़ाइनिंग की दुनिया को इससे बेहतर ढंग से जोड़ा जाय तो जहां यह देखने में सुन्दर में लगता है, वहीं तरक्की के मार्ग को भी प्रशस्त करता है। खासकर, ऑफिस के डिज़ाइनिंग से बिज़नेस का  काफी गहरा ताल्लुकात होता है। निजी बिज़नेस को उन्नति के पर लगाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। ऑफिस को सुव्यवस्थित करने के लिये उपयुक्त एरिया, बजट, इंटीरियर पर विशेष फोकस करते हुए प्लानिंग करना होता है। यही नहीं यदि आप वास्तु पर भरोसा करते हैं तो उसके अनुसार ऑफिस की डिजाइनिंग पर ध्यान देना चाहिये।

मिस्टर सुरेश की कहानी

मिस्टर सुरेश काफी दिनों से बिज़नेस कर रहे हैं। बिज़नेस चल भी रही है ठीक-ठाक। लेकिन कुछ दिनों से प्रगति की रफ्तार में कमी आने सुरेश जी चिन्तित रहने लगे हैं। उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि सब कुछ सही है, पर मुनाफा या प्रगति रूक सी क्यों गई हैं। बाद में उन्हें किसी ने बताया कि संभव है कि आप अपने ऑफिस का डिज़ाइन बदलें तो सब कुछ पहले जैसा हो जाए। हालांकि इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि तरक्की मेहनत और कार्यक्षमता पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसके लिए प्रतिस्पर्धात्मक रवैया अपनाना होगा। लेकिन उन्नति के लिये ऑफिस का सही डिजाइनिंग का भी योगदान भी काफी मायने रखता है। इसके लिए आपको अपने ऑफिस को भी सुव्यवस्थित करना होगा। ऑफिस के लिये निश्चित जगह खरीदने के बाद सबसे महत्वपूर्ण उसके अंदर की डिजाइनिंग होती है। ऑफिस को सुव्यवस्थित करने के लिये उपयुक्त एरिया, बजट, इंटीरियर पर विशेष फोकस करते हुए प्लानिंग करना होता है। यही नहीं यदि आप वास्तु पर भरोसा करते हैं तो उसके अनुसार ऑफिस की डिजाइनिंग पर ध्यान देना चाहिये। ऑफिस के लिये फर्नीचर, लाइटिंग्स तथा अन्य सुविधाजनक साधन कर्मचारी की उत्पादन क्षमता को प्रभावित करता है। इस प्रकार से डिजाइनिंग कंपनी की तरक्की को प्रोत्साहित करता है।

ऑफिस की डिजाइनिंग

असल में ऑफिस के कुल कर्मचारियों को याद में रखना आवश्यक है। यदि ऑफिस में कुल 5 लोग काम करते हैं तो ऑफिस की डिजाइनिंग अन्य ऑफिसों की तुलना में भिन्न होगी। हालांकि यह मूल रूप से काम की प्रकृति पर निर्भर करता है। कहने का मतलब है कि जैसा काम होता है, उसके अनुरूप आफिस को डिजाइन करना होता है। इसके अलावा ऑफिस में आने वाले क्लाइंट्स की संख्या में इसको प्रभावित करती है। एक छोटे आफिस में भी कम से कम 20 गुणा 20 फीट जगह की आवश्यकता होती है। बेहतरीन डिजाइनिंग के लिये समकोण ऑफिस को तरजीह दी जाती है।ऑफिस को डिजाइन करने के पहले एक फ्लो चार्ट बनाया जाता है जो कि बजट और जगह पर आधारित होता है। यदि ऑफिस में रिसेप्सन की जरूरत है तो उसके लिये थोड़ी जगह छोड़ी जा सकती है।

आमतौर पर ऑफिस का 20 प्रतिशत गलियारे के लिये छोड़ा जाता है ताकि इस जगह पर आसानी से चहलकदमी की जा सके। असल में छोटे ऑफिसों को ऐसे व्यवस्थित करना चाहिये ताकि कम से कम जगह को ज्यादा से ज्यादा उपयोगी बनाया जा सके। ऑफिस के अंदर एक छोटी सी जगह को स्टोर की तरह इस्तेमाल करें। यदि ऑफिस में स्पेशल केबिन की आवश्यकता न हो तो उससे बचे रहें। क्योंकि केबिन बनवाने से अतिरिक्त जगह की ज़रूरत होती है। इससे अन्य कर्मचारियों को परेशानी भी उठानी पड़ सकती है। अत: टॉप एग्जिक्यूटिव या अकाउंट डिपार्टमेंट के अलावा अन्य डिपार्टमेंट को एक साथ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

बजट और डिजाइन

ऑफिस को डिजाइन करने से पहले अपने बजट और डिजाइन की अधिकतम उपयोगिता को समझ लेना जरूरी है। इंटीरियर, प्रबंधन की गुणवत्ता, समय, अन्य साधनों के आधार पर बजट प्लान किया जाता है। इसी प्रकार डिजाइनिंग आधुनिक उपकरण पर निर्भर करता है। तमाम उपकरणों को अपनी सहूलियत के अनुसार ही खरीदें। ध्यान रखें ऐसी चीजें खरीदें जो ऑफिस को मार्डन लुक भी देती हों और आपकी जरूरत के अनुसार सुविधाजनक भी हो। ऐसी किसी चीज को ऑफिस के लिये न खरीदें जो भविष्य में बोझ मात्र बनकर रह जाए। ऑफिस में इस प्रकार की चीजों से अतिरिक्त जगह का भी इस्तेमाल होता है। इसके अलावा बेवजह आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। ऑफिस को सेट करने के लिये कांट्रेक्टर से संपर्क करें और कम से कम में ज्यादा से ज्यादा फायदे पर विचार-विमर्श अवश्य करें, लेकिन ध्यान रखें कि ऐसे किसी कांट्रेक्टर के पास न जाएं जिसका मोलभाव आपके आफिस की तुलना में ज्यादा हो।

ऑफिस का मार्डन लुक

ऑफिस को मार्डन लुक देने में गुड लाइटिंग, पेंटिंग कलर और कुछ इंटीरियर शोकेस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऑफिस में कम से कम इतनी खिड़कियां हों ताकि दिन के उजाले में कृत्रिम रोशनी की जरूरत न पड़े। खिड़कियां होने से ऑफिस में खुली हवा आती है जो कि कर्मचारियों को सक्रिय रहने में मदद करती है। इससे काम में मन लगा रहता है और कम्पनी पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। कम्पनी के डेकोरेशन के दौरान यह ध्यान रखें कि ऑफिस को डिपार्टमेंट अनुसार विभाजित करते हुए दीवारों का कम इस्तेमाल करें। दरअसल दीवार स्थायी होती है इसलिये उसे बार-बार तोडक़र बनवाना आसान नहीं होता। इसलिये दीवार की बजाय पतली प्लाई का इस्तेमाल करें।

किसी भी डिजाइन को स्थायित्व देने से पहले यह ध्यान रखें कि क्या आपको इसमें अन्य किस्म के बदलाव नहीं चाहिये? प्लाई लगवाने से कर्मचारियों की समय-समय पर मूड में चेंजेस लाने के लिये उनके बैठने की पोजिशन में भी फेरबदल किया जा सकता है। इन सबके अलावा ऑफिस में ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल करें जो एक साथ कई काम करते हों मसलन 3 इन। प्रिंटर। इसमें प्रिंटलर, स्कैनर, फैक्स आसानी से हो सके। इससे कम पैसा खर्च होता है, कम जगह लगती है और दिखने में भी आकर्षक लगता है। हालांकि सोलर लाइटिंग भी ऑफिसों के लिये फायदेमंद होता है। लेकिन इसके लिये बड़ी छत का होना आवश्यक है जो कि छोटे ऑफिसों में मुमकिन नहीं हो पाता। इसके बावजूद ऐसा संभव हो तो सोलर लाइटिंग का इस्तेमाल करें। ऑफिस में सेंसर टैप का इस्तेमाल कर सकते हैं इससे पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है। कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि छोटे ऑफिसों में थोड़े बहुत खर्च के साथ आफिस को गुड लुक दिया जा सकता है। साथ ही ऑफिस के कर्मचारियों के अनुसार माहौल को ढाला जा सकता है। इससे कर्मचारी ऑफिस में काम करते वक्त सुकून महसूस करते हैं। नतीजतन ज्यादा से ज्यादा काम करने की संभावना बढ़ जाती है। जब ऑफिस खूबसूरत हो माहौल कर्मचारियों के अनुकुल हो और सबका मूड प्रेश रहे तो क्या आपकी कम्पनी को कोई तरक्की करने से रोक सकता है? भला किसका इंतजार कर रहे हैं। जल्द आफिस की लोकेशन और इंटीरियर फोकस करें।

LEAVE A REPLY